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Detailed Chapter 02 गोल NCERT Solutions for Class 6 Hindi
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Class 6 Hindi Chapter 02 गोल NCERT Solutions PDF
पेज 22 - मेरी समझ से
Question 1. "दोस्त, खेल में इतना गुस्सा अच्छा नहीं। मैंने तो अपना बदला ले ही लिया है। अगर तुम मुझे हॉकी नहीं मारते तो शायद मैं तुम्हें दो ही गोल से हराता।" मेजर ध्यानचंद की इस बात से उनके बारे में क्या पता चलता है?
(a) वे अत्यंत क्रोधी थे।
(b) वे अच्छे ढंग से बदला लेते थे।
(c) उन्हें हॉकी से मारने पर वे अधिक गोल करते थे।
(d) वे जानते थे कि खेल को सही भावना से खेलना चाहिए।
Answer: (d) वे जानते थे कि खेल को सही भावना से खेलना चाहिए।
In simple words: ध्यानचंद जी का मानना था कि खेल में गुस्सा करने की बजाय खेल भावना और लगन से अपनी प्रतिभा दिखाना ही सबसे सही बदला है।
Exam Tip: मेजर ध्यानचंद के विचारों को समझने के लिए पाठ की उन पंक्तियों पर ध्यान दें जहाँ वे खेल भावना को सफलता का मूल मंत्र बताते हैं।
Question 2. लोगों ने मेजर ध्यानचंद को 'हॉकी का जादूगर' कहना क्यों शुरू कर दिया?
(a) उनके हॉकी खेलने के विशेष कौशल के कारण
(b) उनकी हॉकी स्टिक की अनोखी विशेषताओं के कारण
(c) हॉकी के लिए उनके विशेष लगाव के कारण
(d) उनकी खेल भावना के कारण
Answer: (a) उनके हॉकी खेलने के विशेष कौशल के कारण
In simple words: ध्यानचंद जी मैदान पर इतनी चतुराई और कमाल के नियंत्रण के साथ हॉकी खेलते थे कि लोगों को लगता था कि वे कोई जादू कर रहे हैं।
Exam Tip: ध्यानचंद जी के अद्भुत खेल कौशल और गेंद पर उनके नियंत्रण के कारण ही उन्हें 'जादूगर' की उपाधि दी गई थी, इसे ध्यान में रखें।
Question 3. अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
Answer: हमने ये उत्तर इसलिए चुने क्योंकि संस्मरण के अनुसार मेजर ध्यानचंद ने हमेशा खेल भावना को सर्वोपरि माना। वे कहते थे कि सफलता का कोई जादुई तरीका नहीं है, बल्कि कड़ी मेहनत और लगन ही असली कुंजी है। दूसरे प्रश्न का उत्तर उनके असाधारण खेल कौशल पर आधारित है। वे गेंद को इस तरह नियंत्रित करते थे कि विपक्षी टीम चकित रह जाती थी, यही कारण है कि लोग उन्हें हॉकी का जादूगर बुलाने लगे।
In simple words: ध्यानचंद जी का खेल और उनका आचरण दोनों ही बहुत ऊंचे दर्जे के थे। उन्होंने हमेशा खेल को प्रेम और लगन से खेला, यही इन उत्तरों का आधार है।
Exam Tip: चर्चा वाले प्रश्नों में अपने उत्तरों को सिद्ध करने के लिए हमेशा पाठ में से कोई न कोई उदाहरण अवश्य प्रस्तुत करें।
पेज 23 - मिलकर करें मिलान
Question 4. पाठ में से चुनकर कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। इन्हें इनके सही अर्थों या संदर्भों से मिलाइए -
| शब्द | अर्थ या संदर्भ |
|---|---|
| 1. लांस नायक | 1. स्वतंत्रता से पहले सूबेदार भारतीय सैन्य अधिकारियों का दूसरा सबसे बड़ा पद था। |
| 2. बर्लिन ओलंपिक | 2. भारतीय सेना का एक पद (रैंक) है। |
| 3. पंजाब रेजिमेंट | 3. सैनिकों के रहने का क्षेत्र। |
| 4. सैपर्स एंड माइनर्स टीम | 4. वर्ष 1936 में जर्मनी के बर्लिन शहर में आयोजित ओलंपिक खेल प्रतियोगिता, जिसमें 49 देशों ने भाग लिया था। |
| 5. सूबेदार | 5. स्वतंत्रता से पहले अंग्रेजों की भारतीय सेना का एक दल। |
| 6. छावनी | 6. अंग्रेजों के समय का एक हॉकी दल। |
Answer:
सही मिलान इस प्रकार है:
1. लांस नायक → भारतीय सेना का एक पद (रैंक) है।
2. बर्लिन ओलंपिक → वर्ष 1936 में जर्मनी के बर्लिन शहर में आयोजित ओलंपिक खेल प्रतियोगिता, जिसमें 49 देशों ने भाग लिया था।
3. पंजाब रेजिमेंट → स्वतंत्रता से पहले अंग्रेजों की भारतीय सेना का एक दल।
4. सैपर्स एंड माइनर्स team → अंग्रेजों के समय का एक हॉकी दल।
5. सूबेदार → स्वतंत्रता से पहले सूबेदार भारतीय सैन्य अधिकारियों का दूसरा सबसे बड़ा पद था।
6. छावनी → सैनिकों के रहने का क्षेत्र।
In simple words: इस मिलान में पाठ में आए सेना और खेल से जुड़े विभिन्न शब्दों को उनके सही अर्थ और ऐतिहासिक संदर्भ के साथ जोड़ा गया है।
Exam Tip: 'लांस नायक' और 'सूबेदार' जैसे पदों के अंतर तथा 'बर्लिन ओलंपिक' के वर्ष (1936) को ध्यान से याद कर लें, यह वस्तुनिष्ठ प्रश्नों में पूछा जा सकता है।
Question 5. पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया?
(क) "बुरा काम करने वाला आदमी हर समय इस बात से डरता रहता है कि उसके साथ भी बुराई की जाएगी।"
(ख) "मेरी तो हमेशा यह कोशिश रहती कि मैं गेंद को गोल के पास ले जाकर अपने किसी साथी खिलाड़ी को दे दूँ ताकि उसे गोल करने का श्रेय मिल जाए। अपनी इसी खेल भावना के कारण मैंने दुनिया के खेल प्रेमियों का दिल जीत लिया।"
Answer:
(क) इस पंक्ति का तात्पर्य है कि गलत रास्ते पर चलने वाले व्यक्ति के मन में हमेशा यह खौफ बना रहता है कि भविष्य में उसके साथ भी कोई बुरा बर्ताव कर सकता है। यह डर उसके अपने भीतर के ग्लानि भाव और बुरे कर्मों के कारण जन्म लेता है।
(ख) इस पंक्ति से मेजर ध्यानचंद की महानता और निस्वार्थ भाव का पता चलता है। वे मैदान पर खुद गोल करके सारा श्रेय लेने की बजाय अपने साथियों की मदद करते थे ताकि पूरी टीम मिलकर जीते। उनकी इसी सहयोगात्मक और उदार खेल भावना ने उन्हें पूरी दुनिया में लोकप्रिय बनाया।
In simple words: जो गलत काम करता है वह हमेशा डरा रहता है। वहीं दूसरी तरफ, मेजर ध्यानचंद कभी अकेले जीतना नहीं चाहते थे, वे अपनी टीम के साथियों को साथ लेकर खेलते थे।
Exam Tip: ध्यानचंद जी के चरित्र की विशेषताओं जैसे 'टीम भावना' और 'निस्वार्थ आचरण' को स्पष्ट करने के लिए इस पंक्ति का संदर्भ जरूर दें।
पेज 24 - सोच-विचार के लिए
Question 6. संस्मरण को एक बार फिर से पढ़िए और निम्नलिखित के बारे में पता लगाकर अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए।
(क) ध्यानचंद की सफलता का क्या रहस्य था?
(ख) किन बातों से ऐसा लगता है कि ध्यानचंद स्वयं से पहले दूसरों को रखते थे?
Answer:
(क) मेजर ध्यानचंद की अविश्वसनीय सफलता के पीछे उनकी कड़ी साधना, अद्भुत एकाग्रता, और बेजोड़ खेल भावना थी। वे व्यक्तिगत प्रशंसा के बजाय हमेशा अपनी टीम की विजय को सर्वोपरि मानते थे। उनका मानना था कि आपसी सहयोग और निरंतर अभ्यास ही किसी भी खिलाड़ी की सफलता का एकमात्र मूल मंत्र है।
(ख) ध्यानचंद जी हमेशा खुद अकेले गोल करने के बजाय गेंद को गोल के बिल्कुल निकट ले जाकर अपने साथी खिलाड़ियों को सौंप देते थे ताकि उन्हें गोल करने का श्रेय मिल सके। वे अपनी प्रशंसा की चिंता किए बिना पूरी टीम को आगे बढ़ाने में विश्वास रखते थे, जिससे स्पष्ट होता है कि वे अपने से पहले दूसरों के हित को आगे रखते थे।
In simple words: ध्यानचंद जी की कामयाबी का राज उनकी लगन और टीम के साथ मिलकर खेलना था। वे कभी भी खुद सारा श्रेय नहीं लेना चाहते थे, बल्कि अपने साथियों को गोल करने का मौका देते थे।
Exam Tip: सफलता के रहस्यों की चर्चा करते समय ध्यानचंद जी द्वारा बताए गए तीन महत्वपूर्ण बिंदुओं - लगन, साधना और खेल भावना - का उल्लेख अवश्य करें।
Question 7. "उन दिनों में मैं, पंजाब रेजिमेंट की ओर से खेला करता था।" इस वाक्य को पढ़कर ऐसा लगता है मानो लेखक आपसे यानी पाठक से अपनी यादों को साझा कर रहा है। ध्यान देंगे तो इस पाठ में ऐसी और भी अनेक विशेष बातें आपको दिखाई देंगी। इस पाठ को एक बार फिर से पढ़िए।
(क) अपने-अपने समूह में मिलकर इस संस्मरण की विशेषताओं की सूची बनाइए!
(ख) अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए।
Answer:
मेजर ध्यानचंद द्वारा रचित 'गोल' संस्मरण की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
• प्रेरणा और देशप्रेम: यह संस्मरण पाठकों में देश के प्रति सम्मान और खेल के प्रति सच्ची लगन जगाता है।
• सरल और आत्मीय भाषा: लेखक ने अपनी बात को अत्यंत सहज और बातचीत की शैली में लिखा है, जिससे पाठक स्वयं को उनसे जुड़ा हुआ महसूस करता है।
• सच्ची घटनाओं का चित्रण: इसमें खेल के मैदान के यथार्थ अनुभवों और संघर्षों को ईमानदारी से प्रस्तुत किया गया है।
• नैतिकता और मूल्य: यह पाठ केवल खेल ही नहीं बल्कि जीवन में अनुशासन, धैर्य और क्षमाशीलता का संदेश भी देता है।
In simple words: इस संस्मरण की खास बात यह है कि यह बहुत सरल भाषा में लिखा गया है और इसे पढ़कर हमें अपने देश के लिए कुछ अच्छा करने की प्रेरणा मिलती है।
Exam Tip: संस्मरण विधा की विशेषताओं को लिखते समय आत्मीयता, संवादात्मक शैली और प्रामाणिक संस्मरणों के बिंदुओं को विशेष रेखांकित करें।
पेज 25 - शब्दों के जोड़े, विभिन्न प्रकार के
Question 8. "जैसे-जैसे मेरे खेल में निखार आता गया, वैसे-वैसे मुझे तरक्की भी मिलती गई।" इस वाक्य में 'जैसे-जैसे' और 'वैसे-वैसे' शब्दों के जोड़े हैं जिनमें एक ही शब्द दो बार उपयोग में लाया गया है। ऐसे जोड़ों को 'शब्द-युग्म' कहते हैं। शब्द-युग्म में दो शब्दों के बीच में छोटी-सी रेखा लगाई जाती है जिसे योजक चिह्न कहते हैं। योजक यानी जोड़ने वाला।
(क) आप भी ऐसे पाँच शब्द-युग्म लिखिए जिनमें एक ही शब्द दो बार आया हो।
(ख) "खेल के मैदान में धक्का-मुक्की और नोंक-झोंक की घटनाएँ होती रहती हैं।" इस वाक्य में भी आपको दो शब्द-युग्म दिखाई दे रहे हैं, लेकिन इन शब्द-युग्मों के दोनों शब्द भिन्न-भिन्न हैं, एक जैसे नहीं हैं। आप भी ऐसे पाँच शब्द-युग्म लिखिए जिनमें दोनों शब्द भिन्न-भिन्न हों।
(ग) "हार या जीत मेरी नहीं, बल्कि पूरे देश की है।" "आज मैं जहाँ भी जाता हूँ बच्चे व बूढ़े मुझे घेर लेते हैं।" इन वाक्यों में जिन शब्दों के नीचे रेखा खींची है, उन्हें ध्यान से पढ़िए। हम इन शब्दों को योजक की सहायता से भी लिख सकते हैं, जैसे - हार-जीत, बच्चे-बूढ़े आदि। आप नीचे दिए गए शब्दों को योजक की सहायता से लिखिए -
अच्छा या बुरा | उत्तर और दक्षिण | छोटा या बड़ा | गुरु और शिष्य | अमीर और गरीब | अमृत या विष
Answer:
(क) समान शब्दों वाले पाँच शब्द-युग्म:
1. धीरे-धीरे
2. बार-बार
3. कभी-कभी
4. नया-नया
5. अभी-अभी
(ख) भिन्न शब्दों वाले पाँच शब्द-युग्म:
1. दिन-रात
2. उठना-बैठना
3. आज-कल
4. आना-जाना
5. खाना-पीना
(ग) योजक चिह्न की सहायता से बने युग्म:
• अच्छा या बुरा → अच्छा-बुरा
• उत्तर और दक्षिण → उत्तर-दक्षिण
• छोटा या बड़ा → छोटा-बड़ा
• गुरु और शिष्य → गुरु-शिष्य
• अमीर और गरीब → अमीर-गरीब
• अमृत या विष → अमृत-विष
In simple words: योजक चिह्न (-) की मदद से हम दो शब्दों को मिलाकर एक साथ लिख सकते हैं। ये शब्द या तो बिल्कुल एक जैसे हो सकते हैं या फिर एक-दूसरे से अलग और उल्टे भी हो सकते हैं।
Exam Tip: योजक चिह्न लगाते समय दोनों शब्दों के बीच खाली स्थान (space) न छोड़ें, जैसे 'अमीर-गरीब' लिखना सही तरीका है।
पेज 26 - बात पर बल देना
Question 9. "मैंने तो अपना बदला ले ही लिया है।" "मैंने तो अपना बदला ले लिया है।" इन दोनों वाक्यों में क्या अंतर है? ध्यान दीजिए और बताइए। सही पहचाना। दूसरे वाक्य में एक शब्द कम है। उस एक शब्द के न होने से वाक्य के अर्थ में भी थोड़ा अंतर आ गया है। हम अपनी बात पर बल देने के लिए कुछ विशेष शब्दों का प्रयोग करते हैं जैसे - 'ही', 'भी', 'तो' आदि। पाठ में से इन शब्दों वाले वाक्यों को चुनकर लिखिए। ध्यान दीजिए कि यदि उन वाक्यों में ये शब्द न होते तो उनके अर्थ पर इसका क्या प्रभाव पड़ता।
Answer:
बात पर बल देने वाले निपात शब्दों ('ही', 'भी', 'तो') से युक्त पाठ के कुछ वाक्य निम्नलिखित हैं:
1. खेल में तो यह सब चलता ही है।
2. जिन दिनों हम खेला करते थे, उन दिनों भी यह सब चलता था।
3. मैंने तो अपना बदला ले ही लिया है।
4. अगर तुम मुझे हॉकी नहीं मारते तो शायद मैं तुम्हें दो ही गोल से हराता।
5. सच मानो, बुरा काम करने वाला आदमी हर समय इस बात से डरता रहता है कि उसके साथ भी बुराई की जाएगी।
6. वैसे-वैसे मुझे तरक्की भी मिलती गई।
7. इसका यह मतलब नहीं कि सारे गोल मैं ही करता था।
प्रभाव: यदि इन वाक्यों में से 'ही', 'भी', या 'तो' शब्दों को हटा दिया जाए, तो वाक्यों का अर्थ तो सामान्य रहेगा, लेकिन उनकी बात पर दिया जाने वाला विशेष बल या जोर समाप्त हो जाएगा। इससे वाक्य साधारण लगने लगेंगे और लेखक की भावना की तीव्रता कम हो जाएगी।
In simple words: जब हम 'ही' या 'भी' जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हैं, तो हमारी बात में अधिक वजन आ जाता है। इनके बिना वाक्य बिल्कुल सादे लगते हैं।
Exam Tip: व्याकरण में इन शब्दों को 'निपात' कहा जाता है। इनका मुख्य कार्य वाक्य में किसी बात को अधिक प्रभावशाली बनाना होता है।
Question 10. आपकी बात -
(क) ध्यानचंद के स्थान पर आप होते तो क्या आप भी बदला लेते? यदि हाँ, तो बताइए कि आप बदला किस प्रकार लेते?
(ख) आपको कौन-से खेल और कौन-से खिलाड़ी सबसे अधिक अच्छे लगते हैं? क्यों?
Answer:
(क) यदि मैं मेजर ध्यानचंद के स्थान पर होता, तो मैं भी बदला जरूर लेता, लेकिन मेरा बदला लेने का तरीका हिंसक या द्वेषपूर्ण नहीं होता। मैं खेल के नियमों के भीतर रहकर अपनी पूरी ताकत और खेल कौशल से अधिक से अधिक गोल करके अपनी टीम को जीत दिलाता। यही सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी के लिए बदला लेने का सबसे सही और सम्मानजनक तरीका होता है।
(ख) मुझे क्रिकेट और हॉकी के खेल बहुत पसंद हैं। खिलाड़ियों में मुझे मेजर ध्यानचंद और विराट कोहली सबसे प्रिय हैं। ध्यानचंद जी का खेल के प्रति निस्वार्थ आचरण और कोहली की अद्भुत खेल के प्रति ऊर्जा तथा दृढ़ता मुझे बहुत प्रेरित करती है। ये दोनों खिलाड़ी खेल के प्रति सच्ची लगन और खेल भावना के उत्तम प्रतीक हैं।
In simple words: अगर मैं ध्यानचंद जी की जगह होता, तो गुस्सा करने के बजाय और अच्छे खेल से मैच जीतकर अपना बदला लेता। मुझे मैदान पर हमेशा खेल भावना बनाए रखना पसंद है।
Exam Tip: अपने विचारों को लिखते समय हमेशा सकारात्मक और खेल भावना से ओतप्रोत भाषा का ही प्रयोग करें, जिससे आपका दृष्टिकोण बेहतर साबित हो।
पेज 27 - समाचार-पत्र से
Question 11. समाचार-पत्र से -
(क) क्या आप समाचार-पत्र पढ़ते हैं? समाचार-पत्रों में प्रतिदिन खेल के समाचारों का एक पृष्ठ प्रकाशित होता है। अपने घर या पुस्तकालय से पिछले सप्ताह के समाचार पत्रों को देखिए। अपनी पसंद का एक खेल-समाचार अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए।
(ख) आपको कौन-से खेल और कौन-से खिलाड़ी सबसे अधिक अच्छे लगते हैं? क्यों?
Answer:
(क) हाँ, मैं नियमित रूप से समाचार-पत्र पढ़ता हूँ। पिछले सप्ताह का एक प्रमुख खेल समाचार इस प्रकार है: भारतीय क्रिकेट टीम ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए कड़े मुकाबले में दक्षिण अफ्रीका को रोमांचक फाइनल मैच में सात रनों से पराजित कर टी20 विश्व कप का खिताब अपने नाम कर लिया। पूरे देश में इस ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण जीत की लहर है।
(ख) मुझे हॉकी का खेल और मेजर ध्यानचंद सबसे प्रिय खिलाड़ी लगते हैं। इसका कारण यह है कि ध्यानचंद जी न केवल एक असाधारण खिलाड़ी थे बल्कि वे खेल भावना के भी बेजोड़ प्रतीक थे। उनका अनुशासन और मैदान पर टीम के साथियों के प्रति सहयोगात्मक रवैया हर खेल प्रेमी के लिए अनुकरणीय है।
In simple words: समाचार पत्रों में खेलों का अलग पेज होता है जहाँ हमें ताज़ा खेल समाचार मिलते हैं। मुझे बड़ों के साथ मिलकर खेल देखना और उनके बारे में पढ़ना बहुत अच्छा लगता है।
Exam Tip: समाचार लिखते समय स्थान, दिनांक और मुख्य घटना को संक्षिप्त और स्पष्ट रूप से लिखना सुनिश्चित करें।
Question 12. कुछ लोग प्रतिदिन थोड़ी-थोड़ी बातें किसी स्थान पर लिख लेते हैं। जो वे सोचते हैं, या जो उनके साथ उस दिन हुआ या जो उन्होंने देखा, उसे ईमानदारी से लिख लेते हैं या टाइप कर लेते हैं। इसे डायरी लिखना कहते हैं। क्या आप भी अपने मन की बातों और विचारों को लिखना चाहते हैं? यदि हाँ, तो आज से ही प्रारंभ कर दीजिए -
Answer:
डायरी लिखना एक अत्यंत सुंदर और रचनात्मक अभ्यास है। यह हमें अपने विचारों को व्यवस्थित करने और प्रतिदिन की प्रमुख सीखों को संजोकर रखने का अवसर देता है। प्रतिदिन शाम को सोने से पहले हमें अपने दिनभर के अच्छे अनुभवों, किसी विशेष घटना या अपने लक्ष्यों को अपनी डायरी में लिखना चाहिए। इससे हमारा खुद से परिचय होता है और हमारी लेखन क्षमता में भी उत्तरोत्तर सुधार होता है।
In simple words: रोज़ाना डायरी लिखने से हमारी यादें ताज़ा रहती हैं और हमें अपनी सोच को बेहतर ढंग से कागज़ पर उतारने की आदत हो जाती है। यह एक बहुत अच्छी आदत है।
Exam Tip: डायरी लिखते समय हमेशा तिथि और समय सबसे ऊपर लिखें और अपने विचारों को पूरी ईमानदारी तथा सहजता के साथ अभिव्यक्त करें।
पेज 28 - आज की पहेली और साझी समझ
Question 13. यहाँ एक रोचक पहेली दी गई है। इसमें आपको तीन खिलाड़ी दिखाई दे रहे हैं। आपको पता लगाना है कि कौन-से खिलाड़ी द्वारा गोल किया जाएगा -
Answer:
पहेली के उलझे हुए रास्तों को ध्यान से देखने पर पता चलता है कि केवल लाल रंग की टी-शर्ट पहने हुए खिलाड़ी के पास ही गेंद को गोल पोस्ट तक पहुँचाने का सीधा और खुला हुआ रास्ता है। अतः लाल टी-शर्ट वाली लड़की ही गोल करने में पूरी तरह सफल होगी।
In simple words: तीनों खिलाड़ियों के रास्तों को परखने पर लाल टी-शर्ट वाली लड़की का रास्ता बिना किसी बाधा के सीधे गोल पोस्ट तक जाता है, इसलिए वही गोल करेगी।
Exam Tip: ऐसी पहेलियों को हल करने के लिए प्रत्येक रास्ते को अंत से शुरू करके पीछे की ओर देखने पर सही रास्ता बहुत जल्दी मिल जाता है।
Question 14. साझी समझ -
(क) आपने इस खेल के नियम पढ़कर अच्छी तरह समझ लिए हैं। अब अपने मित्रों के साथ मिलकर 'डाँडी' या 'गोथा' खेल खेलिए।
(ख) आप भी 'डाँडी' या 'गोथा' जैसे अनेक स्वदेशी खेल अपने मित्रों के साथ मिलकर अपने विद्यालय, घर या मोहल्ले में खेलते होंगे। अब आप ऐसे ही किसी एक खेल के नियम इस प्रकार से लिखिए कि उन्हें पढ़कर कोई भी बच्चा उस खेल को समझ सके और खेल सके।
Answer:
(क) छात्र समूह बनाकर पाठ में दिए गए निर्देशों और नियमों के अनुसार अपने मित्रों के साथ मैदान पर 'डाँडी' या 'गोथा' का पारंपरिक खेल खेल सकते हैं। खेल सामग्री के रूप में लकड़ी के डंडे और गेंद का उपयोग करें।
(ख) पारंपरिक खेल 'गिल्ली-डंडा' के नियम:
गिल्ली-डंडा ग्रामीण भारत का एक अत्यंत लोकप्रिय और मनोरंजक पारंपरिक खेल है। इसे खेलने के बुनियादी नियम निम्नलिखित हैं:
• खेल सामग्री: इसके लिए दो लकड़ियों की आवश्यकता होती है - एक लंबा लकड़ी का 'डंडा' और एक छोटी दोनों सिरों से नुकीली 'गिल्ली'।
• गड्ढा और शुरुआत: जमीन पर एक छोटा नाव के आकार का गड्ढा खोदा जाता है। खिलाड़ी गिल्ली को गड्ढे के ऊपर रखकर डंडे से उसे जोर से हवा में उछालता है।
• आउट होना: यदि गिल्ली को हवा में उछालने पर विपक्षी टीम का कोई भी खिलाड़ी उसे सीधे कैच कर लेता है, तो खेलने वाला खिलाड़ी तुरंत आउट हो जाता है। इसके अलावा गिल्ली गिरने के स्थान से गड्ढे की तरफ फेंकने पर यदि गिल्ली डंडे से टकरा जाती है, तब भी खिलाड़ी आउट माना जाता है।
• अंक बनाना: यदि गिल्ली पकड़ी नहीं जाती, तो गड्ढे से गिल्ली गिरने की दूरी को डंडे की लंबाई से मापा जाता है। प्रत्येक डंडे की लंबाई खिलाड़ी के खाते में एक अंक (पॉइंट) जोड़ती है। अंत में सर्वाधिक अंक पाने वाली टीम विजयी घोषित होती है।
In simple words: गिल्ली-डंडा खेलने के लिए एक छोटा गड्ढा बनाकर उस पर गिल्ली रखी जाती है और डंडे से मारा जाता है। जो टीम सबसे दूर गिल्ली पहुँचाकर ज़्यादा अंक बनाती है, वह जीत जाती है।
Exam Tip: किसी भी स्वदेशी खेल के नियम लिखते समय खिलाड़ियों की संख्या, आवश्यक खेल सामग्री, खेलने का सही तरीका और आउट होने की शर्तों को स्पष्ट शीर्षकों में लिखना चाहिए।
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