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Detailed पाठ 2 साना साना हाथ जोड़ि NCERT Solutions for Class 10 Hindi
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Class 10 Hindi पाठ 2 साना साना हाथ जोड़ि NCERT Solutions PDF
NCERT Solutions for Class 10 Hindi for Kritika पाठ 3 साना साना हाथ जोड़ि
3. साना-साना हाथ जोड़ि (लेखिका: मधु कांकरिया)
पाठ का सार
प्रस्तावना: लेखिका मधु कांकरिया ने अपने यात्रा-वृत्तांत में गंगटोक (गंतोक) से लेकर हिमालय तक की अपनी दुर्गम यात्रा का अत्यंत सजीव चित्रण किया है। इस यात्रा-वृत्तांत में केवल प्राकृतिक सौंदर्य का वर्णन ही नहीं है, बल्कि लेखिका ने उन कठिन और विषम परिस्थितियों का भी स्पर्श किया है जिनमें पहाड़ों के स्त्री और पुरुष अपने कठोर जीवन-संघर्ष में लगे रहते हैं। पाठ के माध्यम से लेखिका के संवेदनशील और सहृदय व्यक्तित्व का पता चलता है। उनका मन प्रकृति की मनोहारी घटाओं को निहारने के साथ-साथ उन पहाड़ी महिलाओं की ओर भी अधिक आकर्षित होता है, जो अत्यंत जोखिम भरे और कठिन श्रम वाले कार्यों में लगी हुई हैं।
गंगटोक शहर: लेखिका जब गंगटोक शहर पहुँचती हैं, तो रात के समय जगमगाते शहर को देखकर उन्हें ऐसा प्रतीत होता है मानो आकाश के सारे टिमटिमते तारे नीचे धरती पर बिखर गए हों। उन्होंने गंगटोक को 'बादशाहों का एक ऐसा शहर' कहा है जिसका सुबह, शाम और रात - सब कुछ अत्यंत सुंदर और सम्मोहक है। सुबह के समय लेखिका के होठों पर एक नेपाली युवती से सीखी हुई प्रार्थना की ये सुंदर पंक्तियाँ गूँज उठती हैं - "साना-साना हाथ जोड़ि, गरदहु प्रार्थना। हाम्रो जीवन तिम्रो कौसेली।" (अर्थात - छोटे-छोटे हाथ जोड़कर प्रार्थना कर रही हूँ कि मेरा सारा जीवन अच्छाइयों को समर्पित हो)। सुबह होते ही लेखिका को यूमथांग के लिए प्रस्थान करना था, परंतु जागते ही वे बालकनी की ओर दौड़ीं क्योंकि उन्हें बताया गया था कि यदि मौसम पूरी तरह साफ हो, तो बालकनी से ही हिमालय की तीसरी सबसे ऊँची चोटी 'कंचनजंघा' के भव्य दर्शन होते हैं। यद्यपि हल्के बादलों के कारण कंचनजंघा तो दिखाई नहीं दी, परंतु बगीचे में चारों ओर खिले हुए रंग-बिरंगे फूलों को देखकर ऐसा लगा मानो वे फूलों के किसी विशाल बगीचे में आ गई हों। यूमथांग यहाँ से लगभग १४९ किलोमीटर की दूरी पर था, जिसके बारे में उनके ड्राइवर सह गाइड जितेन नार्गे ने बताया कि रास्ते में अत्यंत गहरी घाटियाँ और फूलों से लदी सुंदर वादियाँ मिलेंगी।
यूमथांग तक का रास्ता: यूमथांग के पहाड़ी रास्तों पर यात्रा करते समय लेखिका को शांति और अहिंसा के प्रतीक के रूप में सफेद रंग की १०८ बौद्ध पताकाएँ (ध्वज) एक कतार में सजी हुई दिखाई दीं, जिन पर पवित्र मंत्र लिखे हुए थे। जितेन नार्गे ने बताया कि बौद्ध धर्म में जब भी किसी बुद्धिस्ट (अनुयायी) का निधन होता है, तो उसकी आत्मा की परम शांति के लिए शहर से दूर किसी पवित्र स्थान पर ये १०८ पताकाएँ फहरा दी जाती हैं। इन पताकाओं को कभी उतारा नहीं जाता, बल्कि ये समय के साथ स्वतः ही नष्ट हो जाती हैं। इसी प्रकार, जब किसी नए शुभ कार्य की शुरुआत होती है, तब भी ऐसी पताकाएँ लगाई जाती हैं, परंतु वे रंगीन होती हैं। जितेन लगातार ये रोचक जानकारियाँ दे रहा था और लेखिका उसकी जीप में लगी 'दलाई लामा' की तस्वीर को निहार रही थीं, जैसी तस्वीर उन्होंने सिक्किम की कई दुकानों पर भी टँगी देखी थी।
रास्ते में 'कवि-लॉन्ग स्टॉक' नामक स्थान आया, जहाँ प्रसिद्ध हिंदी फिल्म 'गाइड' की शूटिंग संपन्न हुई थी। जितेन ने बताया कि यहाँ स्थानीय जातियों (लेप्चा और भूटिया) के बीच लंबे समय तक चले आपसी विवादों के बाद ऐतिहासिक शांति वार्ता और संधि-पत्र पर हस्ताक्षर किए गए थे। आगे बढ़ने पर एक कुटिया के भीतर घूमता हुआ धर्म-चक्र दिखाई दिया, जिसे जितेन ने 'प्रेयर व्हील' (प्रार्थना चक्र) बताया और कहा कि इसे घुमाने से मनुष्य के सारे पाप धुल जाते हैं। जैसे-जैसे जीप ऊँचाई की ओर बढ़ रही थी, मैदानी बस्तियाँ पीछे छूट रही थीं और नेपाली युवक-युवतियों के छोटे-छोटे घर तथा विशालकाय पर्वतों की चोटियाँ दिखाई देने लगीं। घाटियों के ऊपर बने सँकरे और दुर्गम रास्तों से गुज़रते समय ऐसा लगता था मानो रंग-बिरंगे फूल मुस्कुराकर उनका स्वागत कर रहे हों। इस असीम प्राकृतिक सुंदरता को देखकर जीप में बैठे अन्य सैलानी खुशी से झूमकर प्रसिद्ध गीत - "सुहाना सफ़र और ये मौसम हसीं..." गाने लगे, परंतु लेखिका एक शांत ऋषि की तरह मौन थीं और इस जादुई दृश्य को अपने भीतर समेट लेना चाहती थीं। उन्होंने खिड़की से बाहर सिर निकालकर चाँदी की तरह चमकती तिस्ता नदी के अनुपम सौंदर्य और 'सेवन सिस्टर्स वॉटरफॉल' (झरने) के विहंगम दृश्य को देखा, जहाँ सैलानी इस क्षण को कैमरों में कैद करने में व्यस्त थे।
मातृत्व और श्रम साधना का दृश्य
जीप से नीचे उतरकर लेखिका एक राजकुमारी की भाँति एक पत्थर पर बैठ गईं और बहते हुए झरने के शीतल जल में अपने पैर डुबो दिए, जिससे उनका मन अत्यंत शांत और काव्यमय हो उठा। उन्हें महसूस हुआ कि प्रकृति की इस अलौकिक सुंदरता के बीच उनके भीतर की सारी तामसिकता और कुटिल वासनाएँ बह गई हैं। जितेन ने उन्हें आगे बढ़ने के लिए कहा कि आगे इससे भी सुंदर नज़ारे मिलेंगे। थोड़ी दूर आगे बढ़ने पर अचानक लेखिका के मन से यह सौंदर्य का जादू उस समय छिन्न-भिन्न हो गया जब उन्होंने पहाड़ी महिलाओं को पत्थरों पर बैठकर भारी हथौड़े और कुदाल से पत्थर तोड़ते हुए देखा। उनकी कोमल और सुंदर काया पर पसीने की बूंदें थीं और कई महिलाओं की पीठ पर बंधी डोको (बड़ी टोकरी) में उनके छोटे बच्चे भी बंधे हुए थे। इस स्वर्गीय सौंदर्य के बीच भूख, मौत और ज़िंदा रहने के इस कठोर संघर्ष (मातृत्व और श्रम-साधना का अद्भुत मिलन) को देखकर लेखिका का हृदय भर आया। उन्होंने बी.आर.ओ. (Border Roads Organisation) के कर्मचारी से पूछा कि ये महिलाएँ क्या कर रही हैं, तो उसने बताया कि ये हिम्मती महिलाएँ उन दुर्गम पहाड़ी रास्तों को चौड़ा और सुगम बना रही हैं जहाँ सैलानी घूमने जाते हैं। उसने बताया कि यह अत्यंत जोखिम भरा कार्य है और ज़रा सी चूक सीधे खाई (पाताल) में गिरा देती है।
लेखिका को सिक्किम सरकार द्वारा रास्ते में लगाए गए उस बोर्ड की याद आई जिस पर लिखा था - "आप ताज्जुब करेंगे, परंतु इन रास्तों को बनाने में लोगों ने मौत को झुठलाया है।" उन्हें लगा कि देश की आम जनता हर जगह एक जैसा ही कठिन जीवन जीती है, जहाँ सारी मलाई और सुख एक तरफ है तथा आँसू, अभाव, यातना और वंचना दूसरी तरफ है। जितेन ने उन्हें उदास देखकर कहा कि "मैडम, ये हमारे देश की आम जनता है, इन्हें तो आप कहीं भी देख सकती हैं। आप पहाड़ों की सुंदरता को देखिए जिसके लिए आपने पैसे खर्च किए हैं।" परंतु लेखिका सोच रही थीं कि ये महिलाएँ कितना कम लेकर समाज को कितना अधिक वापस लौटाती हैं। तभी उन श्रम-सुंदरियों को खिलखिलाकर हँसते देख लेखिका को लगा कि खंडहर भी ताजमहल बन गया है।
स्कूल से लौटते पहाड़ी बच्चे: ऊँचाई की ओर बढ़ते हुए रास्ते में स्कूल से लौटते हुए पहाड़ी बच्चे मिले। जितेन ने बताया कि यहाँ का जीवन अत्यंत कठोर है। पूरे क्षेत्र में केवल एक ही स्कूल है, जहाँ बच्चे पढ़ाई के साथ-साथ अपनी माताओं के साथ मवेशी चराने, पानी भरने और लकड़ियों के भारी गट्ठर ढोने का काम भी करते हैं। जैसे-जैसे जीप आगे बढ़ रही थी, रास्ते और अधिक सँकरे तथा ख़तरनाक होते जा रहे थे, जहाँ जगह-जगह लगी चेतावनी पट्टियाँ यात्रियों को सचेत कर रही थीं।
चाय के बागानों में युवतियाँ: ढलते हुए सूरज की रोशनी में पहाड़ी महिलाएँ मवेशियों को चराकर वापस लौट रही थीं, जिनके सिर पर लकड़ियों के भारी गट्ठर थे। ढलती शाम के समय जीप चाय के बागानों से गुज़री, जहाँ सिक्किमी परिधान 'बोकू' पहने कई सुंदर युवतियाँ गुलाबी चेहरों और उमंग के साथ चाय की कोमल पत्तियाँ तोड़ रही थीं। सघन हरियाली के बीच उनका वह सौंदर्य और डूबते सूरज की इंद्रधनुषी छटा लेखिका के लिए असह्य आनंद बन गई और वे मंत्रमुग्ध हो उठीं।
लायुंग में पड़ाव: पर्वतों के नीचे बसी एक छोटी सी शांत बस्ती 'लायुंग' में उन्होंने पड़ाव डाला, जहाँ वे तिस्ता नदी के किनारे लकड़ी के एक छोटे से गेस्ट हाउस में ठहरे। हाथ-मुँह धोकर लेखिका तिस्ता के किनारे पत्थरों पर बैठ गईं। वातावरण में फैली असीम शांति को देखकर उन्हें महसूस हुआ कि ज्ञान का बोधिसत्व उनके भीतर धीरे-धीरे जागृत हो रहा है। उन्हें लगा कि प्रकृति की इस अनुपम लय, ताल और गति के साथ छेड़छाड़ करना मनुष्य का एक अक्षम्य अपराध है। रात गहराने पर सभी सैलानी घेरा बनाकर लोक-गीतों की थाप पर नाचने लगे, जहाँ लेखिका की सहेली मणि ने पचास वर्ष की आयु में भी ऐसा बेहतरीन नृत्य किया कि सभी दंग रह गए। सुबह उठकर लेखिका बर्फ की खोज में निकलीं, परंतु एक सिक्किमी नवयुवक ने बताया कि बढ़ते प्रदूषण (ग्लोबल वार्मिंग) के कारण स्नो-फॉल लगातार कम हो रहा है, परंतु ५०० फीट की ऊँचाई पर स्थित 'कटाओ' में बर्फ अवश्य मिल जाएगी। उन्होंने तुरंत 'कटाओ' की ओर अपनी यात्रा शुरू कर दी।
लायुंग से यूमथांग की ओर
कटाओ के पहाड़ी रास्तों पर आगे बढ़ने पर चारों ओर बिखरा हुआ सौंदर्य और अधिक निखर उठा। घाटियों में ढेरों रूडोडेंड्रॉन और प्रियुता के सुंदर फूल खिले हुए थे। जब वे 'कटाओ' पहुँचे, तो चारों ओर साबुन के झाग की तरह सफेद और मुलायम बर्फ बिखरी हुई थी। सभी सैलानी जीप से उतरकर बर्फ में मस्ती करने लगे और तस्वीरें खिंचवाने लगे। लेखिका को महसूस हुआ कि इसी आलौकिक और विहंगम प्राकृतिक सुंदरता के बीच हमारे महान ऋषि-मुनियों ने वेदों की रचना की होगी और जीवन के शाश्वत सत्यों को खोजकर 'सर्वे भवन्तु सुखिनः' का महामंत्र पाया होगा। उन्होंने सोचा कि ऐसा असीम सौंदर्य तो किसी क्रूर अपराधी के हृदय को भी दयालु बुद्ध की तरह पिघला सकता है। उनकी सहेली मणि ने दार्शनिक भाव से कहा कि "ये हिम शिखर पूरे एशिया के जल-स्तंभ हैं, जो सर्दियों में बर्फ के रूप में पानी का संचय करते हैं और गर्मियों की भीषण तपन में पिघलकर हमारी प्यास बुझाते हैं। प्रकृति की यह जल संचय की कितनी अनूठी और परोपकारी व्यवस्था है।"
आगे बढ़ने पर भारत-चीन सीमा के पास सैनिकों की चौकियाँ दिखाई दीं, जहाँ माइनस १५ डिग्री सेल्सियस की कड़कड़ाती ठंड में सैनिक देश की सीमाओं पर तैनात थे। एक सैनिक ने मुस्कुराकर कहा कि "आप लोग घरों में चैन की नींद सो सकें, इसीलिए हम यहाँ कड़ाके की ठंड में पहरा देते हैं।" लेखिका का हृदय उन जवानों के प्रति असीम आदर और कृतज्ञता से भर गया। यूमथांग लौटते समय जितेन ने उन्हें गुरु नानक देव जी की थाप से चावल बिखरने की कथा और देवी-देवताओं के पवित्र वास वाले क्षेत्रों की रोचक जानकारियाँ दीं। उसने बताया कि सिक्किम के लोग पहाड़ों और नदियों को पूजते हैं, वे कभी वहाँ गंदगी नहीं फैलाते। उसने यह भी बताया कि सिक्किम के भारत में विलय के बाद कैप्टन शेखर दत्ता के प्रयासों से इन दुर्गम घाटियों में रास्ते बनाकर पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया गया और नए स्थलों की खोज आज भी जारी है। लेखिका ने अंत में मन ही मन सोचा कि मनुष्य की इसी कभी न समाप्त होने वाली खोज का वास्तविक नाम ही 'सौंदर्य' है।
शब्दार्थ
पृष्ठ संख्या 17
अतींद्रियता - इंद्रियों से परे, अलौकिक अनुभूति। उजास - प्रकाश, उजाला। सम्मोहन - मोहित होना, वशीकरण का भाव.
पृष्ठ संख्या 18
कपाट - किवाड़, दरवाजा। रकम-रकम - तरह-तरह के, विभिन्न प्रकार के। अवधारणाएँ - सोच, विचार, मानसिक धारणा.
पृष्ठ संख्या 19
रफ़्ता-रफ़्ता - धीरे-धीरे। ओझल - आँखों से ओझल होना, ओझल होना। वीरान - सुनसान, उजाड़। विशालकाय - विशाल शरीर वाला, बड़े आकार का.
पृष्ठ संख्या 20
मूँडकी - सिर। जल-प्रपात - झरना। पराकाष्ठा - चरम सीमा। मशगूल - व्यस्त, लीन। अभिशप्त - शापित, जिसे शाप मिला हो। सरहदों - सीमाओं। शिद्दत - तीव्रता, प्रबलता। तामसिकताएँ - बुरी भावनाएँ, दुर्गुण, तमस से युक्त विचार। अनमनी - उदास, अनमनापन। नज़ारे - दृश्य, नज़ारे.
पृष्ठ संख्या 21
सतत - निरंतर, लगातार। वासनाएँ - बुरी इच्छाएँ। तंद्रिल-अवस्था - आधी नींद की स्थिति। सयानी - समझदार, चतुर। जन्नत - स्वर्ग। चरैवेति-चरैवेति - निरंतर चलते रहो, चलते रहो। वजूद - अस्तित्व, औकात.
पृष्ठ संख्या 22
संजीदा - गंभीर, सावधान। चूक - भूल, त्रुटि.
पृष्ठ संख्या 23
हाथों में पड़े ठाठे - हाथों में पड़ने वाले छाले या कठोर गाँठें। ग़महीन - उदासीन, दुखों से मुक्त। ग़मगीन - दुखी, शोकाकुल। वेस्ट एंड रिपेइंग - कम लेकर समाज को अधिक वापस लौटाना। बर्फीला - बर्फ से ढका हुआ.
पृष्ठ संख्या 24
सात्विक - शुद्ध, पवित्र। आभा - चमक, कांति। असह्य - जो सहन न हो सके, अत्यधिक। मद्धिम-मद्धिम - धीरे-धीरे, मंद-मंद। परिंदे - पक्षी.
पृष्ठ संख्या 25
हलाहल - विष, ज़हर। संक्रमण - संयोग, मिलन। सुर्ख़ियों में - चर्चा में। गड़प - निगल जाना, निगल लिया.
पृष्ठ संख्या 26
विभोर - आनंद में मग्न होना। वृत्ति - जीविका का साधन। रामरोछो - अच्छा है, सुंदर है.
पृष्ठ संख्या 27
ख्वाहिश - इच्छा, कामना। टूरिस्ट स्पॉट - भ्रमण स्थल, पर्यटन स्थल। विभोर - प्रसन्न। ठगा-सा रह जाना - आश्चर्यचकित रह जाना। नायाब - अद्वितीय, अनोखा। लम्हों - क्षणों। बॉर्डर एरिया - सीमावर्ती क्षेत्र। मियाद - समय सीमा, अवधि.
पृष्ठ संख्या 28
फला-फूला - समृद्ध, उन्नत अवस्था। आबोहवा - जलवायु.
पृष्ठ संख्या 29
विस्मय - आश्चर्य। फुट-प्रिंट - पैरों के निशान.
अभ्यास प्रश्नोत्तर
I. बहुविकल्पी प्रश्न
Question 1. लेखिका ने प्रार्थना के बोल "साना-साना हाथ जोड़ि, ......." किससे सीखे थे?
(a) अपनी बेटी से
(b) अपने गुरु से
(c) एक नेपाली युवती से
(d) इनमें से कोई नहीं
Answer: (c) एक नेपाली युवती से
In simple words: लेखिका ने गंगटोक की एक सुबह एक नेपाली लड़की को हाथ जोड़कर यह प्रार्थना गाते हुए सुना था और उससे यह सीखी थी।
Exam Tip: प्रार्थना के इन सुंदर नेपाली बोलों को लेखिका ने एक नेपाली युवती से सुबह के समय गंतोक में सीखा था, यह तथ्य ध्यान रखें।
Question 2. यूमथांग गंगटोक से कितनी दूर स्थित है?
(a) 149 कि.मी.
(b) 150 कि.मी.
(c) 151 कि.मी.
(d) 152 कि.मी.
Answer: (a) 149 कि.मी.
In simple words: लेखिका का गंतोक से अगला पड़ाव यूमथांग था, जिसकी कुल दूरी १४९ किलोमीटर थी।
Exam Tip: पाठ में दी गई निश्चित दूरी '१४९ कि.मी.' को अच्छे से स्मरण रखें, यह बहुविकल्पी प्रश्नों के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 3. सिक्किम में किसी बुद्धिस्ट की मृत्यु होने पर उसकी आत्मा की शांति के लिए क्या किया जाता है?
(a) दान-पुण्य किया जाता है।
(b) गरीबों को खाना खिलाया जाता है।
(c) किसी पवित्र स्थान पर एक सौ आठ श्वेत पताकाएँ फहराई जाती हैं।
(d) उपर्युक्त सभी
Answer: (c) किसी पवित्र स्थान पर एक सौ आठ श्वेत पताकाएँ फहराई जाती हैं।
In simple words: सिक्किम में बौद्ध धर्म के किसी अनुयायी की मृत्यु पर उसकी आत्मा की शांति हेतु किसी शांत और पवित्र स्थान पर मंत्र लिखी हुई १०८ सफेद पताकाएँ लगाई जाती हैं।
Exam Tip: मृत व्यक्ति की आत्मा की शांति के लिए 'श्वेत' (सफेद) पताकाएँ लगाई जाती हैं और नए कार्य की शुरुआत के लिए 'रंगीन' पताकाएँ लगाई जाती हैं, इन दोनों के रंगों का अंतर स्पष्ट रखें।
Question 4. पहाड़ों पर सड़क बनाने का काम कौन करता है?
(a) पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट
(b) बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन
(c) इंडियन आर्मी
(d) इनमें से कोई नहीं
Answer: (b) बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन
In simple words: देश के दुर्गम सीमावर्ती और पहाड़ी रास्तों पर सड़कें बनाने का कठिन काम 'बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन' (बी.आर.ओ.) द्वारा किया जाता है।
Exam Tip: पहाड़ी और दुर्गम सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़कों के निर्माण का उत्तरदायित्व 'बी.आर.ओ.' (बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन) का होता है।
Question 5. 'बोकू' कहाँ का पारंपरिक परिधान है?
(a) तिब्बत का
(b) नेपाल का
(c) भूटान का
(d) सिक्किम का
Answer: (d) सिक्किम का
In simple words: 'बोकू' सिक्किम की महिलाओं द्वारा पहना जाने वाला एक बहुत ही सुंदर और पारंपरिक परिधान (पोशाक) है।
Exam Tip: चाय के बागानों में युवतियों द्वारा पहने गए सिक्किमी वस्त्र 'बोकू' का प्रसंग पाठ में प्रमुखता से आया है।
Question 6. सिक्किम में अधिकतर लोगों की जीविका का साधन क्या है?
(a) पहाड़ी आलू की खेती
(b) धान की खेती
(c) इलायची और चाय का व्यापार
(d) उपर्युक्त सभी
Answer: (d) उपर्युक्त सभी
In simple words: सिक्किम के लोगों की आजीविका मुख्य रूप से पहाड़ी खेती (आलू, धान), चाय के बागानों और इलायची के व्यापार पर टिकी हुई है।
Exam Tip: पहाड़ी जीवन की कठोर आजीविका के इन सभी कृषिगत साधनों को ध्यान में रखकर 'उपर्युक्त सभी' का चयन करें।
Question 7. लायुंग समुद्र तल से कितनी ऊँचाई पर स्थित है?
(a) 12000 फ़ीट
(b) 14000 फ़ीट
(c) 16000 फ़ीट
(d) 18000 फ़ीट
Answer: (b) 14000 फ़ीट
In simple words: तिस्ता नदी के किनारे बसी लायुंग नामक यह छोटी और शांत पहाड़ी बस्ती समुद्र तल से लगभग १४,००० फीट की ऊँचाई पर स्थित है।
Exam Tip: लायुंग की भौगोलिक ऊँचाई '१४,००० फीट' है, जबकि कटाओ की ऊँचाई इससे भी अधिक है, इसे याद रखें।
Question 8. सिक्किमी नवयुवक के अनुसार पहाड़ों पर स्नो-फॉल लगातार कम होने का क्या कारण है?
(a) ग्लोबल वॉर्मिंग
(b) प्रदूषण
(c) जनसंख्या वृद्धि
(d) पेड़ों की कटाई
Answer: (b) प्रदूषण
*(Note: The textbook and guide specifically attribute the decrease in snow-fall to 'pollution' (प्रदूषण) or 'global warming' caused by it. As per the printed answer key, option (ii) प्रदूषण is marked).*
In simple words: सिक्किमी नवयुवक ने बताया कि लगातार बढ़ते वाहनों और मानवीय गतिविधियों के प्रदूषण के कारण पहाड़ों पर बर्फ गिरना (स्नो-फॉल) कम हो गया है।
Exam Tip: स्नो-फॉल कम होने का तात्कालिक कारण 'बढ़ता हुआ प्रदूषण' बताया गया है, जो ग्लोबल वॉर्मिंग का ही मुख्य कारण है।
Question 9. किसे भारत का स्विट्ज़रलैंड कहा जाता है?
(a) गंगटोक को
(b) यूमथांग को
(c) कटाओ को
(d) सिलीगुड़ी को
Answer: (c) कटाओ को
In simple words: अपने प्राकृतिक शांत वातावरण, गगनचुम्बी बर्फीले पर्वतों और अछूते सौंदर्य के कारण 'कटाओ' को भारत का स्विट्ज़रलैंड कहा जाता है।
Exam Tip: 'कटाओ' को सैलानियों ने भारत का 'स्विट्ज़रलैंड' कहा है क्योंकि यहाँ व्यावसायिकता और दुकानों की भीड़ नहीं है।
Question 10. भारत में मिलने से पूर्व सिक्किम में किस प्रकार की शासन व्यवस्था थी?
(a) राजशाही
(b) तानाशाही
(c) प्रजातांत्रिक
(d) इनमें से कोई नहीं
Answer: (a) राजशाही
In simple words: भारत का हिस्सा बनने से पहले सिक्किम में राजाओं का राज था, यानी वहाँ राजशाही शासन व्यवस्था प्रचलित थी।
Exam Tip: सिक्किम के इतिहास के अनुसार भारत में विलय से पूर्व वहाँ 'चोग्याल राजाओं' की राजशाही (मोनार्की) थी।
II. पाठ आधारित महत्वपूर्ण प्रश्न (3 अंक)
प्रश्न 1. हिंदुस्तान का स्विट्ज़रलैंड ‘कटाओ’ के अद्भुत सौंदर्य का चित्रण कीजिए, जहाँ सैलानी आनंद - विभोर हो उठे।
Answer: 'कटाओ' को भारत का स्विट्ज़रलैंड कहा जाता है और इसका सौंदर्य वास्तव में अलौकिक और जादुई है। जब सैलानी कटाओ पहुँचे, तो उन्होंने देखा कि चारों ओर के पर्वत सफेद, चमकीली और ताजी बर्फ की चादर से ढके हुए थे। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो किसी ने पहाड़ों पर बारीक पिसा हुआ सफेद पाउडर छिड़क दिया हो। कहीं धूप के कारण वह बर्फ पिघल रही थी, तो कहीं कटीली चट्टानों के बीच जमी हुई थी। आसमान छूती चोटियों पर साबुन के फेन (झाग) की तरह ताजी बर्फ गिर रही थी। घुटनों तक फैली इस मुलायम बर्फ में सैलानी बच्चों की तरह कूद रहे थे, नाच रहे थे और इस सम्मोहक दृश्य को अपने कैमरों में कैद कर रहे थे। वहाँ की दिव्य शांति और पवित्रता देखकर लेखिका का मन भी श्रद्धा और विस्मय से भर उठा था।
In simple words: कटाओ में चारों तरफ सफेद और मुलायम बर्फ बिखरी हुई थी, जो ऐसी लग रही थी मानो पहाड़ों पर किसी ने पाउडर छिड़क दिया हो। सैलानी वहाँ बर्फ में कूदकर और तस्वीरें खींचकर बहुत खुश हो रहे थे।
Exam Tip: कटाओ के सौंदर्य को स्पष्ट करने के लिए 'साबुन के झाग जैसी बर्फ', 'घुटनों तक मुलायम बर्फ', और 'लेखिका के आध्यात्मिक विस्मय' का सुंदर चित्रण करें।
प्रश्न 2. लेखिका को पहली बार एहसास हुआ कि जीवन का आनंद यही चलायमान सौंदर्य है, कैसे?
Answer: लायुंग के पड़ाव पर जब धीरे-धीरे सुबह के समय कोहरे की चादर हटने लगी, तो लेखिका के सामने प्रकृति का एक अनंत और जादुई सौंदर्य प्रकट हुआ। उन्होंने देखा कि हर तरफ अद्भुत प्राकृतिक दृश्य बिखरे हुए थे। बहता हुआ जल-प्रपात, नीचे वेग से बहती हुई पवित्र तिस्ता नदी, आकाश में धीरे-धीरे तैरते हुए कोमल बादल, और मंद-मंद बहती हवा के साथ डोलते हुए रंग-बिरंगे प्रियुता व रूडोडेंड्रॉन के फूल - सब कुछ अपनी-अपनी एक निश्चित लय, गति और संगीत में बह रहे थे। प्रकृति के इस सतत, अविरल और गतिशील चक्र को देखकर लेखिका को जीवन की संपूर्णता का अहसास हुआ और वे समझ गईं कि जीवन का वास्तविक आनंद स्थिरता में नहीं, बल्कि इसी निरंतर चलते रहने वाले (चलायमान) प्राकृतिक सौंदर्य में है।
In simple words: लेखिका ने जब बहते हुए झरनों, बहती नदी, तैरते बादलों और हवा में झूमते फूलों को एक साथ चलते देखा, तो उन्हें अहसास हुआ कि हमेशा चलते रहना ही जीवन का असली आनंद है।
Exam Tip: 'चलायमान सौंदर्य' को स्पष्ट करने के लिए बहती तिस्ता नदी, बहते झरने, तैरते बादल और डोलते हुए फूलों के गतिशील बिंबों का उल्लेख करें।
प्रश्न 3. लेखिका के लिए किसका सौंदर्य असह्य था?
Answer: ढलती शाम के समय जब लेखिका की जीप सिक्किम के चाय के बागानों से गुज़र रही थी, तो उन्होंने वहाँ एक अत्यंत मनमोहक दृश्य देखा। चाय के हरे-भरे बागानों के बीच कई सुंदर सिक्किमी युवतियाँ अपने पारंपरिक परिधान 'बोकू' को पहने हुए चाय की कोमल पत्तियाँ तोड़ रही थीं। उनके कठिन श्रम के कारण उनके गालों पर गुलाबी चमक छाई हुई थी। उसी समय आसमान में ढलते हुए सूरज की सुनहरी और इंद्रधनुषी किरणें चाय के बागानों पर इस तरह पड़ रही थीं कि वह पूरा दृश्य एक जादुई चित्र जैसा लग रहा था। श्रम और सौंदर्य के इस अलौकिक, सजीव और रंग-बिरंगे रूप को देखकर लेखिका इतनी अभिभूत और भाव-विभोर हो गईं कि वे खुशी से चीख पड़ीं। उनके लिए प्रकृति और मानवीय सौंदर्य का यह अद्भुत मिलन असह्य (बर्दाश्त से बाहर आनंददायक) हो रहा था।
In simple words: चाय के बागानों में लाल 'बोकू' पहने चाय पत्ती तोड़ती युवतियों के गुलाबी चेहरे और ढलते सूरज की इंद्रधनुषी किरणों का जादुई सौंदर्य लेखिका के लिए असह्य आनंद बन गया था।
Exam Tip: चाय के बागानों की हरियाली, युवतियों के 'बोकू' परिधान, उनके गुलाबी चेहरों और 'डूबते सूरज की इंद्रधनुषी आभा' के सुंदर तालमेल को उत्तर में लिखें।
प्रश्न 4. लेखिका यूमथांग को निकलने से पहले प्रातः बालकनी की ओर क्यों भागीं?
Answer: लेखिका जब गंगटोक में थीं, तो वहाँ के स्थानीय लोगों ने उन्हें बताया था कि यदि सुबह के समय मौसम पूरी तरह साफ हो, तो उनके होटल की बालकनी से भी हिमालय की तीसरी सबसे ऊँची और भव्य चोटी 'कंचनजंघा' के सुंदर दर्शन किए जा सकते हैं। इसी कंचनजंघा चोटी के दीदार करने की तीव्र उत्कंठा और आशा के कारण लेखिका सुबह आँख खुलते ही सीधे बालकनी की ओर भागी थीं, परंतु हल्के कोहरे और बादलों के कारण उनकी यह इच्छा उस सुबह पूरी नहीं हो सकी।
In simple words: होटल के लोगों ने बताया था कि मौसम साफ़ होने पर बालकनी से कंचनजंघा चोटी दिखती है, इसी चोटी को देखने की उत्सुकता में लेखिका सुबह बालकनी की ओर भागी थीं।
Exam Tip: उत्तर में हिमालय की तीसरी सबसे ऊँची चोटी 'कंचनजंघा' के दर्शन की उत्सुकता को बालकनी की ओर भागने का मुख्य कारण बताएं।
प्रश्न 5. कवि लोग स्टॉक किसलिए प्रसिद्ध है?
Answer: 'कवि-लॉन्ग स्टॉक' सिक्किम का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक स्थल है, जिसकी प्रसिद्धि के दो मुख्य कारण हैं:
- **फिल्म की शूटिंग:** इस सुंदर पहाड़ी स्थल पर प्रसिद्ध हिंदी फिल्म 'गाइड' की शूटिंग संपन्न हुई थी। [54]
- **ऐतिहासिक संधि-स्थल:** यह स्थान सिक्किम की दो स्थानीय जनजातियों - लेप्चा और भूटिया - के बीच सदियों से चले आ रहे खूनी संघर्ष और आपसी झगड़ों के बाद हुई ऐतिहासिक शांति वार्ता और लिखित संधि-पत्र पर हस्ताक्षर करने का पावन गवाह है। यहाँ उनकी संधि के प्रतीक के रूप में एक स्मारक पत्थर भी स्थापित है। [54]
In simple words: कवि-लॉन्ग स्टॉक इसलिए प्रसिद्ध है क्योंकि यहाँ 'गाइड' फिल्म की शूटिंग हुई थी, और यहाँ सिक्किम की दो बड़ी जातियों (लेप्चा और भूटिया) के बीच शांति समझौता हुआ था। [54]
Exam Tip: इस उत्तर में 'गाइड फिल्म की शूटिंग' और 'लेप्चा व भूटिया जनजातियों के बीच संधि स्मारक' दोनों प्रसंगों को स्पष्टता से लिखें।
प्रश्न 6. प्रेयर व्हील के बारे में जानकर लेखिका के मन में कौन से भाव आते हैं?
Answer: जब लेखिका ने सिक्किम के रास्तों पर एक कुटिया के भीतर घूमता हुआ बौद्ध 'प्रेयर व्हील' (प्रार्थना चक्र) देखा और जितेन से जाना कि इसे घुमाने से मनुष्य के सारे जन्मों के पाप धुल जाते हैं, तो वे गहरी वैचारिक उधेड़बुन में पड़ गईं। उन्हें लगा कि भले ही हमारा विज्ञान कितनी भी तरक्की क्यों न कर ले, हमारे रहने के तौर-तरीके बदल जाएं, परंतु इस विशाल देश के हर कोने में बसने वाले लोगों की धार्मिक आस्थाएँ, पाप-पुण्य की धारणाएँ, अंधविश्वास और ईश्वर के प्रति श्रद्धा का भाव एक जैसा ही है। मैदानी इलाकों से लेकर पहाड़ों तक भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक आत्मा एक ही सूत्र में बंधी हुई है।
In simple words: प्रेयर व्हील के बारे में जानकर लेखिका को लगा कि हमारा देश विज्ञान में चाहे जितना आगे बढ़ जाए, पर पूरे भारत के लोगों की श्रद्धा, अंधविश्वास और पाप-पुण्य की धारणाएँ एक जैसी ही हैं।
Exam Tip: भारत की 'सांस्कृतिक एकता' और मैदानी व पहाड़ी लोगों की 'एक जैसी आध्यात्मिक सोच' को इस उत्तर का मुख्य सार बनाएँ।
प्रश्न 7. लायुंग में तिस्ता नदी के किनारे पत्थरों पर बैठी लेखिका क्या देखकर विचार मग्न थी?
Answer: लायुंग की शांत संध्या में जब लेखिका तिस्ता नदी के तट पर एकांत में पत्थरों पर बैठी थीं, तो वे प्रकृति के एक अत्यंत गंभीर और अलौकिक रूप को देखकर गहरे विचारों में खो गईं। उन्होंने देखा कि पहाड़ों से गिरता हुआ कल-कल करता झरना नीचे बहती हुई वेगवती तिस्ता नदी में मिल रहा था, मंद-मंद बहती हवा में पेड़-पौधे झूम रहे थे, और आसमान में कोमल बादल तैर रहे थे। सब कुछ अपनी एक निश्चित और सुरीली लय में बह रहा था। इस अखंडित प्राकृतिक चक्र को देखकर लेखिका को अहसास हुआ कि प्रकृति की अपनी एक सुंदर जीवन-लय होती है, जिससे छेड़छाड़ करना मानवता का सबसे बड़ा अपराध है।
In simple words: लेखिका ने जब बहती नदी, हवा में झूमते पेड़ों और उड़ते बादलों को देखा, तो उन्हें लगा कि प्रकृति की अपनी एक सुंदर जीवन-लय है, जिससे खिलवाड़ करना इंसान का सबसे बड़ा अपराध है।
Exam Tip: तिस्ता नदी के तट की प्राकृतिक शांति, बहते जल और 'प्रकृति की जीवन-लय के साथ मानवीय खिलवाड़' के विचारों को उत्तर में प्रस्तुत करें।
प्रश्न 8. ‘कटाओ’ के प्राकृतिक मनोहारी दृश्य को देखकर लेखिका क्या सोचने लगी थी?
Answer: कटाओ के अछूते, शांत और पवित्र बर्फीले सौंदर्य को देखकर लेखिका का मन असीम श्रद्धा और आध्यात्मिक शांति से भर गया। वे सोचने लगीं कि प्रकृति की इसी पावन, शांत और विस्मयकारी सुंदरता के बीच घने जंगलों में बैठकर हमारे महान ऋषि-मुनियों ने वेदों की रचना की होगी और जीवन के सबसे गहरे शाश्वत सत्यों की खोज की होगी। उन्होंने सोचा कि यह अलौकिक सौंदर्य इतना प्रभावशाली और जादुई है कि यदि कोई बड़े से बड़ा क्रूर अपराधी या पापी भी इसे एक बार देख ले, तो उसका हृदय भी पिघल जाएगा और वह दया के सागर बुद्ध के समान करुणावान बन जाएगा।
In simple words: कटाओ के शांत बर्फीले सौंदर्य को देखकर लेखिका सोचने लगीं कि इसी पावन जगह पर ऋषियों ने वेदों की रचना की होगी, और यह सुंदरता किसी पापी का हृदय भी पिघला सकती है।
Exam Tip: उत्तर में 'ऋषि-मुनियों द्वारा वेदों की रचना', 'शाश्वत सत्यों की खोज' और 'क्रूर पापी का भी दयालु बुद्ध बनना' - इन तीनों विचारों को स्पष्ट करें।
प्रश्न 9. सिक्किमी युवती से मिलकर लेखिका को क्यों अच्छा लगा?
Answer: यूमथांग में चिप्स बेचती हुई एक बहुत ही सरल और हंसमुख सिक्किमी युवती से मिलकर लेखिका को बहुत अच्छा लगा। जब लेखिका ने उससे आत्मीयता से पूछा कि "क्या तुम सिक्किमी हो?" तो उसने बड़ी गर्व और स्वाभिमान से उत्तर दिया - "नहीं, मैं इंडियन (भारतीय) हूँ।" युवती का यह देशभक्तिपूर्ण उत्तर सुनकर लेखिका का हृदय गद्गद हो गया। उन्हें यह जानकर अत्यंत प्रसन्नता हुई कि सिक्किम के लोग भारत का हिस्सा बनकर बेहद खुश और संतुष्ट हैं और वे स्वयं को इस देश की आबोहवा और संस्कृति में पूरी तरह घुला-मिला चुके हैं।
In simple words: जब लेखिका ने एक लड़की से पूछा कि क्या वह सिक्किमी है, तो उसने गर्व से कहा कि "मैं इंडियन हूँ।" यह सुनकर लेखिका को बहुत अच्छा लगा कि सिक्किम के लोग भारत का हिस्सा बनकर खुश हैं।
Exam Tip: युवती के गर्व भरे उत्तर "मैं इंडियन हूँ" और सिक्किम के लोगों का 'भारतीय संस्कृति में घुल-मिल जाने' की खुशी को उत्तर का आधार बनाएँ।
प्रश्न 10. लेखिका जैसे - जैसे ऊँचाई की ओर जा रही थी। वैसे - वैसे सारे दृश्य ओझल होते प्रतीत हो रहे थे और हिमालय का विराट रूप दिखाई दे रहा था - उन सबको चित्रित कीजिए।
Answer: जैसे-जैसे लेखिका की जीप ऊंचे और घुमावदार पहाड़ी रास्तों पर बढ़ रही थी, मैदानी दुनिया के दृश्य पीछे छूटते जा रहे थे:
- नीचे देखने पर घाटियों में बने छोटे-छोटे घर ताश के पत्तों के खिलौनों जैसे लघु और सुंदर दिखाई दे रहे थे।
- रास्ते में स्वेटर बुनती हुई पहाड़ी युवतियाँ और अपनी पीठ पर भारी कार्टून ढोते हुए छोटे कद के बहादुर नेपाली लोग धीरे-धीरे नज़रों से ओझल हो गए।
- नदियाँ पतली लकीरों जैसी दिखने लगीं और घाटियों का धुंधला रूप ओझल होने लगा। इसके विपरीत, सामने खड़ा विराट और गगनचुम्बी हिमालय अपने पूर्ण वैभव, असीम चोटियों और विशालकाय रूप में उनके सामने प्रकट होने लगा, जो पल-पल अपना रूप बदल रहा था।
In simple words: जैसे-जैसे जीप ऊपर गई, नीचे की बस्तियाँ, नदियाँ और लोग छोटे होकर गायब होने लगे, और सामने बर्फ से ढका विशाल और गगनचुम्बी हिमालय अपने भव्य रूप में दिखने लगा।
Exam Tip: नीचे की दुनिया का छोटा होना (जैसे छोटे घर, नेपाली लोग ओझल होना) और सामने 'हिमालय के विराट रूप के प्रकट होने' के विरोधाभास को स्पष्ट रूप से लिखें।
प्रश्न 11. प्रकृति के इस पल - पल परिवर्तित होते हुए चलायमान सौंदर्य को देखकर लेखिका के मन में धीरे - धीरे क्या चल रहा था?
Answer: प्रकृति के उस अनंत, अद्भुत और लगातार बदलते (चलायमान) सौंदर्य को देखकर लेखिका का मन पूरी तरह मौन और अंतर्मुखी हो गया था। वे उस जादुई दृश्य से इतनी एकाकार और मग्न हो गई थीं कि उन्हें महसूस हो रहा था कि उनके भीतर और बाहर की सारी सीमाएं समाप्त हो गई हैं और उनकी आत्मा की सभी खिड़कियाँ खुल गई हैं। वे स्वयं को सीधे ईश्वर के बहुत करीब महसूस कर रही थीं। इसी आध्यात्मिक आनंद और परम शांति की अवस्था में उनके होठों पर सुबह सीखी हुई नेपाली प्रार्थना "साना-साना हाथ जोड़ि..." पुनः गूँज उठी, परंतु तभी अचानक उनका यह कोमल ध्यान टूट गया और वे वास्तविकता में लौट आईं।
In simple words: प्राकृतिक सौंदर्य को देखकर लेखिका का मन बहुत शांत हो गया था; वे खुद को भगवान के करीब महसूस कर रही थीं और उनके होठों पर नेपाली प्रार्थना के बोल गूँजने लगे थे।
Exam Tip: लेखिका की 'आध्यात्मिक शांति', 'ईश्वर से समीपता का अहसास' और 'प्रार्थना के बोल गूँजना' - इन तीनों मानसिक स्थितियों का सुंदर वर्णन करें।
प्रश्न 12. कटाओ के सौंदर्य को देख लेखिका को बरसब किस कवि की स्मृति कौंध गई?
Answer: कटाओ के अनुपम, शांत और निष्पाप बर्फीले सौंदर्य को देखकर लेखिका को अचानक अंग्रेजी के महान कवि **जॉन मिल्टन** की प्रसिद्ध काव्य पंक्तियाँ याद आ गईं। मिल्टन ने अपनी रचना में आदि-नारी 'ईव' की सुंदरता का वर्णन करते हुए लिखा था कि उसकी पवित्र सुंदरता को देखकर स्वयं दुष्ट शैतान भी ठगा सा रह जाता था और दूसरों का अहित या बुरा करने की अपनी बुरी आदत भूल जाता था। लेखिका को लगा कि कटाओ का यह पवित्र सौंदर्य भी बिल्कुल वैसा ही है, जिसे देखकर कोई भी पापी या क्रूर अपराधी थोड़ी देर के लिए अपना सारा पाप भूलकर दयालु बुद्ध के समान करुणावान बन सकता है।
In simple words: कटाओ की सुंदरता देखकर लेखिका को कवि जॉन मिल्टन की याद आई, जिन्होंने लिखा था कि सुंदर और पवित्र चीज़ों को देखकर बुरा व्यक्ति भी अपनी बुराई भूल जाता है।
Exam Tip: उत्तर में अंग्रेजी कवि 'मिल्टन', उनके द्वारा वर्णित 'ईव की सुंदरता' और 'शैतान का भी बुराई भूल जाना' - इन साहित्यिक संदर्भों को स्पष्ट रूप से जोड़ें।
प्रश्न 13. अपनी यात्रा में लेखिका ने पहाड़ी लोगों के किन गुणों का आकलन किया है? ‘साना - साना हाथ जोड़ि .......’ पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
Answer: लेखिका मधु कांकरिया ने अपनी पहाड़ी यात्रा के दौरान वहाँ के स्थानीय लोगों (विशेषकर महिलाओं और बच्चों) के निम्नलिखित गुणों और जीवन शैली का बहुत ही गहरा आकलन किया है:
(क) **अतुलनीय परिश्रम और कर्मठता:** पहाड़ी लोग अत्यंत मेहनती होते हैं। महिलाएँ पत्थरों पर बैठकर भारी हथौड़ों से चट्टानें तोड़ती हैं और अपनी पीठ पर टोकरी में बच्चों को बाँधकर काम करती हैं। बच्चे भी पढ़ाई के साथ-साथ लकड़ियाँ ढोने और पशु चराने का काम करते हैं। [55]
(ख) **प्रकृति के प्रति गहरी आस्था और संरक्षण:** वे पहाड़ों, झरनों और नदियों को पूजते हैं और मानते हैं कि प्रकृति को प्रदूषित करने से वे पाप के भागी बनेंगे। वे पर्यावरण की सुरक्षा के प्रति बहुत सचेत रहते हैं। [55]
(ग) **संतोषी और सरल स्वभाव:** वे बहुत कम संसाधनों और अत्यंत कठिन जीवन परिस्थितियों में रहकर भी हमेशा खुश और मुस्कुराते रहते हैं (कम लेकर समाज को बहुत अधिक लौटाना)। [55]
In simple words: लेखिका ने पहाड़ी लोगों में कठिन परिश्रम करने की आदत, अपनी कोमलता के पीछे छिपे साहस, प्रकृति की पूजा करने के संस्कार, और बहुत कम पाकर भी हमेशा खुश रहने के गुणों को देखा है। [55]
Exam Tip: पहाड़ी लोगों के चरित्र की मुख्य विशेषताओं (कठिन श्रम, पर्यावरण संरक्षण, और संतोषी स्वभाव) को अलग-अलग बिंदुओं में स्पष्ट करें।
प्रश्न 14. विभिन्न मूल्यों के आलोक में ड्राइवर जितेन नार्गे का चरित्र - चित्रण कीजिए।
Answer: जितेन नार्गे केवल एक जीप चालक ही नहीं था, बल्कि वह मानवीय मूल्यों, संवेदनशीलता और देश-प्रेम से युक्त एक अत्यंत कुशल मार्गदर्शक (गाइड) भी था। उसके चरित्र की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
- **कर्तव्यनिष्ठा और कार्य कुशलता:** वह अपनी गाड़ी चलाने के साथ-साथ रास्ते के हर ऐतिहासिक और प्राकृतिक स्थल की रोचक जानकारी पर्यटकों को बहुत ही आदरपूर्वक देता था। वह एक ईमानदार गाइड था। [55]
- **प्रकृति और अपनी संस्कृति से अनुराग:** वह सिक्किम की पवित्र नदियों, पहाड़ों और बौद्ध मान्यताओं का बहुत सम्मान करता था और पर्यावरण को साफ रखने का संदेश देता था। [55]
- **सच्ची भारतीयता और देश-प्रेम:** वह स्वयं को सिक्किमी कहने के बजाय गर्व से 'इंडियन' (भारतीय) कहता था और सिक्किम के विकास के लिए भारतीय फौज के कप्तानों के योगदान की सराहना करता था। [55]
- **संवेदनशील हृदय:** वह पहाड़ी लोगों की कठिन जीवन परिस्थितियों और उनके परिश्रम को देखकर संवेदनशील विचार रखता था। [55]
In simple words: जितेन नार्गे एक बहुत ही ईमानदार गाइड था, जो अपनी संस्कृति और प्रकृति का आदर करता था, पर्यटकों को अच्छी जानकारियाँ देता था और गर्व से खुद को भारतीय कहता था। [55]
Exam Tip: जितेन के बहुआयामी चरित्र (कुशल गाइड, प्रकृति-प्रेमी, संवेदनशील इंसान, और गौरवान्वित भारतीय) को अलग-अलग शीर्षकों में प्रस्तुत करें।
प्रश्न 15. सीमा पर देश की रक्षा करने वाले सैनिकों के किन-किन गुणों को आप अपनाना चाहेंगे?
Answer: भारत की सीमाओं पर अत्यंत विपरीत और दुर्गम परिस्थितियों (जैसे शून्य से १५ डिग्री नीचे की ठंड) में देश की रक्षा करने वाले जाँबाज़ सैनिकों के निम्नलिखित गुणों को मैं अपने जीवन में सहर्ष अपनाना चाहूँगा:
(क) **कठिन परिस्थितियों में अडिग रहना (धैर्य):** सैनिक कड़ाके की ठंड और अभावों में भी मुस्कुराते हुए अपने कर्तव्य पथ पर डटे रहते हैं, मैं भी जीवन के संघर्षों में ऐसा ही धैर्य अपनाना चाहूँगा। [55]
(ख) **सर्वोच्च राष्ट्र-प्रेम और देश-भक्ति:** वे अपनी जान की परवाह किए बिना देश की अखंडता और नागरिकों की सुरक्षा के लिए खड़े रहते हैं, मैं भी अपने देश के प्रति ऐसा ही निस्वार्थ प्रेम और आदर रखूँगा। [55]
(ग) **कर्तव्यनिष्ठा और कड़ा अनुशासन:** बिना किसी लापरवाही के अपने उत्तरदायित्वों का समय पर और मुस्तैदी से पालन करना। [55]
(घ) **सामूहिकता और संकीर्णता का त्याग:** वे भाषा, प्रांत और धर्म के भेद को भूलकर एक टीम की तरह काम करते हैं, मैं भी ऐसा ही व्यापक दृष्टिकोण अपनाऊँगा। [55]
In simple words: मैं सैनिकों की तरह देश के प्रति निस्वार्थ प्रेम, कठिन परिस्थितियों में भी मुस्कुराते रहने की हिम्मत, काम के प्रति कड़ा अनुशासन, और धर्म-जाति के भेद को भूलकर सबको एक समझने के गुणों को अपनाना चाहूँगा। [55]
Exam Tip: सैनिकों के चार प्रमुख गुणों (धैर्य, राष्ट्र-प्रेम, कर्तव्यनिष्ठा, और संकीर्णताओं का त्याग) को स्पष्ट बिंदुओं में लिखें।
प्रश्न 16. ‘जल - संरक्षण’ से आप क्या समझते हैं? हमें जल - संरक्षण को गंभीरता से लेना चाहिए, क्यों और किस प्रकार? जीवनमूल्यों की दृष्टि से जल - संरक्षण पर चर्चा कीजिए।
Answer: **जल-संरक्षण का अर्थ:** जल-संरक्षण का सीधा अर्थ जल के गैर-जिम्मेदाराना और व्यर्थ उपयोग को रोकना, पानी को प्रदूषित होने से बचाना तथा वर्षा के जल को संचित करके उसका पुनः उपयोग (री-साइकल) करना है। [55]
**गंभीरता से लेने का कारण:** पानी ही इस पृथ्वी पर जीवन का मुख्य आधार है। आज अंधाधुंध दोहन और लापरवाही के कारण दुनिया भर की नदियों का जलस्तर घट रहा है और भयानक पेयजल संकट (जल-संकट) खड़ा हो गया है। यदि हमने समय रहते इसे नहीं बचाया, तो पृथ्वी पर जीवन का अंत हो जाएगा। [55, 56]
**संरक्षण के व्यावहारिक उपाय:**
- ब्रश करते समय या गाड़ी धोते समय नल को खुला न छोड़ें, बाल्टी के पानी का उपयोग करें। [56]
- घरों और स्कूलों की छतों पर वर्षा के जल को संचित करने के लिए 'रेन वाटर हार्वेस्टिंग' सिस्टम लगाएँ। [56]
- जल-स्रोतों (जैसे नदियों, तालाबों) के पास कपड़े धोना, मवेशी नहलाना या कचरा फेंकना पूरी तरह बंद करें। [56]
In simple words: जल-संरक्षण का मतलब है पानी की बर्बादी को रोकना और उसे साफ़ रखना। पानी के बिना जीवन असंभव है, इसलिए हमें नल बंद रखना चाहिए, वर्षा का पानी इकट्ठा करना चाहिए और नदियों को गंदा नहीं करना चाहिए। [55, 56]
Exam Tip: उत्तर में जल-संरक्षण की परिभाषा, आज जल संकट की भयावहता (कारण) और उसे बचाने के तीन-चार व्यावहारिक उपायों को क्रमानुसार लिखें।
प्रश्न 17. ‘साना - साना हाथ जोड़ि’ पाठ में लेखिका ने प्रदूषण का उल्लेख किया है। प्रदूषण बढ़ने के कारणों का ज़िक्र करते हुए बताइए कि इसे रोकने में आप अपना योगदान किस तरह दे सकते हैं?
Answer: पाठ में सिक्किमी नवयुवक ने लेखिका को बताया कि लगातार बढ़ते प्रदूषण के कारण ही पहाड़ों पर प्राकृतिक स्नो-फॉल कम हो गया है। [56]
**प्रदूषण बढ़ने के मुख्य कारण:** वाहनों की लगातार बढ़ती संख्या और उनसे निकलने वाला ज़हरीला धुआँ, पहाड़ों पर पर्यटकों द्वारा फैलाई जाने वाली प्लास्टिक की थैलियाँ और कचरा, कारखानों का गंदा पानी जल-स्रोतों में मिलाना तथा पेड़ों की अंधाधुंध कटाई। [56]
**प्रदूषण रोकने में हमारा व्यक्तिगत योगदान:**
1. मैं अपने दैनिक जीवन में प्लास्टिक की थैलियों और डिस्पोजेबल बर्तनों का उपयोग पूरी तरह बंद करूँगा। [56]
2. मैं अपने आसपास के लोगों को कचरा न जलाने और उसे सही डस्टबिन में डालने के लिए जागरूक करूँगा। [56]
3. मैं अपने जन्मदिन या विशेष अवसरों पर कम से कम एक पेड़ लगाऊँगा और उसकी अच्छी देखभाल करूँगा। [56]
4. यातायात के लिए निजी वाहनों के स्थान पर सार्वजनिक वाहनों (बस या मेट्रो) का प्रयोग करूँगा। [56]
In simple words: पहाड़ों पर गाड़ियों के धुएँ और पर्यटकों के कचरे के कारण प्रदूषण बढ़ रहा है। इसे रोकने के लिए हमें प्लास्टिक का उपयोग बंद करना चाहिए, पेड़ लगाने चाहिए और कचरे को हमेशा सही जगह डालना चाहिए। [56]
Exam Tip: प्रदूषण के मुख्य कारणों (धुआँ, प्लास्टिक कचरा) को स्पष्ट करते हुए समाधान के लिए व्यावहारिक और व्यक्तिगत स्तर पर किए जाने वाले उपायों का उल्लेख करें।
प्रश्न 18. प्रकृति जल - संचय की अद्भुत व्यवस्था करती है। ‘साना - साना हाथ जोड़ि’ पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए। पानी बचाने के लिए आप अपना योगदान किस प्रकार दे सकते हैं?
Answer: **प्रकृति की जल-संचय की अनूठी व्यवस्था:** लेखिका की सहेली मणि ने बहुत ही सुंदर ढंग से स्पष्ट किया है कि प्रकृति हमारे लिए पानी बचाने का अद्भुत कार्य करती है। सर्दियों के मौसम में प्रकृति पानी को बड़े-बड़े हिम शिखरों और पहाड़ों पर बर्फ के रूप में सँभालकर (जमा करके) रख लेती है। जब गर्मियों के मौसम में मैदानी इलाकों में त्राहि-त्राहि मचती है और सभी जीव प्यास से व्याकुल होते हैं, तब यही बर्फ की शिलाएँ धीरे-धीरे पिघलकर नदियों के रूप में बहती हैं और हमारे सूखे कंठों को पानी देकर जीवन प्रदान करती हैं। [56]
**पानी बचाने में हमारा योगदान:**
- हम अपने घरों के बर्तनों और सब्जियों को धोने के बाद बचे हुए पानी का उपयोग गमलों और पौधों को सींचने के लिए करेंगे। [56]
- खुले बहते हुए नलों को तुरंत बंद करेंगे और पानी टपकने वाले नलों की समय पर मरम्मत करवाएंगे। [56]
- नदियों और तालाबों के पास कपड़े धोने या नहाने जैसे प्रदूषित करने वाले कार्य कभी नहीं करेंगे। [56]
In simple words: प्रकृति सर्दियों में पहाड़ों पर बर्फ के रूप में पानी जमा कर लेती है, और गर्मियों में वही बर्फ पिघलकर नदियों के रूप में हमारी प्यास बुझाती है। पानी बचाने के लिए हमें नलों को बंद रखना चाहिए और वर्षा का जल बचाना चाहिए। [56]
Exam Tip: उत्तर में प्रकृति के 'हिम शिखरों को जल-स्तंभ मानने' के विचार को स्पष्ट करते हुए पानी बचाने के अपने व्यक्तिगत घरेलू उपायों का उल्लेख करें।
अभ्यास प्रश्न पत्र
1. निम्नलिखित में से किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
Question 1(क). सिक्किम यात्रा के दौरान फ़ौजी छावनियों को देखकर लेखिका के मन में उपजे विचार को अपने शब्दों में लिखिए।
Answer: सिक्किम की इस दुर्गम सीमावर्ती यात्रा के दौरान जब लेखिका ने भारतीय फौज की चौकियाँ और बर्फीली वादियों में तैनात सैनिकों को देखा, तो उनका मन उनके प्रति गहरी कृतज्ञता और सम्मान से भर गया। वे सोचने लगीं कि जब हम बैसाख के सुहाने मौसम में भी पाँच मिनट में कड़ाके की ठंड से काँपने लगते हैं, तब ये जाँबाज़ जवान कड़ाके की ठंड (माइनस १५ डिग्री सेल्सियस) और पौष व माघ की जमा देने वाली रातों में भी सीमा पर मुस्तैदी से पहरा देते हैं। लेखिका के मन में विचार आया कि हमारे जवान अपनी जान हथेली पर रखकर दिन-रात पहरा देते हैं, इसी कारण हम अपने घरों में चैन की नींद सो पाते हैं। उनका निस्वार्थ राष्ट्र-प्रेम और कर्तव्यनिष्ठा वास्तव में वंदनीय है।
In simple words: फौजी छावनियों को देखकर लेखिका को महसूस हुआ कि कड़कड़ाती ठंड में हमारे जवान सीमा पर पहरा देते हैं ताकि हम अपने घरों में चैन की नींद सो सकें। उनका त्याग बहुत महान है।
Exam Tip: उत्तर में सैनिकों की कठिन परिस्थितियों (माइनस १५ डिग्री की ठंड, दुर्गम सीमा) और देश के लिए उनके 'त्याग व समर्पण' के प्रति लेखिका की कृतज्ञता को लिखें।
Question 1(ख). कटाओ कहाँ है? इसके प्राकृतिक सौंदर्य का अपनी भाषा में वर्णन कीजिए।
Answer: 'कटाओ' सिक्किम में लागुंग से यूमथांग जाने वाले रास्ते पर लगभग ५०० फीट की ऊँचाई पर स्थित एक अत्यंत सुंदर और अछूता पहाड़ी स्थल है, जिसे भारत का 'स्विट्ज़रलैंड' भी कहा जाता है। यहाँ का प्राकृतिक सौंदर्य जादुई और सम्मोहक है। चारों ओर गगनचुम्बी पर्वत सफेद और चमकीली बर्फ की चादर से ढके हुए हैं, जो ऐसे लगते हैं मानो किसी ने उन पर पिसा हुआ सफेद पाउडर छिड़क दिया हो। पहाड़ों के बीच बहती हवा के झोंकों के साथ साबुन के फेन (झाग) की तरह ताजी बर्फ गिरती है। यहाँ व्यावसायिकता और दुकानों की भीड़ नहीं है, इसलिए यहाँ की हवा पूरी तरह शुद्ध और वातावरण में एक अनूठी आध्यात्मिक शांति फैली हुई है।
In simple words: कटाओ सिक्किम का एक बहुत ही सुंदर बर्फीला पहाड़ी स्थल है, जिसे भारत का स्विट्ज़रलैंड कहते हैं। वहाँ चारों तरफ पहाड़ों पर ताजी सफेद बर्फ फैली हुई है और वातावरण में बहुत शांति है।
Exam Tip: कटाओ की भौगोलिक स्थिति (सिक्किम में यूमथांग के पास) और उसके 'अछूते बर्फीले सौंदर्य' व 'दुकानों के न होने' की विशेषता का सुंदर वर्णन करें।
Question 1(ग). ‘साना-साना हाथ जोड़ि’ पाठ के आधार पर बताइए कि देश की सीमाओं पर तैनात सेना के जवानों को कैसी-कैसी मुसीबतें झेलनी पड़ती हैं?
Answer: हमारे देश की सीमाओं पर तैनात वीर सैनिकों को अपनी ड्यूटी के दौरान निम्नलिखित अत्यंत कठिन और दुर्गम परिस्थितियों व मुसीबतों का सामना करना पड़ता है:
- **असहनीय ठंड:** वे शून्य से भी १५ डिग्री नीचे (माइनस १५ डिग्री सेल्सियस) की कड़ाके की ठंड में, जहाँ पानी भी बर्फ बन जाता है, खुली चौकियों पर खड़े होकर पहरा देते हैं।
- **भौगोलिक चुनौतियाँ:** बर्फीले पहाड़ी रास्तों, गहरी खाइयों, अचानक होने वाले भूस्खलन (लैंडस्लाइड) और ऑक्सीजन की कमी वाले स्थानों पर वे निरंतर गश्त लगाते हैं।
- **परिवार से दूरी:** वे अपने प्रियजनों और परिवारों से हज़ारों मील दूर रहकर अकेलेपन और मौसम की मार को झेलते हुए केवल राष्ट्र-रक्षा के पावन कर्तव्य के लिए डटे रहते हैं।
In simple words: सैनिकों को सीमा पर माइनस १५ डिग्री की जमा देने वाली ठंड, ऑक्सीजन की कमी, पहाड़ी रास्तों के खतरों और अपने परिवार से दूर रहकर अकेलेपन की बड़ी मुसीबतें झेलनी पड़ती हैं।
Exam Tip: सैनिकों की तीन मुख्य मुसीबतों (असहनीय बर्फीली ठंड, ऑक्सीजन व भौगोलिक चुनौतियाँ, और पारिवारिक अलगाव) को स्पष्ट बिंदुओं में लिखें।
Question 1(घ). कटाओ पर किसी दुकान का नहीं होना कैसे वरदान है? स्पष्ट कीजिए।
Answer: कटाओ पर किसी भी व्यावसायिक दुकान या चाय-नाश्ते के स्टॉल का न होना वहाँ के प्राकृतिक सौंदर्य के लिए एक बहुत बड़ा वरदान सिद्ध हुआ है। यदि वहाँ दुकानें खुल जातीं, तो पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ पड़ती, जिससे वहाँ प्लास्टिक का कचरा, गंदगी और वाहनों का प्रदूषण बढ़ जाता। प्रदूषण बढ़ने से वहाँ का तापमान बढ़ता (ग्लोबल वॉर्मिंग) और वहाँ की ताजी बर्फ बहुत जल्दी पिघल जाती। दुकानों के न होने के कारण ही आज कटाओ का प्राकृतिक सौंदर्य अपनी मूल शुद्धता, स्वच्छता और पावन शांति को बनाए रखने में सफल हुआ है, जो सैलानियों को आत्मिक आनंद देता है।
In simple words: कटाओ पर दुकानों का न होना वरदान है क्योंकि इससे वहाँ पर्यटकों की गंदी भीड़, प्लास्टिक का कचरा और प्रदूषण नहीं फैलता, जिससे वहाँ की सुंदर बर्फ और शांति सुरक्षित बची हुई है।
Exam Tip: दुकानों के होने से फैलने वाले 'प्रदूषण' और 'बर्फ पिघलने के खतरे' की तुलना कटाओ की वर्तमान 'शुद्धता और शांति' से करते हुए उत्तर लिखें।
Question 1(ङ). प्रकृति के विराट स्वरूप को देखकर पाठ की लेखिका मधु कांकरिया को कैसी अनुभूति हुई? अपने शब्दों में लिखिए।
Answer: प्रकृति के उस असीम, विशाल और जादुई विराट स्वरूप (जैसे ऊँचे हिम शिखर, बहते झरने, वेगवती तिस्ता नदी और हवा में डोलते फूल) को देखकर लेखिका मधु कांकरिया का मन पूरी तरह मौन और अंतर्मुखी हो गया। उन्हें महसूस हुआ कि उनके भीतर की सारी सीमाएं और सांसारिक तामसिकता (बुरी इच्छाएं) उस पवित्र वातावरण में बह गई हैं। वे स्वयं को सीधे ईश्वर के बहुत करीब अनुभव करने लगीं और उनके होठों पर सुबह सीखी प्रार्थना के बोल गूँजने लगे। उन्हें अहसास हुआ कि हमेशा गतिशील रहना ही जीवन का वास्तविक आनंद है, और प्रकृति की इस अनूठी जीवन-लय से छेड़छाड़ करना मानव जाति का एक अक्षम्य अपराध है। वे एक शांत ऋषि की तरह ध्यानमग्न हो गईं।
In simple words: प्रकृति के विराट रूप को देखकर लेखिका का मन पूरी तरह शांत हो गया। वे खुद को भगवान के करीब महसूस करने लगीं और उन्हें लगा कि हमेशा चलते रहना ही जीवन का असली सुख है।
Exam Tip: लेखिका की 'आध्यात्मिक शांति', 'ईश्वर से समीपता का अहसास' और 'प्रकृति की जीवन-लय के प्रति आदर' की अनुभूतियों को अपने शब्दों में स्पष्ट करें।
1. झिलमिलाते सितारों की रोशनी में नहाया गंतोक लेखिका को किस तरह सम्मोहित कर रहा था?
उत्तर
रात के अंधकार में सितारों से नहाया हुआ गंतोक लेखिका को जादुई अहसास करवा रहा था। उसे यह जादू ऐसा सम्मोहित कर रहा था कि मानो उसका आस्तित्व स्थगित सा हो गया हो, सब कुछ अर्थहीन सा था। उसकी चेतना शून्यता को प्राप्त कर रही थी। वह सुख की अतींद्रियता में डूबी हुई उस जादुई उजाले में नहा रही थी जो उसे आत्मिक सुख प्रदान कर रही थी।
2. गंतोक को 'मेहनतकश बादशाहों का शहर' क्यों कहा गया?
उत्तर
गंतोक को 'मेहनतकश बादशाहों का शहर' इसलिए कहा गया क्योंकि यहाँ के लोग बहुत मेहनती हैंऔर यह उनकी मेहनत ही है जिसकी वजह से आज भी गंतोक अपने पुराने स्वरुप को कायम रखे हुए है। पहाड़ी क्षेत्र के कारण पहाड़ों को काटकर रास्ता बनाना पड़ता है। पत्थरों पर बैठकर औरतें पत्थर तोड़ती हैं। उनके हाथों में कुदाल व हथौड़े होते हैं। कईयों की पीठ पर बँधी टोकरी में उनके बच्चे भी बँधे रहते हैं और वे काम करते रहते हैं। हरे-भरे बागानों में युवतियाँ बोकु पहने चाय की पत्तियाँ तोड़ती हैं। बच्चे भी अपनी माँ के साथ काम करते हैं। यहाँ जीवन बेहद कठिन है पर यहाँ के लोगों ने इन कठिनाईयों के बावजूद भी शहर के हर पल को खुबसूरत बना दिया है
3. कभी श्वेत तो कभी रंगीन पताकाओं का फहराना किन अलग-अलग अवसरों की ओर संकेत करता है?
उत्तर
सफ़ेद बौद्ध पताकाएँ शांति व अहिंसा की प्रतीक हैं, इन पर मंत्र लिखे होते हैं। यदि किसी बुद्धिस्ट की मृत्यु होती है तो उसकी आत्मा की शांति के लिए 108 श्वेत पताकाएँ फहराई जाती हैं। कई बार किसी नए कार्य के अवसर पर रंगीन पताकाएँ फहराई जाती हैं। इसलिए ये पताकाएँ, शोक व नए कार्य के शुभांरभ की ओर संकेत करते हैं।
4. जितेन नार्गे ने लेखिका को सिक्किम की प्रकृति, वहाँ की भौगोलिक स्थिति एवं जनजीवन के बारे में क्या महत्वपूर्ण जानकारियाँ दीं, लिखिए।
उत्तर
जितेन नार्गे ने लेखिका को निम्नलिखित महत्वपूर्ण जानकारियाँ दी -
भौगोलिक स्थिति- गंतोक से 149 किलोमीटर की दूरी पर यूमथांग है। यहाँ फूलों से लदी वादियाँ हैं। रास्ते में 'कवी लोंग स्टॉक' है,जहाँ 'गाइड' फिल्म की शूटिंग हुई थी। थोड़ा ऊपर हिमालय पर्वत है। रास्ते में 'सेवेन सिस्टर्स वाटरफॉल' है। पहाड़ी रास्तों पर फहराई गई सफ़ेद धव्जा बुद्धिस्ट की मृत्यु तथा शान्ति की प्रतिक है और रंगीन धव्जा किसी नए कार्य की शुरूआत दर्शाते हैं।
जनजीवन- यहाँ के लोग बहुत मेहनती हैं। स्त्रियाँ व बच्चे सब काम करते हैं। स्त्रियाँ स्वेटर बुनती हैं,घर संभालती हैं,खेती करती हैं,पत्थर तोड़-तोड़ कर सड़कें बनाती हैं। चाय की पत्तियाँ चुनने बाग़ में जाती हैं। बच्चों को अपनी कमर पर कपड़े में बाँधकर रखती हैं। बच्चे पढ़ने के लिए तीन-चार किलोमीटर पहाड़ी चढ़ाई चढ़कर स्कूल जाते हैं। शाम को अपनी माँओं के साथ काम करते हैं। उनका जीवन बहुत श्रमसाध्य है। उसने बताया कि सिक्किम के लोग अन्य भारतीयों की तरह घुमते चक्र में अपनी आस्थाएँ तथा अंधविश्वास रखते हैं।
5. लोंग स्टॉक में घूमते हुए चक्र को देखकर लेखिका को पूरे भारत की आत्मा एक-सी क्यों दिखाई दी ?
उत्तर
लेखिका सिक्किम में घूमती हुई कवी-लोंग स्टॉक नाम की जगह पर गई। लोंग स्टॉक के घूमते चक्र के बारे में जितेन ने बताया कि यह धर्म चक्र है, इसको घुमाने से सारे पाप धुल जाते हैं। मैदानी क्षेत्र में गंगा के विषय में ऐसी ही धारणा है। लेखिका को लगा कि चाहे मैदान हो या पहाड़, तमाम वैज्ञानिक प्रगतियों के बावजूद इस देश की आत्मा एक जैसी है। यहाँ लोगों की आस्थाएँ, विश्वास, पाप-पुण्य की अवधारणाएँ और कल्पनाएँ एक जैसी हैं। यही विश्वास पूरे भारत को एक ही सूत्र में बाँध देता है।
6. जितेन नार्गे की गाइड की भूमिका के बारे में विचार करते हुए लिखिए कि एक कुशल गाइड में क्या गुण होते हैं?
उत्तर
नार्गे एक कुशल गाइड था। वह अपने पेशे के प्रति पूरा समर्पित था। उसे सिक्किम के हर कोने के विषय में भरपूर जानकारी प्राप्त थी इसलिए वह एक अच्छा गाइड था।
एक कुशल गाइड में निम्नलिखित गुणों का होना आवश्यक है -
1. एक गाइड अपने देश व इलाके के कोने−कोने से भली भाँति परिचित होता है, अर्थात् उसे सम्पूर्ण जानकारी होनी चाहिए।
2. उसे वहाँ की भौगोलिक स्थिति, जलवायु व इतिहास की सम्पूर्ण जानकारी होनी चाहिए।
3. एक कुशल गाइड को चाहिए कि वो अपने भ्रमणकर्ता के हर प्रश्नों के उत्तर देने में सक्षम हो।
4. एक कुशल गाइड को अपनी विश्वसनीयता का विश्वास अपने भ्रमणकर्ता को दिलाना आवश्यक है। तभी वह एक आत्मीय रिश्ता कायम कर अपने कार्य को कर सकता है।
5. गाइड को कुशल व बुद्धिमान व्यक्ति होना आवश्यक है। ताकि समय पड़ने पर वह विषम परिस्थितियों का सामना अपनी कुशलता व बुद्धिमानी से कर सके व अपने भ्रमणकर्ता की सुरक्षा कर सके।
6. गाइड को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि भ्रमणकर्ता की रूचि पूरी यात्रा में बनी रहे ताकि भ्रमणकर्ता के भ्रमण करने का प्रयोजन सफल हो। इसके लिए उसे हर उस छोटे बड़े प्राकृतिक रहस्यों व बातों का ज्ञान हो जो यात्रा को रूचिपूर्ण बनाए।
7. एक कुशल गाइड की वाणी को प्रभावशाली होना आवश्यक है इससे पूरी यात्रा प्रभावशाली बनती है और भ्रमणकर्ता की यात्रा में रूचि भी बनी रहती है।
7. इस यात्रा-वृत्तांत में लेखिका ने हिमालय के जिन-जिन रूपों का चित्र खींचा है, उन्हें अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर
इस यात्रा वृतांत में लेखिका ने हिमालय के पल-पल परिवर्तित होते रुप को देखा है। ज्यों-ज्यों ऊँचाई पर चढ़ते जाएँ हिमालय विशाल से विशालतर होता चला जाता है। हिमालय कहीं चटक हरे रंग का मोटा कालीन ओढ़े हुए, तो कहीं हल्का पीलापन लिए हुए प्रतीत होता है। चारों तरफ़ हिमालय की गहनतम वादियाँ और फूलों से लदी घाटियाँ थी। कहीं प्लास्टर उखड़ी दिवार की तरह पथरीला और देखते-ही-देखते सब कुछ समाप्त हो जाता है मानो किसी ने जादू की छडी घूमा दी हो। कभी बादलों की मोटी चादर के रूप में,सब कुछ बादलमय दिखाई देता है तो कभी कुछ और। कटाओ से आगे बढ़ने पर पूरी तरह बर्फ से ढके पहाड़ दिख रहे थे। चारों तरफ दूध की धार की तरह दिखने वाले जलप्रपात थे तो वहीं नीचे चाँदी की तरह कौंध मारती तिस्ता नदी। जिसने लेखिका के ह्रदय को आनन्द से भर दिया। स्वयं को इस पवित्र वातावरण में पाकर भावविभोर हो गई जिसने उनके ह्रदय को काव्यमय बना दिया।
8. प्रकृति के उस अनंत और विराट स्वरूप को देखकर लेखिका को कैसी अनुभूति होती है?
उत्तर
प्रकृति के उस अनंत और विराट स्वरुप को देखकर लेखिका को लगा कि इस सारे परिदृश्य को वह अपने अंदर समेट ले। लेखिका चित्रलिखित सी 'माया' और 'छाया 'के अनूठे खेल को भर-भर आँखों से देखती जा रही थी। उसे लगा कि प्रकृति उसे सयानी बनाने के लिए जीवन रहस्यों करने पर तुली हुई है। इन अद्भुत और अनूठे नजारों ने लेखिका को पल भर में ही जीवन की शक्ति का अनुभव करा दिया। उसे ऐसा लगने लगा जैसे वह देश व काल की पारापार से दूर,बहती धारा बनकर बह रही हो और उसकी मन के सारा मैल और वासनाएँ इस निर्मल धारा में बह कर नष्ट हो गई हो।
9. प्राकृतिक सौंदर्य के अलौकिक आनंद में डूबी लेखिका को कौन-कौन से दृश्य झकझोर गए ?
उत्तर
लेखिका हिमालय यात्रा के दौरान प्राकृतिक सौंदर्य के अलौकिक आनन्द में डूबी हुई थी परन्तु जीवन के कुछ सत्य जो वह इस आनन्द में भूल चूकी थी, अकस्मात् वहाँ के जनजीवन ने उसे झकझोर दिया। वहाँ कुछ पहाड़ी औरतें जो मार्ग बनाने के लिए पत्थरों पर बैठकर पत्थर तोड़ रही थीं। उनके आटे सी कोमल काया पर हाथों में कुदाल व हथोड़े थे। कईयों की पीठ पर बच्चे भी बँधे हुए थे। इनको देखकर लेखिका को बहुत दुख हुआ कि ये हम सैलानियों के भ्रमण के लिए हिमालय की इन दुगर्म घाटियों में मार्ग बनाने का कार्य कर रही हैं। जहाँ पर जान कब जाए कोई नहीं जानता। इनके लिए यह भोजन मात्र पाने का साधन है और हमारे जैसे सौलानियों के लिए मनोरजंन का। दूसरी बार उसकी जादूई निद्रा तब टूटी जब उसने पहाड़ी बच्चों को उनसे लिफट माँगते देखा। सात आठ साल के बच्चों को रोज़ तीन−साढ़े तीन किलोमीटर का सफ़र तय कर स्कूल पढ़ने जाना पढ़ता है। स्कूल के पश्चात् वे बच्चे मवेशियों को चराते हैं तथा लकड़ियों के गट्ठर भी ढोते हैं। तीसरे लेखिका ने जब चाय की पत्तियों को चूनते हुए सिक्किमी परिधानों में ढकी हुई लड़कियों को देखा। बोकु पहने उनका सौंदर्य इंद्रधनुष छटा बिखेर रहा था। जिसने उसे मंत्रमुग्ध कर दिया था। उन्हें मेहनत करती हुई इन बालाओं का सौंदर्य असह्रय लग रहा था।
10. सैलानियों को प्रकृति की अलौकिक छटा का अनुभव करवाने में किन-किन लोगों का योगदान होता है, उल्लेख करें।
उत्तर
सैलानियों को प्रकृति की अलौकिक छटा का अनुभव कराने में सबसे बड़ा हाथ एक कुशल गाइड का होता है। जो अपनी जानकारी व अनुभव से सैलानियों को प्रकृति व स्थान के दर्शन कराता है। कुशल गाइड इस बात का ध्यान रखता है कि भ्रमणकर्ता की रूचि पूरी यात्रा में बनी रहे ताकि भ्रमणकर्ता के भ्रमण करने का प्रयोजन सफल हो। अपने मित्रों व सहयात्रियों का साथ पाकर यात्रा और भी रोमांचकारी व आनन्दमयी बन जाती है। वहाँ के स्थानीय निवासियों व जन जीवन का भी महत्वपूर्ण स्थान होता है। उनके द्वारा ही इस छटा के सौंदर्य को बल मिलता है क्योंकि यदि ये ना हों तो वो स्थान नीरस व बेजान लगने लगते हैं। तथा सरकारी लोग जो व्यवस्था में संलग्न होते उनका महत्त्वपूर्ण योगदान होता हैं।
11. "कितना कम लेकर ये समाज को कितना अधिक वापस लौटा देती हैं।" इस कथन के आधार पर स्पष्ट करें कि आम जनता की देश की आर्थिक प्रगति में क्या भूमिका है?
उत्तर
पत्थरों पर बैठकर श्रमिक महिलाएँ पत्थर तोड़ती हैं। उनके हाथों में कुदाल व हथौड़े होते हैं। कइयों की पीठ पर बँधी टोकरी में उनके बच्चे भी बँधे रहते हैं और वे काम करते रहते हैं। हरे-भरे बागानों में युवतियाँ बोकु पहने चाय की पत्तियाँ तोड़ती हैं। बच्चे भी अपनी माँ के साथ काम करते हैं। इन्ही की भाँति आम जनता भी अपनी मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति के प्रयास में जीविका रूप में देश और समाज के लिए बहुत कुछ करते हैं। सड़के, पहाड़ी मार्ग, नदियों, पुल आदि बनाना। खेतों में अन्न उपजाना, कपड़ा बुनना, खानों,कारखानों में कार्य करके अपनी सेवाओं से राष्ट्र आर्थिक सदृढ़ता प्रदान करके उसकी रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाते हैं।
हमारे देश की आम जनता जितना श्रम करती है, उसे उसका आधा भी प्राप्त नहीं होता परन्तु फिर भी वो असाध्य कार्य को अपना कर्तव्य समझ कर करते हैं। वो समाज का कल्याण करते हैं परन्तु बदले में उन्हें स्वयं नाममात्र का ही अंश प्राप्त होता है। देश की प्रगति का आधार यहीं आम जनता है जिसके प्रति सकारात्मक आत्मीय भावना भी नहीं होती। यदि ये आम जनता ना हो तो देश की प्रगति का पहिया रुक जाएगा।
12. आज की पीढ़ी द्वारा प्रकृति के साथ किस तरह का खिलवाड़ किया जा रहा है। इसे रोकने में आपकी क्या भूमिका होनी चाहिए।
उत्तर
आज की पीढ़ी के द्वारा प्रकृति को प्रदूषित किया जा रहा है। हमारे कारखानों से निकलने वाले जल में खतरनाक कैमिकल व रसायन होते हैं जिसे नदी में प्रवाहित कर दिया जाता है। साथ में घरों से निकला दूषित जल भी नदियों में ही जाता है। जिसके कारण हमारी नदियाँ लगातार दूषित हो रही हैं। अब नदियों का जल पीने लायक नहीं रहा है। इसका जीवन्त उदाहरण यमुना नदी है। जो आज एक नाले में बदल गई है। वनों की अन्धांधुध कटाई से मृदा का कटाव होने लगा है जो बाढ़ को आमंत्रित कर रहा है। दूसरे अधिक पेड़ों की कटाई ने वातावरण में कार्बनडाइ आक्साइड की अधिकता बढ़ा दी है जिससे वायु प्रदुषित होती जा रही है। हमें चाहिए कि हम मिलकर इस समस्या का समाधान निकाले। हम सबको मिलकर अधिक से अधिक पेड़ों को लगाना चाहिए। पेड़ों को काटने से रोकने के लिए उचित कदम उठाने चाहिए ताकि वातावरण की शुद्धता बनी रहे।
हमें नादियों की निर्मलता व स्वच्छता को बनाए रखने के लिए कारखानों से निकलने वाले प्रदूर्षित जल को नदियों में डालने से रोकना चाहिए। नदियों की स्वच्छता बनाए रखने के लिए, लोगों की जागरूकता के लिए अनेक कार्यक्रमों का आयोजन होना चाहिए।
13. प्रदूषण के कारण स्नोफॉल में कमी का जिक्र किया गया है। प्रदूषण के और कौन-कौन से दुष्परिणाम सामने आये हैं, लिखें।
उत्तर
गर्मी के मौसम में गर्मी की अधिकता देखते बनती है। कई बार तो पारा अपने सारे रिकार्ड को तोड़ चुका होता है। सर्दीयों के समय में या तो कम सर्दी पड़ती है या कभी सर्दी का पता ही नहीं चलता। ये सब प्रदुषण के कारण ही सम्भव हो रहा है। जलप्रदूषण के कारण स्वच्छ जल पीने को नहीं मिल पा रहा है और पेट सम्बन्धी अनेकों बीमारियाँ उत्पन्न हो रही हैं।
14. 'कटाओ' पर किसी दूकान का न होना उसके लिए वरदान है। इस कथन के पक्ष में अपनी राय व्यक्त कीजिए।
उत्तर
'कटाओ' पर किसी भी दुकान का न होना उसके लिए वरदान है क्योंकि अभी यह पर्यटक स्थल नहीं बना। यदि कोई दुकान होती तो वहाँ सैलानियों का अधिक आगमन शुरू हो जाएगा। और वे जमा होकर खाते-पीते, गंदगी फैलाते, इससे गंदगी तथा वहाँ पर वाहनों के अधिक प्रयोग से वायु में प्रदूषण बढ़ जाएगा। लेखिका को केवल यही स्थान मिला जहाँ पर वह स्नोफॉल देख पाई। इसका कारण यही था कि वहाँ प्रदूषण नहीं था। अतः 'कटाओ 'पर किसी भी दुकान का न होना उसके लिए एक प्रकार से वरदान ही है।
15. प्रकृति ने जल संचय की व्यवस्था किस प्रकार की है ?
उत्तर
प्रकृति ने जल संचय की व्यवस्था नायाब ढंग से की है। प्रकृति सर्दियों में बर्फ के रूप में जल संग्रह कर लेती है और गर्मियों में पानी के लिए जब त्राहि-त्राहि मचती है,तो उस समय यही बर्फ शिलाएँ पिघलकर जलधारा बन के नदियों को भर देती है। सचमुच प्रकृति ने जल संचय की कितनी अद्भुत व्यवस्था की है।
16. देश की सीमा पर बैठे फ़ौजी किस तरह की कठिनाइयों से जूझते हैं? उनके प्रति हमारा क्या उत्तरदायित्व होना चाहिए?
उत्तर
देश की सीमा पर,जहाँ तापमान गर्मी में भी माइनस 15 डिग्री सेलसियस होता है, उस कड़कड़ाती ठंड फ़ौजी पहरा देते हैं जब कि हम वहाँ पर एक मिनट भी नहीं रूक सकते। हमारे फ़ौजी सर्दी तथा गर्मी में वहीं रहकर देश की रक्षा करते रहते हैं ताकि हम चैन की नींद सो सकें। ये जवान हर पल कठिनाइयों से झूझते हैं और अपनी जान हथेली पर रखकर जीते हैं।
हमें सदा उनकी सलामती की दुआ करनी चाहिए। उनके परिवारवालों के साथ हमेशा सहानुभूति, प्यार व सम्मान के साथ पेश आना चाहिए।
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