Get the most accurate NCERT Solutions for Class 10 Hindi पाठ 5 पर्वत प्रदेश में पावस here. Updated for the 2026-27 academic session, these solutions are based on the latest NCERT textbooks for Class 10 Hindi. Our expert-created answers for Class 10 Hindi are available for free download in PDF format.
Detailed पाठ 5 पर्वत प्रदेश में पावस NCERT Solutions for Class 10 Hindi
For Class 10 students, solving NCERT textbook questions is the most effective way to build a strong conceptual foundation. Our Class 10 Hindi solutions follow a detailed, step-by-step approach to ensure you understand the logic behind every answer. Practicing these पाठ 5 पर्वत प्रदेश में पावस solutions will improve your exam performance.
Class 10 Hindi पाठ 5 पर्वत प्रदेश में पावस NCERT Solutions PDF
NCERT Solutions for Class 10 Hindi for Sparsh पाठ 5 पर्वत प्रदेश में पावस
पाठ की रूपरेखा
प्रस्तुत कविता में कवि सुमित्रानंदन पंत जी ने पर्वतीय अंचल में वर्षा ऋतु का अत्यंत मनोरम और सजीव चित्रण प्रस्तुत किया है। कवि ने यहाँ प्रकृति के बदलते रूपों का सुंदर मानवीकरण किया है, जिससे पाठक के मन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। यह रचना प्रकृति के अद्भुत सौंदर्य से साक्षात्कार कराती है और व्यक्ति को प्रकृति प्रेमी बनने के लिए प्रेरित करती है।
पाठ का सार
वर्षा काल के दौरान पहाड़ी प्रदेशों की प्राकृतिक सुंदरता हर क्षण बदलती रहती है। पहाड़ों पर खिले हज़ारों फूल मानो पर्वत की आँखें बनकर फैले हुए दर्पण रूपी तालाब में अपनी ही परछाईं को निहार रहे हैं। पर्वतों से गिरते हुए झागदार झरने मधुर संगीत उत्पन्न करते हैं, जो दर्शकों के मन को असीम प्रसन्नता से भर देता है। ऊंचे वृक्ष मौन भाव से आकाश को निहारते हुए उच्च आकांक्षाओं को प्रतिबिंबित करते हैं। जब अचानक धुंध छा जाती है, तो ऐसा लगता है मानो पूरा पर्वत कहीं उड़ गया हो और चारों ओर केवल कोहरा और धुआँ रह जाता है। इस रोमांचक वातावरण को देखकर ऐसा आभास होता है मानो वर्षा के देवता इंद्र देव स्वयं अपने विमान पर सवार होकर इस जादुई सौंदर्य का खेल दिखा रहे हों।
I. बहुविकल्पीय प्रश्न
Question 1. प्रस्तुत पंक्तियों में किस ऋतु को दर्शाया गया है?
(a) वसंत
(b) ग्रीष्म
(c) पावस
(d) हेमंत
Answer: (c) पावस
In simple words: प्रस्तुत कविता में वर्षा ऋतु (पावस) के दौरान पर्वतों के अद्भुत रूप का वर्णन किया गया है।
Exam Tip: कविता के शीर्षक "पर्वत प्रदेश में पावस" में 'पावस' शब्द का अर्थ वर्षा ऋतु है, इसे ध्यान में रखें।
Question 2. कौन पल-पल अपना वेश बदल रहा है?
(a) ताल
(b) पर्वत
(c) प्रकृति
(d) इनमें से कोई नहीं
Answer: (c) प्रकृति
In simple words: वर्षा ऋतु में पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम बहुत जल्दी-जल्दी बदलता है, जिससे प्रकृति का स्वरूप हर पल नया दिखाई देता है।
Exam Tip: "पल-पल परिवर्तित प्रकृति - वेश" पंक्ति सीधे प्रकृति के स्वरूप बदलने की ओर संकेत करती है।
Question 3. पर्वत की आँखें जैसे कौन हैं?
(a) पर्वत पर उमड़ते-घुमड़ते बादल
(b) पर्वत पर खिले फूल
(c) पर्वत की बर्फ़
(d) इनमें से कोई नहीं
Answer: (b) पर्वत पर खिले फूल
In simple words: पर्वतों पर खिले हुए हज़ारों पुष्पों को कवि ने पहाड़ की आँखों के रूप में चित्रित किया है।
Exam Tip: "सहस्र दृग - सुमन" शब्द का अर्थ हज़ारों पुष्प रूपी आँखें हैं, इस रूपक को अच्छे से समझें।
Question 4. नीचे स्थित जल में कौन अपने विशाल आकार को निहार रहा है?
(a) बादल
(b) पेड़
(c) पर्वत
(d) उपर्युक्त सभी
Answer: (c) पर्वत
In simple words: पर्वत के नीचे फैले हुए दर्पण के समान स्वच्छ तालाब में विशालकाय पर्वत अपना ही प्रतिबिंब देख रहा है।
Exam Tip: दर्पण रूपी तालाब में पर्वत का प्रतिबिंब उसकी विशालता और सुंदरता को दर्शाता है।
Question 5. कौन गिरि के गौरव का गान करता हुआ प्रतीत हो रहा है?
(a) ताल
(b) पेड़
(c) पुष्प
(d) निर्झर
Answer: (d) निर्झर
In simple words: पर्वतों से बहने वाले झरने अपनी कल - कल ध्वनि से पर्वत के यश और गौरव का गान करते प्रतीत होते हैं।
Exam Tip: "गिरि का गौरव गाकर झर - झर" पंक्ति के अनुसार गौरव गान करने का श्रेय 'निर्झर' (झरने) को दिया गया है।
Question 6. किनके स्वरों से नस-नस में उत्तेजना भर जाती है?
(a) पक्षियों के
(b) ताल के
(c) बहती हवा के
(d) झरनों के
Answer: (d) झरनों के
In simple words: पर्वतों से वेग से गिरते हुए झरनों के स्वरों को सुनकर दर्शकों के मन में असीम उत्साह और ऊर्जा का संचार होने लगता है।
Exam Tip: झरनों की कल - कल ध्वनि और झाग को ऊर्जा एवं उत्तेजना का प्रतीक माना गया है।
Question 7. झाग भरे निर्झर किनके समान लगते हैं?
(a) करधनी के समान
(b) पाजेब के घुँघरुओं के समान
(c) मोती की लड़ियों के समान
(d) माखन के समान
Answer: (c) मोती की लड़ियों के समान
In simple words: झरनों से उठने वाले सफेद और चमकीले झाग को कवि ने मोतियों की सुंदर लड़ियों के समान बताया है।
Exam Tip: "मोती की लड़ियों - सी सुंदर" उपमा का प्रयोग झरनों की सुंदरता के लिए किया गया है।
Question 8. पर्वत की छाती पर उगे ऊँचे वृक्षों की तुलना किससे की गई है?
(a) झरने के गिरते पानी से
(b) नदी के बहते जल से
(c) ताल के स्थिर जल से
(d) मन में उठने वाली ऊँची आकांक्षाओं से
Answer: (d) मन में उठने वाली ऊँची आकांक्षाओं से
In simple words: पहाड़ के सीने पर उगे विशाल वृक्ष मौन भाव से ऊपर उठने की इच्छा रखते हैं, जो मनुष्य की ऊँची आकांक्षाओं के समान हैं।
Exam Tip: "उच्चाकांक्षाओं से तरुवर" पंक्ति मनुष्य के मन की महत्वाकांक्षाओं और आगे बढ़ने की चाह को दर्शाती है।
Question 9. कवि को क्यों लगा कि पहाड़ उड़ गया है?
(a) घनघोर वर्षा होने के कारण
(b) बादलों द्वारा पर्वत के ढक जाने के कारण
(c) पर्वत को उसकी जगह पर न पाकर
(d) उपर्युक्त सभी
Answer: (b) बादलों द्वारा पर्वत के ढक जाने के कारण
In simple words: अचानक अत्यधिक घने बादलों के छाने से पूरा पहाड़ अदृश्य हो जाता है, जिससे ऐसा प्रतीत होता है मानो वह उड़ गया हो।
Exam Tip: बादलों के अचानक घेर लेने से पर्वत का गायब हो जाना ही उसके 'उड़ जाने' की कल्पना का आधार है।
Question 10. कवि ने पर्वत के पंख को कैसा बताया है?
(a) पारे के समान सफेद एवं चमकीला
(b) काजल के समान काला
(c) काला एवं सफेद
(d) इनमें से कोई नहीं
Answer: (a) पारे के समान सफेद एवं चमकीला
In simple words: कवि ने उड़ते हुए बादलों को पर्वत के अत्यंत चमकीले और पारे जैसे धवल पंखों के समान माना है।
Exam Tip: "पारद के पर" शब्द का अर्थ पारे के समान अत्यंत सफेद और उज्ज्वल पंखों से है।
Question 11. 'पर्वत प्रदेश में पावस' ऋतु में कौन-कौन नज़ररों से ओझल हो गए?
(a) पर्वत
(b) झरने
(c) शाल वृक्ष
(d) उपर्युक्त सभी
Answer: (d) उपर्युक्त सभी
In simple words: तेज़ वर्षा और घने कोहरे के कारण पहाड़, झरने और शाल के ऊँचे वृक्ष - सब कुछ अचानक आँखों के सामने से गायब हो जाते हैं।
Exam Tip: जब कोहरा सघन हो जाता है, तो पूरी पर्वत घाटी ही अदृश्य हो जाती है। परीक्षा में "उपर्युक्त सभी" विकल्प को ध्यान से चुनें।
Question 12. किसकी मात्र आवाज़ ही शेष रह गई है?
(a) चिड़ियों की
(b) झरनों की
(c) नदियों की
(d) ताल की
Answer: (b) झरनों की
In simple words: कोहरे की घनी चादर के कारण जब झरने दिखाई देना बंद हो जाते हैं, तब केवल उनकी कल - कल ध्वनि ही वातावरण में गूँजती रहती है।
Exam Tip: "रव - शेष रह गए हैं निर्झर!" पंक्ति का अर्थ है कि केवल झरनों की आवाज़ ही बची है।
II. लघु उत्तरीय प्रश्न (2 अंक)
Question 1. पर्वत अपना प्रतिबिंब तालाब में क्यों देख रहा है?
Answer: वर्षा के आगमन पर पहाड़ों की शोभा अत्यंत बढ़ जाती है और उन पर खिले अनेक पुष्प उसकी अनूठी आभा को दर्शाते हैं। ऐसा लगता है मानो पर्वत अपनी सुंदरता से वशीभूत होकर अपने नीचे स्थित तालाब रूपी आईने में स्वयं के सुंदर रूप को निहार रहा है। तालाब का जल बहुत निर्मल है, जो एक सच्चे शीशे का काम कर रहा है, और पर्वत अपने ऊपर खिले पुष्प रूपी नेत्रों से अपनी परछाईं को देखकर आनंदित हो रहा है।
In simple words: पहाड़ के नीचे तालाब का साफ पानी शीशे जैसा है। पहाड़ उस पानी में खिले फूलों की मदद से अपनी ही परछाईं को देखकर खुश हो रहा है।
Exam Tip: उत्तर में "दर्पण रूपी तालाब" और "पुष्प रूपी आँखें" जैसी उपमाओं का स्पष्ट उल्लेख करें।
Question 2. पावस ऋतु में पर्वत प्रदेश का रूप क्यों परिवर्तित हो जाता है?
Answer: पहाड़ी अंचलों में वर्षा के मौसम में प्रकृति पल - पल अपना स्वरूप बदलती रहती है। कभी अचानक आसमान में काले बादल घिर आते हैं, तो कभी मूसलाधार बारिश के तुरंत बाद धूप खिल उठती है। अत्यधिक ऊंचाई पर स्थित होने के कारण यहाँ वातावरण का यह तेजी से बदलना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है, जो वर्षा काल में और अधिक मनमोहक हो जाती है।
In simple words: पहाड़ों पर ऊँचाई के कारण मौसम बहुत जल्दी बदलता है। कभी धूप आती है तो कभी तुरंत घने बादल छा जाते हैं, जिससे प्रकृति का रूप बदल जाता है।
Exam Tip: मौसम में क्षण - क्षण होने वाले परिवर्तनों जैसे - धूप, बादल और बारिश का क्रमबद्ध वर्णन करें।
Question 3. पर्वत प्रदेश में पावस के आधार पर 'है टूट पड़ा भू पर अंबर' पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।
Answer: प्रस्तुत पंक्ति से कवि का अभिप्राय अत्यधिक तीव्र और मूसलाधार वर्षा होने से है। पर्वतों पर कोहरे और बादलों के अचानक घिर आने से सब कुछ दिखना बंद हो जाता है और केवल झरनों की ध्वनि ही सुनाई देती है। ऐसे में पृथ्वी और आसमान का भेद समाप्त हो जाता है, और इतनी भीषण बारिश होती है मानो पूरा आकाश धरती पर टूट पड़ा हो।
In simple words: इसका मतलब है कि बहुत तेज़ और मूसलाधार बारिश हो रही है। घने बादलों के कारण ऐसा लगता है मानो आसमान सीधे धरती पर गिर गया हो।
Exam Tip: इस पंक्ति का प्रतीकात्मक अर्थ "अत्यंत मूसलाधार वर्षा" से है, इसे उत्तर में स्पष्ट रूप से लिखें।
Question 4. 'पर्वत प्रदेश में पावस' की सार्थकता पर अपने विचार प्रकट कीजिए।
Answer: यह कविता प्रकृति के कोमल और रौद्र दोनों ही रूपों को सुंदर ढंग से हमारे समक्ष रखती है। इसकी सार्थकता इसी बात में है कि यह हमें प्राकृतिक सौंदर्य के प्रति संवेदनशील बनाती है और इस अमूल्य धरोहर को संरक्षित रखने का संदेश देती है। यदि हम पर्यावरण को प्रदूषित करेंगे तो इसके विनाशकारी प्रभाव हमारे अस्तित्व के लिए ही संकट बन जाएंगे।
In simple words: इस कविता से हमें सीख मिलती है कि प्रकृति बहुत सुंदर और जीवन के लिए ज़रूरी है। हमें इसे बचाना चाहिए और प्रदूषित होने से रोकना चाहिए।
Exam Tip: प्रकृति के दोनों रूपों (सुंदर और भयानक) के साथ - साथ पर्यावरण संरक्षण के संदेश को उत्तर में अवश्य शामिल करें।
Question 5. 'मेखलाकार' शब्द का क्या अर्थ है? कवि ने इस शब्द का प्रयोग यहाँ क्यों किया है?
Answer: 'मेखलाकार' का शाब्दिक अर्थ कमर में पहने जाने वाले आभूषण (करधनी) के सदृश गोलाकार आकृति से है। सुमित्रानंदन पंत जी ने इस शब्द का प्रयोग पहाड़ों की विशाल टेढ़ी - मेढ़ी गोलाकार श्रृंखला को दर्शाने के लिए किया है, जो वर्षा काल में दूर - दूर तक फैली हुई किसी बड़ी करधनी के समान दिखाई देती है।
In simple words: मेखलाकार का मतलब है कमर की करधनी जैसा टेढ़ा - मेढ़ा आकार। कवि ने इसका उपयोग गोल फैली हुई पहाड़ों की लंबी कतार के लिए किया है।
Exam Tip: "करधनी के आकार" और "पर्वत श्रृंखला का फैलाव" को जोड़ते हुए उत्तर लिखें.
Question 6. 'सहस्र दृग-सुमन' से क्या तात्पर्य है? कवि ने इसका प्रयोग किसके लिए किया होगा?
Answer: प्रस्तुत पद 'सहस्र दृग - सुमन' का अर्थ फूलों रूपी हज़ारों नेत्रों से है। कवि ने इसका उपयोग पहाड़ों की ढलानों पर खिले हुए अनगिनत जंगली पुष्पों के लिए किया है। प्रकृति का मानवीकरण करते हुए कवि को ऐसा प्रतीत होता है मानो ये फूल पर्वत की आँखें हैं, जिनसे वह नीचे फैले जल में खुद को देख रहा है।
In simple words: इसका अर्थ है हज़ारों फूलों रूपी आँखें। कवि ने यह शब्द पहाड़ों पर खिले हुए उन सुंदर फूलों के लिए इस्तेमाल किया है जो आँखों की तरह दिखते हैं।
Exam Tip: "दृग" (आँखें) और "सुमन" (फूल) का संधि - विच्छेद या अर्थ समझाते हुए मानवीकरण अलंकार का उल्लेख करें।
Question 7. पर्वत के हृदय से उठकर ऊँचे-ऊँचे वृक्ष आकाश की ओर क्यों देख रहे थे और वे किस बात को प्रतिबिंबित करते हैं?
Answer: पहाड़ की छाती पर उगे हुए ये गगनचुंबी वृक्ष शांत मन से निरंतर आकाश की ओर बिना पलक झपकाए देख रहे हैं। वे पूर्णतः अडिग, स्थिर और गंभीर चिंतन में लीन दिखाई देते हैं। इन ऊँचे वृक्षों से हमें यह अत्यंत महत्वपूर्ण प्रेरणा मिलती है कि विपरीत परिस्थितियों में भी हमें अपने जीवन के लक्ष्यों को सदैव ऊँचा रखना चाहिए। हमें बिना विचलित हुए, धैर्य और मौन साधना के साथ निरंतर अपने सपनों और आकांक्षाओं को प्राप्त करने के लिए पुरुषार्थ करते रहना चाहिए।
In simple words: पहाड़ पर उगे पेड़ चुपचाप आसमान को छूने की चाहत में ऊपर देख रहे हैं। यह हमें जीवन में हमेशा आगे बढ़ने और ऊँचे लक्ष्य रखने की सीख देता है।
Exam Tip: पेड़ों की स्थिरता और मनुष्य की "ऊँचा उठने की आकांक्षा" के बीच के साम्य को स्पष्ट करें।
Question 8. शाल के वृक्ष भयभीत होकर धरती में क्यों धँस गए?
Answer: पर्वतीय प्रदेश में अचानक आई तेज़ आंधी और मूसलाधार बारिश के कारण घनी धुंध छा जाती है, जिससे विशाल शाल के वृक्ष कोहरे में छिप जाते हैं। इस अचानक हुए भयानक प्राकृतिक बदलाव के कारण ऐसा लगता है मानो वे पेड़ डर गए हों और बचने के लिए पृथ्वी के भीतर समा गए हों।
In simple words: बारिश के समय घना कोहरा छाने से शाल के बड़े पेड़ दिखाई देना बंद हो जाते हैं। ऐसा लगता है मानो वे डरकर धरती में छिप गए हों।
Exam Tip: धुंध और कोहरे के कारण वृक्षों के "अदृश्य होने" की क्रिया को डरकर धरती में धँसने की कल्पना से जोड़कर लिखें।
III. उच्च चिंतन क्षमता एवं अभिव्यक्ति आधारित प्रश्न (4 अंक)
Question 1. वर्षा ऋतु में कवि ने पर्वतीय प्रदेश में ऐसा क्या देखा कि उसे लगा जैसे इंद्र, इंद्रजाल का खेल दिखा रहा है? अपने शब्दों में लिखिए।
Answer: पर्वतीय अंचल में वर्षा के समय होने वाले पल - पल के परिवर्तन अद्भुत और चमत्कारी प्रतीत होते हैं। अचानक गगन में घने काले बादलों का डेरा जमा हो जाता है और मूसलाधार बारिश होने लगती है। सघन कोहरे के छाने से विशाल पर्वत और शाल के वृक्ष अचानक दृष्टि से ओझल हो जाते हैं और तालाब से कोहरे का धुआँ ऐसे उठता है मानो जल में आग लग गई हो। मौसम के इस तीव्र और जादुई बदलाव को देखकर कवि सुमित्रानंदन पंत जी को ऐसा आभास होता है मानो वर्षा के स्वामी इंद्र देव अपने मेघ रूपी रथ पर बैठकर पूरी घाटी में कोई जादुई माया (इंद्रजाल) का प्रदर्शन कर रहे हों।
In simple words: पहाड़ों पर पल - पल मौसम बदलता रहता है। कभी धूप होती है, तो कभी अचानक बादलों के छाने से सब गायब हो जाता है और तालाब से धुआँ उठने लगता है। इस बदलते नज़ारे को देखकर कवि को लगता है कि इंद्र देव कोई जादू का खेल दिखा रहे हैं।
Exam Tip: "इंद्रजाल" का अर्थ जादुई खेल से है। उत्तर में तालाब से उठते धुएँ, शाल के पेड़ों के गायब होने और बादलों के छाने के दृश्यों को अवश्य लिखें।
Question 2. वर्षा ऋतु में पहाड़ मानवीय क्रियाएँ करता हुआ दिखाई देता है। 'पर्वत प्रदेश में पावस' कविता के आधार पर लिखिए।
Answer: प्रस्तुत कविता में कवि ने पर्वतीय अंचल का अत्यंत सुंदर मानवीकरण किया है, जिससे पर्वत एक सजीव मनुष्य की भाँति व्यवहार करता प्रतीत होता है। पहाड़ के तलहटी में स्थित स्वच्छ जल का जलाशय एक दर्पण के समान है, जिसमें पहाड़ अपनी हज़ारों पुष्प रूपी आँखों से अपने विशाल और भव्य स्वरूप को ध्यान से देख रहा है। इसके अतिरिक्त, पर्वत की छाती से उगे हुए ऊँचे - ऊँचे वृक्ष शांत आकाश को एकटक निहार रहे हैं, जो पहाड़ के अंतर्मन में उठने वाली उच्च आकांक्षाओं और विचारों को प्रकट करते हैं। ये समस्त दृश्य पर्वत को एक चेतन मनुष्य की भाँति दर्शाते हैं।
In simple words: कविता में पहाड़ को एक इंसान की तरह दिखाया गया है। पहाड़ तालाब के पानी को शीशा मानकर उसमें अपने फूल रूपी आँखों से अपना चेहरा देख रहा है, और उसके ऊपर उगे पेड़ उसके मन की ऊँची इच्छाओं को दिखा रहे हैं।
Exam Tip: "मानवीकरण अलंकार" का उल्लेख करते हुए समझाएं कि किस प्रकार निर्जीव पहाड़ को सजीव मनुष्य की तरह क्रियाएँ करते हुए दिखाया गया है।
Question 3. कवि को वर्षा ऋतु में ऐसा क्यों लगने लगा कि पूरा पहाड़ ही आसमान में उड़ गया है? 'पर्वत प्रदेश में पावस' कविता के आधार पर अपने शब्दों में लिखिए।
Answer: पर्वतीय क्षेत्रों में वर्षा ऋतु के दौरान अत्यंत सघन कोहरा और काले - काले बादल छा जाते हैं, जो पहाड़ों की चोटियों को पूरी तरह अपनी आगोश में ले लेते हैं। इस स्थिति में आकाश और पहाड़ों के बीच की सीमा समाप्त हो जाती है और केवल सफेद कोहरे का साम्राज्य दिखाई देता है। इस दृश्य को देखकर कवि को ऐसा भ्रम होता है मानो पूरा विशालकाय पर्वत ही बादलों के चमकीले और धवल पंख लगाकर गगन में कहीं उड़ गया हो और अपनी आँखों के सामने से पूरी तरह विलीन हो गया हो।
In simple words: बारिश के समय चारों तरफ इतने घने और सफेद बादल छा जाते हैं कि पहाड़ दिखाई देना बंद हो जाता है। इसे देखकर कवि को लगता है कि पहाड़ बादलों के पंख लगाकर आसमान में उड़ गया है।
Exam Tip: "पारद के पर" और "धुंध के साम्राज्य" की सुंदर व्याख्या करते हुए उत्तर को विस्तृत रूप दें।
Question 4. पहाड़ पर उगे ऊँचे-ऊँचे तरुवर क्या संदेश देते प्रतीत होते हैं? अथवा पर्वत पर उगे ऊँचे-ऊँचे तरुवरों से आप कौन-सी प्रेरणा ग्रहण कर सकते हैं?
Answer: पहाड़ की छाती पर उगे हुए ये गगनचुंबी वृक्ष शांत मन से निरंतर आकाश की ओर बिना पलक झपकाए देख रहे हैं। वे पूर्णतः अडिग, स्थिर और गंभीर चिंतन में लीन दिखाई देते हैं। इन ऊँचे वृक्षों से हमें यह अत्यंत महत्वपूर्ण प्रेरणा मिलती है कि विपरीत परिस्थितियों में भी हमें अपने जीवन के लक्ष्यों को सदैव ऊँचा रखना चाहिए। हमें बिना विचलित हुए, धैर्य और मौन साधना के साथ निरंतर अपने सपनों और आकांक्षाओं को प्राप्त करने के लिए पुरुषार्थ करते रहना चाहिए।
In simple words: पहाड़ के पेड़ हमें सिखाते हैं कि विपरीत परिस्थितियों में भी हमें अपने जीवन के लक्ष्य बड़े रखने चाहिए और शांत रहकर लगातार अपनी मंजिल की तरफ बढ़ते रहना चाहिए।
Exam Tip: पेड़ों की "अडिगता" और "मौन चिंतन" को मनुष्य के "धैर्य" और "उच्च लक्ष्यों" के साथ जोड़कर अपनी प्रेरणा स्पष्ट करें।
अभ्यास प्रश्न पत्र
1. निम्नलिखित में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर 25-30 शब्दों में दीजिए।
Question 1(क). झरते हुए झरने की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
Answer: पर्वतीय प्रदेश में बहने वाले झरने अत्यंत सुंदर दिखाई देते हैं। वे पर्वतों की ऊंचाइयों से गिरते हुए सफेद झाग उत्पन्न करते हैं, जिससे वे मोतियों की चमकीली माला के समान प्रतीत होते हैं। उनके गिरने से होने वाली कल - कल की मधुर ध्वनि मानो पर्वतों के गौरव और महानता का गान करती है।
In simple words: पहाड़ से गिरते हुए झरने सफेद झाग के कारण मोतियों की माला जैसे सुंदर लगते हैं, और उनके पानी की आवाज़ पहाड़ों की तारीफ करती हुई लगती है।
Exam Tip: उत्तर में "मोती की लड़ियाँ" और "गौरव गान" जैसी मुख्य विशेषताओं को संक्षेप में स्पष्ट करें।
Question 1(ख). 'उड़ गया अचानक लो भूधर' - इस पंक्ति द्वारा कवि की कल्पना को स्पष्ट कीजिए।
Answer: इस पंक्ति के माध्यम से कवि ने अचानक घने बादलों के छा जाने की स्थिति का सजीव चित्रण किया है। जब पर्वतीय घाटी में सफेद और चमकीले बादलों का समूह पहाड़ को ढक लेता है, तो पहाड़ अदृश्य हो जाता है। कवि कल्पना करते हैं कि मानो पूरा पर्वत ही बादलों के चमकीले पंख फड़फड़ाकर गगन में उड़ गया हो।
In simple words: जब सफेद बादलों के कारण पूरा पहाड़ छिप जाता है, तो कवि सोचते हैं कि पहाड़ अपने सफेद पंख फैलाकर आसमान में कहीं उड़ गया है।
Exam Tip: कोहरे के कारण पहाड़ के "अदृश्य होने" को ही "पंख फड़फड़ाकर उड़ने" की कल्पना माना गया है, इसे स्पष्ट रूप से लिखें।
Question 1(ग). कवि ने तालाब की तुलना किससे की है और क्यों की है? कविता के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
Answer: कवि ने पर्वत के चरणों में स्थित तालाब की तुलना एक विशाल दर्पण (शीशे) से की है। उन्होंने ऐसा इसलिए किया है क्योंकि तालाब का जल अत्यंत स्वच्छ, शांत और पारदर्शी है, जिसमें विशाल पर्वत अपने ऊपर खिले फूलों रूपी नेत्रों से अपनी सुंदर परछाईं को बिल्कुल साफ देख पा रहा है।
In simple words: कवि ने तालाब की तुलना शीशे से की है क्योंकि तालाब का पानी बहुत साफ है और उसमें पहाड़ का चेहरा साफ दिखाई दे रहा है।
Exam Tip: "जल की स्वच्छता" और "दर्पण के समान प्रतिबिंब दर्शाना" इस तुलना का मुख्य कारण है।
2. निम्नलिखित में से किसी एक प्रश्न का उत्तर 60-70 शब्दों में दीजिए।
Question 2(क). पर्वत प्रदेश में पावस ऋतु में होने वाले प्राकृतिक परिवर्तनों को ध्यान में रखकर यह बताइए कि पहाड़ी लोगों को इस ऋतु में किन-किन कठिनाइयों से सामना करना पड़ता होगा? कविता के कथ्य को ध्यान में रखकर लिखिए।
Answer: 'पर्वत प्रदेश में पावस' कविता के अनुसार वर्षा ऋतु में पहाड़ी क्षेत्रों में तीव्र प्राकृतिक बदलाव होते हैं। अचानक मूसलाधार वर्षा, घने कोहरे का छाना और तेज आंधी जैसी स्थितियाँ उत्पन्न होती हैं। इस मौसम में पहाड़ी लोगों को कई गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। अत्यधिक वर्षा के कारण पर्वतीय रास्तों पर भूस्खलन (लैंडस्लाइड) का खतरा बढ़ जाता है, जिससे यातायात पूरी तरह बाधित हो जाता है। घने कोहरे के कारण दृश्यता (विजिबिलिटी) अत्यंत कम हो जाती है, जिससे पहाड़ी घुमावदार रास्तों पर वाहन चलाना अत्यंत जोखिम भरा हो जाता है। इसके अतिरिक्त, तेज़ ठंड और जनजीवन का अस्त - व्यस्त होना उनकी दैनिक दिनचर्या को बहुत मुश्किल बना देता है।
In simple words: पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश से रास्ते बंद हो जाते हैं और पहाड़ खिसकने का डर रहता है। घना कोहरा होने से लोगों को रास्ते नहीं दिखाई देते, जिससे उनका बाहर निकलना और रोज़मर्रा के काम करना बहुत कठिन हो जाता है।
Exam Tip: पहाड़ी जीवन की कठिनाइयों जैसे - भूस्खलन, कोहरे के कारण मार्ग बंद होना और दैनिक कार्यों में रुकावट को तार्किक रूप से लिखें।
Question 2(ख). पर्वत पर उगे ऊँचे-ऊँचे तरुवरों से आप कौन-सी प्रेरणा ग्रहण कर सकते हैं?
Answer: पर्वत की चोटियों पर उगे ये दीर्घकाय वृक्ष हमें जीवन के कई अमूल्य पाठ सिखाते हैं। वे शांत रहकर मौन साधना में लीन दिखाई देते हैं और सदैव आसमान की ओर एकटक निहारते हैं। इनसे हम यह प्रेरणा ग्रहण कर सकते हैं कि जीवन में चाहे परिस्थितियाँ कितनी भी विषम या अशांत क्यों न हों, हमें अपनी मर्यादाओं और सिद्धांतों पर अडिग रहना चाहिए। हमें अपने लक्ष्यों को सदैव ऊंचा रखना चाहिए और शांत रहकर बिना विचलित हुए निरंतर प्रगति की ओर अग्रसर रहना चाहिए।
In simple words: पहाड़ के पेड़ हमें सिखाते हैं कि विपरीत परिस्थितियों में भी हमें अपने लक्ष्य बड़े रखने चाहिए और शांत रहकर लगातार अपनी मंजिल की तरफ बढ़ते रहना चाहिए।
Exam Tip: इस दीर्घ उत्तरीय प्रश्न में पेड़ों की "अडिगता", "मौन साधना" और "ऊंचा उठने की आकांक्षा" को प्रेरणा के मुख्य बिंदु बनाकर उत्तर दें।
प्रश्न अभ्यास
1. पावस ऋतु में प्रकृति में कौन-कौन से परिवर्तन आते हैं? कविता के आधार पर स्पष्ट कीजिए?
उत्तर
पावस ऋतू में प्रकृति में निम्नलिखित परिवर्तन आते हैं-
• इस ऋतू में मौसम हर वक्त बदलता रहता है|
• विभिन्न प्रकार के रंग-बिरंगे फूल खिल जाते हैं|
• पर्वत के नीचे फैले तालाबों में पर्वतों की परछाई दिखाई देती है|
• मोती की लड़ियों की तरह बहते झरने ऐसा लगता है मानो पर्वतों का गुणगान कर रहे हों|
• पर्वत पर उगे ऊँचे वृक्ष आसमान को चिंतित होकर निहार रहे हैं|
• तेज वर्षा के कारण चारों तरफ धुंध छा जाता है|
2. 'मेखलाकार' शब्द का क्या अर्थ है? कवि ने इस शब्द का प्रयोग यहाँ क्यों किया है?
3. 'सहस्र दृग-सुमन' से क्या तात्पर्य है? कवि ने इस पद का प्रयोग किसके लिए किया होगा?
उत्तर
'सहस्र दृग-सुमन' कवि का तात्पर्य पहाड़ों पर खिले हजारों फूलों से है। कवि को ये हजारों फूल पहाड़ों की आँखों के सामान लग रहे हैं इसीलिए कवि ने इस पद का प्रयोग किया है।
4. कवि ने तालाब की समानता किसके साथ दिखाई है और क्यों?
उत्तर
कवि ने तालाब की समानता दर्पण से की है क्योंकि तालाब भी दर्पण की तरह स्वच्छ और निर्मल प्रतिबिम्ब दिखा रहा है।
5. पर्वत के हृदय से उठकर ऊँचे-ऊँचे वृक्ष आकाश की ओर क्यों देख रहे थे और वे किस बात को प्रतिबिंबित करते हैं?
पर्वत के हृदय से उठकर ऊँचे-ऊँचे वृक्ष आकाश की ओर एकटक चिंतित होकर ऐसे देख रहे थे जैसे वे उनकी उँचाईओं को छूना चाहते हों| वे अपनी मन की आकांक्षाओं को प्रतिबिंबित करते हैं|
6. शाल के वृक्ष भयभीत होकर धरती में क्यों धँस गए?
उत्तर
वर्षा की भयानकता और धुंध से शाल के वृक्ष भयभीत होकर धरती में धँस गए ऐसा प्रतीत होता है।
7. झरने किसके गौरव का गान कर रहे हैं? बहते हुए झरने की तुलना किससे की गई है?
उत्तर
झरने पर्वतों की गाथा का गान कर रहे हैं। बहते हुए झरने की तुलना मोती की लड़ियों से की गयी है।
(ख) निम्नलिखित का भाव स्पष्ट कीजिए -
1. है टूट पड़ा भू पर अंबर।
उत्तर
कवि ने इस पंक्ति में वर्षा ऋतू के मूसलाधार बारिश का वर्णन करते हुए कहा है कि बादलों से इतनी तेज वर्षा हुई कि ऐसा लगा जैसे आकाश धरती पर टूट पड़ा हो|
2. −यों जलद-यान में विचर-विचर
था इंद्र खेलता इंद्रजाल।
उत्तर
इन पंक्तियों में कवि ने वर्षा के देवता इंद्र बादल रूपी वाहन में घूम-घूम कर जादुई करतब दिखा रहे हैं यानी प्रकृति में पल-पल परिवर्तन ला रहे हैं|
3. गिरिवर के उर से उठ-उठ कर
उच्चाकांक्षाओं से तरुवर
हैं झांक रहे नीरव नभ पर
अनिमेष, अटल, कुछ चिंतापर।
उत्तर
इन पंक्तियों का में कवि ने पर्वतों पर उगे हुए वृक्षों का वर्णन करते हुए कहा है कि वे एकटक, स्थिर चिंता में डूबे मन में उच्च आकांक्षाएँ लिए हुए शांत आकाश की ओर देख रहे हैं|
उत्तर
प्रस्तुत कविता में जगह-जगह पर मानवीकरण अलंकार का प्रयोग करके प्रकृति में जान डाल दी गई है जिससे प्रकृति सजीव प्रतीत हो रही है; जैसे − पर्वत पर उगे फूल को आँखों के द्वारा मानवकृत कर उसे सजीव प्राणी की तरह प्रस्तुत किया गया है।
"उच्चाकांक्षाओं से तरूवर
हैं झाँक रहे नीरव नभ पर"
इन पंक्तियों में तरूवर के झाँकने में मानवीकरण अलंकार है, मानो कोई व्यक्ति झाँक रहा हो।
(क) अनेकशब्दों की आवृति पर
(ख) शब्दों की चित्रमयी भाषा पर
(ग) कविता की संगीतात्मकता पर
उत्तर
(ख) शब्दों की चित्रमयी भाषा पर
इस कविता का सौंदर्य शब्दों की चित्रमयी भाषा पर निर्भर करता है। कवि ने कविता में चित्रात्मक शैली का प्रयोग करते हुए प्रकृति का सुन्दर रुप प्रस्तुत किया गया है।
3. कवि ने चित्रात्मक शैली का प्रयोग करते हुए पावस ऋतु का सजीव चित्र अंकित किया है। ऐसे स्थलों को छाँटकर लिखिए।
उत्तर
कवि ने चित्रात्मक शैली का प्रयोग करते हुए पावस ऋतु का सजीव चित्र अंकित किया है। कविता में इन स्थलों पर चित्रात्मक शैली की छटा बिखरी हुई है-
1. मेखलाकार पर्वत अपार
अपने सहस्र दृग-सुमन फाड़,
अवलोक रहा है बार-बार
नीचे जल में निज महाकार
जिसके चरणों में पला ताल
दर्पण फैला है विशाल!
2. गिरिवर के उर से उठ-उठ कर
उच्चाकांक्षाओं से तरुवर
हैं झाँक रहे नीरव नभ पर
अनिमेष, अटल, कुछ चिंतापर।
Free study material for Hindi
NCERT Solutions Class 10 Hindi पाठ 5 पर्वत प्रदेश में पावस
Students can now access the NCERT Solutions for पाठ 5 पर्वत प्रदेश में पावस prepared by teachers on our website. These solutions cover all questions in exercise in your Class 10 Hindi textbook. Each answer is updated based on the current academic session as per the latest NCERT syllabus.
Detailed Explanations for पाठ 5 पर्वत प्रदेश में पावस
Our expert teachers have provided step-by-step explanations for all the difficult questions in the Class 10 Hindi chapter. Along with the final answers, we have also explained the concept behind it to help you build stronger understanding of each topic. This will be really helpful for Class 10 students who want to understand both theoretical and practical questions. By studying these NCERT Questions and Answers your basic concepts will improve a lot.
Benefits of using Hindi Class 10 Solved Papers
Using our Hindi solutions regularly students will be able to improve their logical thinking and problem-solving speed. These Class 10 solutions are a guide for self-study and homework assistance. Along with the chapter-wise solutions, you should also refer to our Revision Notes and Sample Papers for पाठ 5 पर्वत प्रदेश में पावस to get a complete preparation experience.
FAQs
The complete and updated is available for free on StudiesToday.com. These solutions for Class 10 Hindi are as per latest NCERT curriculum.
Yes, our experts have revised the as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Hindi concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.
Toppers recommend using NCERT language because NCERT marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our will help students to get full marks in the theory paper.
Yes, we provide bilingual support for Class 10 Hindi. You can access in both English and Hindi medium.
Yes, you can download the entire in printable PDF format for offline study on any device.