NCERT Solutions for Class 6 Hindi Chapter 10 परीक्षा

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Detailed Chapter 10 परीक्षा NCERT Solutions for Class 6 Hindi

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Class 6 Hindi Chapter 10 परीक्षा NCERT Solutions PDF

पेज 128 - मेरी समझ से

 

Question 1. महाराज ने दीवान को ही उनका उत्तराधिकारी चुनने का कार्य उनके किस गुण के कारण सौंपा?
- सादगी
- उदारता
- बल
- नीतिकुशलता
Answer: नीतिकुशलता
In simple words: महाराज अपने दीवान की समझदारी और चतुर न्यायप्रियता पर पूरा भरोसा करते थे, इसलिए उन्होंने नया दीवान चुनने की जिम्मेदारी उन्हें ही दी।

Exam Tip: सुजानसिंह के चालीस वर्षों के सफल कार्यकाल और उनकी निर्णय क्षमता को ध्यान में रखकर इस प्रश्न का उत्तर 'नीतिकुशलता' चुनें।

 

Question 2. दीवान साहब द्वारा नौकरी छोड़ने के निश्चय का क्या कारण था?
- परमात्मा की याद
- राज-काज सँभालने योग्य शक्ति न रहना
- बदनामी का भय
- चालीस वर्ष की नौकरी पूरा हो जाना
Answer: राज-काज सँभालने योग्य शक्ति न रहना
In simple words: दीवान साहब की उम्र अब बहुत बढ़ चुकी थी और वे शारीरिक रूप से इतने बड़े राज्य का काम संभालने में खुद को कमजोर महसूस कर रहे थे।

Exam Tip: वृद्धावस्था और गिरते स्वास्थ्य के कारण कार्यक्षमता में आई कमी को नौकरी छोड़ने का मुख्य कारण मानें।

 

Question 3. अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुनें?
Answer: बातचीत करने के बाद हमने पहले प्रश्न का उत्तर 'नीतिकुशलता' चुना क्योंकि महाराज सुजानसिंह अपने दीवान के अद्भुत कौशल और निर्णय क्षमता को बहुत बेहतर ढंग से जानते थे। उन्हें विश्वास था कि दीवान साहब बिना किसी भेदभाव के राज्य के लिए सबसे योग्य उम्मीदवार की खोज कर सकेंगे। दूसरे प्रश्न का उत्तर 'राज-काज सँभालने योग्य शक्ति न रहना' इसलिए चुना क्योंकि दीवान साहब की उम्र अब ढलने लगी थी और वे शारीरिक रूप से इतना भारी दायित्व संभालने में स्वयं को असमर्थ पा रहे थे।
In simple words: दीवान साहब बहुत बुद्धिमान थे पर अब वे बूढ़े हो गए थे और उनसे काम नहीं संभल रहा था, इसीलिए महाराज ने उन्हें नया दीवान ढूँढ़ने को कहा।

Exam Tip: ऐसे वैचारिक प्रश्नों में अपने तर्कों को प्रमाणित करने के लिए पाठ की मुख्य घटनाओं का संदर्भ अवश्य दें।

 

Question 4. आपने जो कहानी पढ़ी है, इसका नाम प्रेमचंद ने 'परीक्षा' रखा है। अपने समूह में चर्चा करके लिखिए कि उन्होंने इस कहानी का यह नाम क्यों दिया होगा? अपने उत्तर के कारण भी लिखिए।
Answer: लेखक मुंशी प्रेमचंद जी ने इस कहानी को 'परीक्षा' नाम इसलिए दिया है क्योंकि संपूर्ण कथानक उम्मीदवारों के आंतरिक आचरण की परख पर आधारित है। यहाँ केवल किताबी ज्ञान, शारीरिक शक्ति या चतुराई की जाँच नहीं की जा रही थी, बल्कि संकट के समय किसी व्यक्ति की सच्ची संवेदनशीलता, निस्वार्थ सेवा भाव और मानवीय गुणों का परीक्षण किया जा रहा था। जब एक गरीब किसान की गाड़ी नाले में फंसी, तो सुजानसिंह ने केवल सुजानसिंह के रूप में नहीं बल्कि एक परीक्षक के रूप में यह देखा कि कौन सा उम्मीदवार दूसरों की मदद के लिए आगे आता है। अतः यह नाम कहानी के मुख्य संदेश और घटनाक्रम के सर्वथा अनुकूल है।
In simple words: इस कहानी में नए दीवान को चुनने के लिए सभी लोगों के दिल और उनकी अच्छाई का इम्तिहान लिया गया था, इसलिए इसका नाम 'परीक्षा' रखा गया।

Exam Tip: कहानी का शीर्षक हमेशा उसके मुख्य उद्देश्य को दर्शाता है, इसलिए उत्तर में 'मानवीय मूल्यों की परीक्षा' बिंदु को अवश्य रेखांकित करें।

 

Question 5. यदि आपको इस कहानी को कोई अन्य नाम देना हो तो क्या देंगे? आपने यह नाम क्यों सोचा, यह भी बताइए?
Answer: इस कहानी को यदि हमें कोई अन्य शीर्षक देना हो, तो हम 'सच्ची इंसानियत' या 'चरित्र की परख' नाम दे सकते हैं। इस नाम को सोचने का कारण यह है कि कहानी के अंत में दीवान पद के लिए उसी युवक का चयन किया जाता है जो एक लाचार और दीन-दुखी व्यक्ति की सहायता के लिए निस्वार्थ भाव से आगे बढ़ता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि ऊंचे पदों पर बैठने वाले व्यक्तियों में विद्या और बल से भी बढ़कर दयालुता, परोपकार और सच्ची इंसानियत की भावना होना सबसे आवश्यक है।
In simple words: हम इसका नाम 'असली इंसान' भी रख सकते हैं क्योंकि यह कहानी हमें सिखाती है कि केवल डिग्री से नहीं बल्कि अच्छे काम से ही इंसान बड़ा बनता है।

Exam Tip: नया शीर्षक सुझाते समय उसके पीछे का तार्किक कारण बहुत स्पष्ट और कहानी के अनुकूल होना चाहिए।

 

पेज 129 - पंक्तियों पर चर्चा और सोच-विचार

 

Question 6. कहानी में से चुनकर यहाँ कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए -
"इस पद के लिए ऐसे पुरुष की आवश्यकता थी, जिसके हृदय में दया हो और साथ-साथ आत्म-बल। हृदय वह जो उदार हो, आत्म-बल वह जो आपत्ति का वीरता के साथ सामना करे। ऐसे गुणवाले संसार में कम हैं और जो हैं, वे कीर्ति और मान के शिखर पर बैठे हुए हैं।"

Answer: इन पंक्तियों से यह स्पष्ट होता है कि दीवान जैसे बड़े प्रशासनिक पद को संभालने के लिए व्यक्ति में केवल किताबी ज्ञान होना ही पर्याप्त नहीं है। इसके लिए एक ऐसे संवेदनशील मनुष्य की आवश्यकता थी जिसके भीतर दीन-दुखियों के प्रति करुणा और दया का वास हो, और साथ ही विपरीत परिस्थितियों में साहस न खोने वाला अदम्य आत्मबल हो। संकट के समय साहस के साथ सही निर्णय लेने वाले लोग इस संसार में बहुत विरले होते हैं और ऐसे ही महान व्यक्ति समाज में सदैव आदरणीय और गौरवशाली स्थान प्राप्त करते हैं।
In simple words: बड़े पदों पर बैठने वाले इंसान के दिल में गरीबों के लिए दया होनी चाहिए और मुश्किलों से लड़ने की हिम्मत भी होनी चाहिए। ऐसे लोग बहुत महान होते हैं।

Exam Tip: 'दया' और 'आत्मबल' के आपसी संबंध को इस उत्तर में प्रमुखता से दर्शाएं, क्योंकि ये दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं।

 

Question 7. कहानी को एक बार फिर से पढ़िए, निम्नलिखित के बारे में पता लगाइए और अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए -
(क) नौकरी की चाह में आए लोगों ने नौकरी पाने के लिए कौन-कौन से प्रयत्न किए?

Answer: दीवान बनने की लालसा में आए उम्मीदवारों ने स्वयं को श्रेष्ठ साबित करने के लिए विभिन्न प्रकार के दिखावे किए। जिन लोगों को पढ़ने का कोई शौक नहीं था, वे भी दिन-रात बड़े-बड़े धार्मिक और दार्शनिक ग्रंथों को पढ़ने का ढोंग करने लगे। सभी लोग अत्यंत सज्जन और सदाचारी होने का नाटक कर रहे थे, यहाँ तक कि वे अपने नौकरों से भी अत्यधिक आदर और सम्मान सूचक शब्दों के साथ बात कर रहे थे। प्रत्येक व्यक्ति अपने अवगुणों को छिपाकर स्वयं को दया, धर्म और नम्रता की साक्षात प्रतिमूर्ति दिखाने का पूरा प्रयास कर रहा था।
In simple words: नौकरी पाने के लिए सब लोग अच्छे बनने का नाटक कर रहे थे। जो कभी नहीं पढ़ते थे, वे भी मोटी-मोटी किताबें लेकर बैठ गए और नौकरों से भी मीठा बोलने लगे।

Exam Tip: उम्मीदवारों के इस बनावटी व्यवहार को 'पाखंड' और 'दिखावा' जैसे उपयुक्त शब्दों से स्पष्ट करें।

 

पेज 130 - खोजबीन और समस्या-समाधान

 

Question 8. "उसे किसान की सूरत देखते ही सब बातें ज्ञात हो गईं।" खिलाड़ी को कौन-कौन सी बातें पता चल गईं?

Answer: जैसे ही उस परोपकारी खिलाड़ी युवक ने उस किसान को देखा, तो उसे तुरंत समझ में आ गया कि यह लाचार वृद्ध व्यक्ति बहुत समय से इस कीचड़ भरे नाले में अपनी बैलगाड़ी निकालने का असफल प्रयास कर रहा है। वह थका-हारा और निराश खड़ा था तथा संकोच व बेबसी के कारण किसी अन्य व्यक्ति से सहायता माँगने की स्थिति में भी नहीं था।
In simple words: खिलाड़ी समझ गया कि वह बूढ़ा किसान बहुत देर से कीचड़ में फंसा हुआ है और परेशान होने के बाद भी किसी से मदद नहीं मांग पा रहा है।

Exam Tip: खिलाड़ी की संवेदनशीलता और उसकी तीव्र परखने की क्षमता को उत्तर का मुख्य आधार बनाएं।

 

Question 9. "मगर उन आँखों में सत्कार था, इन आँखों में ईर्ष्या।" किनकी आँखों में सत्कार था और किनकी आँखों में ईर्ष्या थी? क्यों?

Answer: कहानी के अंत में जब पंडित जानकीनाथ को नया दीवान घोषित किया गया, तब रियासत के आम नागरिकों, दीवान सुजानसिंह और महाराज की आँखों में उनके प्रति अत्यधिक आदर और सत्कार का भाव था क्योंकि वे उनकी निस्वार्थ सेवा और उदारता से बहुत प्रभावित थे। इसके विपरीत, अन्य असफल उम्मीदवारों की आँखों में जलन और ईर्ष्या का भाव था क्योंकि वे स्वयं को जानकीनाथ से अधिक योग्य और चतुर मान रहे थे तथा अपनी असफलता को स्वीकार नहीं कर पा रहे थे।
In simple words: राजा और अच्छे लोगों की आँखों में नए दीवान के लिए आदर था, पर जो बाकी घमंडी उम्मीदवार हार गए थे, उनकी आँखों में जलन थी।

Exam Tip: 'सत्कार' और 'ईर्ष्या' के अंतर को स्पष्ट करते हुए सच्चे चरित्र और बनावटी आचरण के परिणाम को दर्शाएं।

 

Question 10. कहानी में से वे वाक्य खोजकर लिखिए जिनसे पता चलता है कि -
(क) शायद युवक बूढ़े किसान की असलियत पहचान गया था।

Answer: कहानी में वह वाक्य जिससे यह संकेत मिलता है कि युवक को किसान के वास्तविक रूप पर संदेह हो गया था, इस प्रकार है: "युवक ने उसकी ओर तीव्र दृष्टि से देखा। उसके मन में एक संदेह अंकुरित हुआ, कहीं यह सुजानसिंह तो नहीं हैं? आवाज़ और रंग-रूप दोनों ही उनसे मिलते-जुलते प्रतीत हो रहे थे।"
In simple words: जब बूढ़े किसान ने युवक को आशीर्वाद दिया, तब युवक ने ध्यान से देखकर शक किया कि कहीं ये भेष बदलकर आए दीवान सुजानसिंह तो नहीं हैं।

Exam Tip: पुस्तक में प्रयुक्त सटीक शब्दों को उद्धृत करने से उत्तर की गुणवत्ता बहुत बढ़ जाती है।

 

Question 11. कहानी में से वे वाक्य खोजकर लिखिए जिनसे पता चलता है कि -
(ख) नौकरी के लिए आए लोग किसी तरह बस नौकरी पा लेना चाहते थे।

Answer: इस बात को दर्शाने वाला मुख्य गद्यांश पाठ में इस प्रकार वर्णित है: "प्रत्येक मनुष्य अपने वास्तविक रूप को छिपाने और स्वयं को गुणवान सिद्ध करने का ढोंग कर रहा था। इस बनावटी आचरण का केवल एक ही उद्देश्य था - किसी भी प्रकार से इस सम्मानित पद को पा लेना।"
In simple words: हर आदमी खुद को बहुत भला और धार्मिक दिखाने की कोशिश में लगा हुआ था ताकि उसे कैसे भी दीवान की नौकरी मिल जाए।

Exam Tip: इस उत्तर में उम्मीदवारों की स्वार्थी मनोवृत्ति और दिखावे के प्रयास को रेखांकित करें।

 

Question 12. इस कहानी में कुछ समस्याएँ हैं और उनके समाधान भी हैं। कहानी को एक बार फिर से पढ़कर बताइए कि -
(क) महाराज के सामने क्या समस्या थी? उन्होंने इसका क्या समाधान खोजा?

Answer: देवगढ़ रियासत के महाराज के समक्ष सबसे बड़ी समस्या यह थी कि जब उनके परम योग्य और वफादार दीवान सुजानसिंह ने वृद्धावस्था के कारण सेवामुक्त होने की इच्छा जताई, तो उनके स्थान पर किसी अन्य उपयुक्त और कर्तव्यनिष्ठ उत्तराधिकारी का चयन कैसे किया जाए। इस गंभीर समस्या का समाधान निकालने के लिए महाराज ने स्वयं सुजानसिंह को ही यह जिम्मेदारी सौंप दी कि वे अपनी नीतिकुशलता से राज्य के लिए एक नया और योग्य दीवान ढूंढें।
In simple words: महाराज परेशान थे कि सुजानसिंह जैसा ईमानदार दीवान कहाँ से लाएँ, इसलिए उन्होंने सुजानसिंह को ही अपने जैसा नया दीवान ढूँढ़ने का काम सौंप दिया।

Exam Tip: महाराज के विश्वास और सुजानसिंह की जिम्मेदारी को इस उत्तर में मुख्य आधार बनाएं।

 

पेज 131 - दीवान की समस्या और विपरीतार्थक शब्द

 

Question 13. इस कहानी में कुछ समस्याएँ हैं और उनके समाधान भी हैं। कहानी को एक बार फिर से पढ़कर बताइए कि -
(ख) दीवान के सामने क्या समस्या थी? उन्होंने इसका क्या समाधान खोजा?

Answer: दीवान सुजानसिंह के सामने मुख्य समस्या यह थी कि वे बढ़ती उम्र और कमजोर होते स्वास्थ्य के कारण अब राज-काज का भारी बोझ उठाने में असमर्थ महसूस कर रहे थे और गरिमापूर्ण तरीके से इस पद से निवृत्त होना चाहते थे। जब महाराज ने नए दीवान को चुनने का दायित्व भी उन्हें ही दे दिया, तो सुजानसिंह ने इस कठिन कार्य का एक अनूठा समाधान निकाला। उन्होंने समाचार पत्रों में विज्ञापन देकर देश भर के युवकों को देवगढ़ बुलाया और एक महीने तक उनके आचरण की गुपचुप परीक्षा लेने की योजना बनाई।
In simple words: दीवान साहब बूढ़े हो गए थे और आराम करना चाहते थे। नए दीवान को ढूँढ़ने के लिए उन्होंने अख़बार में विज्ञापन देकर सबकी गुप्त परीक्षा लेने का फैसला किया।

Exam Tip: सुजानसिंह के अनूठे परीक्षा के विचार और उनकी बुद्धिमानी को उत्तर में प्रमुख स्थान दें।

 

Question 14. इस कहानी में कुछ समस्याएँ हैं और उनके समाधान भी हैं। कहानी को एक बार फिर से पढ़कर बताइए कि -
(ग) नौकरी के लिए आए लोगों के सामने क्या समस्या थी? उन्होंने इसका क्या समाधान खोजा?

Answer: नौकरी की चाह में देवगढ़ आए उम्मीदवारों के सामने मुख्य समस्या यह थी कि उन्हें दीवान सुजानसिंह की कड़ी कसौटी पर स्वयं को खरा और अत्यंत गुणवान सिद्ध करना था। इस परीक्षा में सफल होने के लिए उन्होंने अपने वास्तविक स्वभाव को पूरी तरह दबा लिया और दिन-रात धर्म ग्रंथों के अध्ययन, बनावटी नम्रता, अत्यधिक सदाचार तथा समाज सेवा का स्वांग रचना शुरू कर दिया।
In simple words: उम्मीदवारों के सामने समस्या खुद को सबसे अच्छा साबित करने की थी, जिसके लिए उन्होंने अपनी असलियत छुपाकर बहुत सज्जन और धार्मिक होने का नाटक किया।

Exam Tip: इस उत्तर में उम्मीदवारों की बनावटी जीवनशैली और सुजानसिंह की पारखी नजर के बीच के द्वंद्व को स्पष्ट करें।

 

Question 15. विपरीतार्थक शब्द -
स्तंभ 1 | स्तंभ 2
1. आना → जाना
2. गुण → अवगुण
3. आदर → अनादर
4. स्वस्थ → अस्वस्थ
5. कम → अधिक
6. दयालु → निर्दयी
7. योग्य → अयोग्य
8. हार → जीत
9. आशा → निराशा

Answer:
विलोम शब्दों का सही मिलान इस प्रकार है:
• आना ↔ जाना
• गुण ↔ अवगुण
• आदर ↔ अनादर
• स्वस्थ ↔ अस्वस्थ
• कम ↔ अधिक
• दयालु ↔ निर्दयी
• योग्य ↔ अयोग्य
• हार ↔ जीत
• आशा ↔ निराशा

In simple words: इस अभ्यास में हमने कुछ शब्दों के बिल्कुल उल्टे अर्थ वाले शब्दों (विलोम शब्द) को आपस में मिलाया है, जैसे हार का जीत और आदर का अनादर।

Exam Tip: विलोम शब्द लिखते समय तत्सम का विलोम तत्सम और तद्भव का विलोम तद्भव ही लिखना व्याकरण की दृष्टि से सही होता है।

 

पेज 132 - अनुमान या कल्पना से

 

Question 16. अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए -
(क) "दूसरे दिन देश के प्रसिद्ध पत्रों में यह विज्ञापन निकला" - देश के प्रसिद्ध पत्रों में नौकरी का विज्ञापन किसने निकलवाया होगा? आपको ऐसा क्यों लगता है?

Answer: यह विज्ञापन देवगढ़ रियासत के अनुभवी और चतुर दीवान सरदार सुजानसिंह द्वारा जारी करवाया गया होगा। हमें ऐसा इसलिए लगता है क्योंकि महाराज ने अपनी रियासत के नए दीवान को चुनने का संपूर्ण दायित्व और अधिकार केवल सुजानसिंह को ही सौंपा था। सुजानसिंह एक ऐसी परीक्षा आयोजित करना चाहते थे जिसमें केवल चुनिंदा लोग नहीं बल्कि देश भर का कोई भी प्रतिभावान युवक भाग ले सके।
In simple words: यह विज्ञापन पुराने दीवान सुजानसिंह ने ही निकलवाया होगा क्योंकि राजा ने नया दीवान ढूँढ़ने की पूरी जिम्मेदारी उन्हीं को दी थी।

Exam Tip: दीवान सुजानसिंह की जिम्मेदारी और उनकी योजना को इस उत्तर का मुख्य आधार बनाएं।

 

Question 17. "इस विज्ञापन ने सारे मुल्क में तहलका मचा दिया" - विज्ञापन ने पूरे देश में तहलका क्यों मचा दिया होगा?

Answer: इस अनूठे विज्ञापन ने पूरे देश में खलबली इसलिए मचा दी क्योंकि देवगढ़ रियासत का दीवान पद अत्यंत प्रतिष्ठित, प्रभावशाली और ऐश्वर्यपूर्ण था। सबसे आश्चर्यजनक बात यह थी कि इस ऊंचे पद के लिए किसी विशेष डिग्री या शैक्षणिक योग्यता की बंदिश नहीं रखी गई थी। केवल उत्तम और परोपकारी चरित्र को ही कसौटी माना गया था। इस स्वर्ण अवसर को पाकर देश भर के हजारों युवक अपनी किस्मत आजमाने के लिए देवगढ़ की ओर दौड़ पड़े।
In simple words: दीवान का पद बहुत बड़ा और ठाठ-बाठ वाला था, और इसके लिए किसी बड़ी डिग्री की भी जरूरत नहीं थी, इसलिए यह विज्ञापन पढ़कर पूरे देश के लोग हैरान रह गए।

Exam Tip: विज्ञापन की शर्तों (विशेष रूप से शैक्षणिक योग्यता की छूट) को तहलका मचने का मुख्य कारण बताएं।

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