NCERT Solutions Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 01 सत्यं शिवं सुन्दरं संस्कृतम्

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Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 01 सत्यं शिवं सुन्दरं संस्कृतम् NCERT Solutions PDF

अभ्यासाद् जायते सिद्धिः

 

Question 1. छात्राः मिलित्वा पृथक् पृथक् पञ्चानां छात्राणां लघुसमूहान् निर्माय यति-गति-लयपूर्वकं गीतगानस्य अभ्यासं करिष्यन्ति ।
Answer:
चरण १ - समूह निर्माण (यदि कक्षा में ३० छात्र हैं तो):
• समूह १ - छात्र १, २, ३, ४, ५ - श्लोक १ गाएँगे
• समूह २ - छात्र ६, ७, ८, ९, १० - श्लोक २ गाएँगे
• समूह ३ - छात्र ११, १२, १३, १४, १५ - श्लोक ३ गाएँगे
• समूह ४ - छात्र १६, १७, १८, १९, २० - श्लोक ४ गाएँगे
• समूह ५ - छात्र २१, २२, २३, २४, २५ - श्लोक ५ गाएँगे
• समूह ६ - छात्र २६, २७, २८, २९, ३० - श्लोक ६ गाएँगे

चरण २ - यति, गति, लय का अर्थ:
• यति का अर्थ है रुकने का स्थान। पंक्ति के अन्त में थोड़ा रुकना होता है।
• गति का अर्थ है बोलने की गति। न बहुत तेज़, न बहुत धीमा - मध्यम गति सबसे उचित है।
• लय का अर्थ है ताल यानी Rhythm। एक समान सुर में सभी साथ बोलें।

चरण ३ - उदाहरण (श्लोक १):
गलत तरीका: बिना रुके सब एक साथ तेज़ बोलना जैसे - भारतीयैकतासाधकंसंस्कृतम्भारतीयत्वसम्पादकंसंस्कृतम् (यह गलत है)
सही तरीका: यति-गति-लय के साथ इस प्रकार बोलें -
भारतीयैकतासाधकं (यहाँ थोड़ा रुकें)
संस्कृतम् (धीरे और स्पष्ट, सब मिलकर एक स्वर में)
भारतीयत्वसम्पादकं (यहाँ थोड़ा रुकें)
संस्कृतम् (धीरे और स्पष्ट, सब मिलकर एक स्वर में)
ज्ञानपुञ्जप्रभादर्शकं (यहाँ थोड़ा रुकें)
संस्कृतम् (धीरे और स्पष्ट, सब मिलकर एक स्वर में)
सर्वदानन्दसन्दोहदं (यहाँ थोड़ा रुकें)
संस्कृतम् ॥ १ ॥ (पूरा रुकें, श्लोक समाप्त, सब जोर से बोलें)

चरण ४ - समूह में प्रत्येक छात्र की भूमिका:
• छात्र १ (नेता) - लय शुरू करे, पहली पंक्ति बोले और बाकी को संकेत दे।
• छात्र २ - दूसरी पंक्ति बोले।
• छात्र ३ - तीसरी पंक्ति बोले।
• छात्र ४ - चौथी पंक्ति बोले।
• छात्र ५ - “संस्कृतम्” शब्द पर सब को एक साथ मिलाए।

चरण ५ - अभ्यास के चरण:
• पहले सब मिलकर एक बार धीमी गति से पढ़ें।
• फिर एक छात्र आगे की पंक्ति बोले और बाकी चार उसे दोहराएँ।
• फिर सभी पाँचों मिलकर लय में गाएँ।
• अंत में सभी समूह बारी-बारी से अपना-अपना श्लोक कक्षा में प्रस्तुत करें।
In simple words: इस प्रश्न में छात्रों को पांच-पांच के समूहों में विभाजित होकर यति (विराम), गति (रफ़्तार) और लय (सुर) का ध्यान रखते हुए श्लोकों के गायन का अभ्यास करने की विधि बताई गई है।

Exam Tip: श्लोकों के गायन और वाचन में 'यति' (विराम) का विशेष महत्व होता है। श्लोक को बिना रुके एक साँस में बोलने के बजाय अर्थ के अनुसार यति का पालन करें।

 

Question 2. एकपदेन उत्तरं लिखत –
(क) संस्कृतं कस्याः साधकम्?
(ख) सर्वदा संस्कृतं कस्य सन्दोहदम्?
(ग) संस्कृतं कस्य प्रेरणादायकम्?
(घ) संस्कृतं कासां परिष्कारकम्?
(ङ) कस्य विस्तारकं संस्कृतम्?
Answer:
(क) भारतीयैकतायाः
(ख) आनन्दस्य
(ग) सत्यपथस्य
(घ) सर्ववाणीनाम्
(ङ) विश्वबन्धुत्वस्य
In simple words: इस प्रश्न में दिए गए संक्षिप्त प्रश्नों के उत्तर एक शब्द में दिए गए हैं, जो संस्कृत भाषा की महत्ता, जैसे एकता, आनंद, सत्य मार्ग और विश्वबंधुत्व को बढ़ावा देने की क्षमता को दर्शाते हैं।

Exam Tip: एक शब्द वाले उत्तरों में लिंग, विभक्ति और वचन का विशेष ध्यान रखें। जैसे 'कस्याः' षष्ठी विभक्ति स्त्रीलिंग है, इसलिए उत्तर 'भारतीयैकतायाः' भी षष्ठी स्त्रीलिंग में होगा।

 

Question 3. अधोलिखितप्रश्नानाम् उत्तराणि पूर्णवाक्येन लिखत –
(क) सर्वतः कस्याः संस्थापकं संस्कृतम्?
(ख) कीदृशं व्रतं संस्कृतम्?
(ग) कयोः सम्मेलनं संस्कृतम्?
(घ) संस्कृतं कस्य चमत्कारकम्?
(ङ) कषां यशः स्मारकं संस्कृतम्?
Answer:
(क) संस्कृतभाषा सर्वत्र शान्तिस्थापिका अस्ति। (संस्कृत हर जगह शांति की स्थापना करने वाली है।)
(ख) त्यागस्य, सन्तोषस्य, लोकसेवावृत्तेः च पावनं व्रतं संस्कृतम् अस्ति। (त्याग, संतोष और परोपकार के पवित्र व्रत का स्वरूप संस्कृत है।)
(ग) ज्ञानस्य विज्ञानस्य च दिव्यमेलनं संस्कृतं वर्तते। (ज्ञान और विज्ञान का पवित्र संगम संस्कृत भाषा है।)
(घ) संसारस्य जनानां चेतनां विस्मितं कर्तुं संस्कृतभाषा समर्था अस्ति। (विश्व के लोगों की चेतना और बुद्धि को चकित करने की अद्भुत क्षमता संस्कृत में है।)
(ङ) अस्माकं पूर्वपुरुषाणां कीर्तेः अनुपमं स्मारकं संस्कृतम् अस्ति। (हमारे महान पूर्वजों के यश और गौरव का अनुपम स्मारक संस्कृत है।)
In simple words: इस प्रश्न में पूर्ण वाक्य में उत्तर दिए गए हैं, जिसमें बताया गया है कि संस्कृत सर्वत्र शांति स्थापित करती है, यह त्याग, संतोष और सेवा का प्रतीक है, इसमें ज्ञान-विज्ञान का मेल है, यह संपूर्ण विश्व के चित्त को चमत्कृत करती है और पूर्वजों के यश का स्मारक है।

Exam Tip: पूर्ण वाक्य में उत्तर देते समय प्रश्नवाचक पदों को हटाकर उनके स्थान पर विभक्ति के अनुसार उचित उत्तर पदों का ही प्रयोग करें।

 

Question 4. रिक्तस्थानानि पूरयन्तु –
यथा - सर्वभूतैकता-कारकं संस्कृतम् ।
(क) ............. सम्पादकं संस्कृतम् ।
(ख) ............. दर्शकं संस्कृतम् ।
(ग) ............. संस्कारकं संस्कृतम् ।
(घ) कर्मदं ............. भक्तिदं संस्कृतम् ।
(ङ) सत्यनिष्ठं ............. संस्कृतम् ।
(च) शब्दलालित्य ............. संस्कृतम् ।
Answer:
(क) भारतीयत्व
(ख) ज्ञानपुञ्जप्रभा
(ग) सर्वमस्तिष्क
(घ) ज्ञानदं
(ङ) शिवं
(च) लीलावनं
In simple words: इस प्रश्न में पाठ के श्लोकों की पंक्तियों के आधार पर रिक्त स्थानों की पूर्ति की गई है, जो संस्कृत की विशेषताओं (जैसे भारतीयता, ज्ञान का प्रकाश, बुद्धि का संस्कार आदि) को बताती हैं।

Exam Tip: श्लोकों के अंश वाले रिक्त स्थानों को सही से भरने के लिए पाठ के सभी श्लोकों को कंठस्थ (याद) कर लें।

 

Question 5. मञ्जूषायाः पदानि उपयुज्य षड् वाक्यानि रचयत –
मञ्जूषा: वाणीपरिष्कारिका, एकता, सर्वतः, सेवा, सुन्दरम्, पूर्वजानाम्, सत्पथे प्रेरितुम्, विश्वकल्याणाय, त्यागस्य, सन्तोषस्य, विश्वबन्धुत्वविस्तारकम्
यथा - वाणीपरिष्कारिका संस्कृत-भाषा भवति ।
(क)
(ख)
(ग)
(घ)
(ङ)
(च)
Answer:
(क) संस्कृतभाषा सर्वान् जनान् एकतासूत्रे बध्नाति।
(ख) संस्कृतं सर्वस्मिन् संसारे शान्तिं प्रसारयति।
(ग) मानवान् सन्मार्गे प्रेषयितुं संस्कृतं सर्वथा सक्षममस्ति।
(घ) जगतां हिताय संस्कृतसाहित्यं कटिबद्धं वर्तते।
(ङ) त्याग-सन्तोष-सेवाभावानां दिव्यं स्वरूपं संस्कृतमस्ति।
(च) अस्माकं पूर्वजानां यशःकीर्तेः मनोहरं स्मारकं संस्कृतभाषा एव अस्ति।
In simple words: इस प्रश्न में दिए गए संकेत शब्दों (मञ्जूषा) की सहायता से संस्कृत भाषा की प्रशंसा और उसकी खूबियों को बताते हुए छह सुंदर वाक्य बनाए गए हैं।

Exam Tip: वाक्य रचना करते समय कर्ता और क्रिया के पुरुष तथा वचन का सही सामंजस्य (जैसे संस्कृतं... अस्ति/वर्तते) अवश्य बनाए रखें।

 

Question 6. अधोलिखितानां समस्तपदानाम् उदाहरणानुसारं विग्रहं कुरुत –
Answer:

समस्तपदम्विग्रहः
यथा - भारतीयैकतासाधकम्भारतीयैकतायाः साधकम्
(क) ज्ञानपुञ्जप्रभादर्शकम्ज्ञानपुञ्जप्रभायाः दर्शकम्
(ख) सर्ववाणीपरिष्कारकम्सर्ववाणीनां परिष्कारकम्
(ग) विश्वबन्धुत्वविस्तारकम्विश्वबन्धुत्वस्य विस्तारकम्
(घ) सर्वभूतैकताकारकम्सर्वभूतानाम् एकताकारकम्
(ङ) शान्तिसंस्थापकम्शान्तेः संस्थापकम्
(च) ज्ञानविज्ञानसम्मेलनम्ज्ञानस्य विज्ञानस्य च सम्मेलनम्

In simple words: इस प्रश्न में समास के नियमों के अनुसार समस्तपदों का विग्रह करके दिखाया गया है, जो मुख्य रूप से षष्ठी तत्पुरुष और द्वंद्व समास के उदाहरण हैं।

 

Exam Tip: तत्पुरुष समास के विग्रह में पहले पद में उचित विभक्ति (जैसे षष्ठी विभक्ति - 'कस्य' के आधार पर 'विश्वबन्धुत्वस्य') का प्रयोग ध्यान से करें।

 

Question 7. प्रदत्तमञ्जूषातः पर्यायपदानि चित्वा रिक्तस्थाने लिखत –
मञ्जूषा: उल्लासः, किरणः, जगत्, अनुपमा, तेजोराशयः, मानम्
(क) विद्वांसः .................... भवन्ति ।
(ख) सूर्यस्य .................... सर्वेषां प्राणिनां कृते हितकरः भवति ।
(ग) ईश्वरं स्मृत्वा .................... उपजायते ।
(घ) विद्यायाः .................... अजरं भवति ।
(ङ) प्रकृतेः शोभा .................... विद्यते ।
(च) यत्र .................... एकनीडं भवति ।
Answer:
(क) तेजोराशयः
(ख) किरणः
(ग) उल्लासः
(घ) मानम्
(ङ) अनुपमा
(च) जगत्
In simple words: इस प्रश्न में मंजूषा से सही पर्यायवाची शब्दों को चुनकर रिक्त स्थानों में भरा गया है, जो वाक्यों के अर्थ को पूरा करते हैं।

Exam Tip: वाक्यों के अर्थ को समझकर ही सही पर्यायवाची शब्द का चुनाव करें। जैसे 'विद्वांसः' (बहुवचन) के लिए 'तेजोराशयः' (बहुवचन) का प्रयोग उपयुक्त है।

 

Question 8. अधोलिखितानां मेलनं कुरुत –
Answer:

क विशेषणम् / सम्बद्ध पदम्ख विशेष्यम् / पूरक पदम्
(क) भारतीयैकतायाःसाधकम्
(ख) सत्पथेप्रेरणादायकम्
(ग) त्यागसन्तोषसेवारूपम्व्रतम्
(घ) ज्ञानपुञ्जप्रभायाःदर्शकम्
(ङ) विश्वबन्धुत्वस्यविस्तारकम्

In simple words: इस प्रश्न में श्लोक के भावों के अनुसार विशेषण-विशेष्य या सम्बद्ध शब्दों को आपस में सही प्रकार से सुमेलित किया गया है।

 

Exam Tip: परीक्षा में मिलान वाले प्रश्नों को हमेशा आमने-सामने सही उत्तर लिखकर दर्शाएँ, जिससे परीक्षक को अंक देने में सुविधा हो।

 

कवि परिचय एवं काव्य परिचय (पण्डित वासुदेव शास्त्री द्विवेदी)

नामपण्डित वासुदेव शास्त्री द्विवेदी
कार्यक्षेत्रवाराणसी (उत्तर प्रदेश)
संस्थासार्वभौम संस्कृत प्रचार कार्यालय के संस्थापक
सम्पादित पत्रिका'परमार्थसुधा' (प्रसिद्ध संस्कृत पत्रिका)
भाषा-शैलीअत्यन्त सरल, प्रवाहमयी एवं सुबोध संस्कृत
प्रमुख रचनाएँसुरभारतीसन्देशः, स्वर्गीयसंस्कृतकविसम्मेलनम्, भोजराज्ये संस्कृतसाम्राज्यम्, कौत्सस्य गुरुदक्षिणा आदि।

 

पाठ का सार (हिन्दी में)

  • श्लोक १: संस्कृत भाषा भारत की राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करती है, हमारी भारतीयता को निखारती है, ज्ञान की दिव्य आभा दिखाती है और जीवन में सदा आनंद का संचार करती है।
  • श्लोक २: यह पावन भाषा मनुष्य के मस्तिष्क को सुसंस्कृत बनाती है, वाणी को शुद्ध करती है और हमें हमेशा श्रेष्ठ मार्ग (सत्पथ) पर चलने की प्रेरणा देकर उत्तम गुणों से जोड़ती है।
  • श्लोक ३: संस्कृत संपूर्ण संसार में भाईचारे (विश्वबन्धुत्व) की भावना फैलाती है, प्राणिमात्र में एकता लाती है, वैश्विक शांति स्थापित करती है और पंचशील के सिद्धांतों को सुदृढ़ करती है।
  • श्लोक ४: यह भाषा त्याग, संतोष और निःस्वार्थ सेवा के पावन संकल्प का प्रतीक है, जो जन-कल्याण की भावना से ओतप्रोत है और ज्ञान व विज्ञान का अनूठा संगम स्थल है।
  • श्लोक ५: संस्कृत जीवन के चारों पुरुषार्थों - धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को सिद्ध करने का मार्ग प्रशस्त करती है। यह इस लोक और परलोक दोनों में उन्नति प्रदान करती है तथा कर्म, ज्ञान और भक्ति का वरदान देती है।
  • श्लोक ६: यह भाषा मधुर शब्दों और काव्यात्मक सौंदर्य का साक्षात् क्रीड़ा वन है, जो संपूर्ण विश्व के चित्त को आनंदित व आकर्षित करती है तथा हमारे गौरवशाली पूर्वजों की यशस्वी गाथा का अमर स्मारक है।

 

अतिलघूत्तरीय प्रश्नाः (अतिरिक्त प्रश्न)

 

Question 1. अस्य गीतस्य रचयिता कः अस्ति? (इस गीत के रचयिता कौन हैं?)
Answer: अस्य सुमधुरस्य गीतस्य रचयिता पण्डितप्रवरः वासुदेवशास्त्री द्विवेदी महोदयः वर्तते। (इस सुमधुर गीत के रचयिता पंडित वासुदेव शास्त्री द्विवेदी हैं।)
In simple words: इस सुंदर संस्कृत गीत को पंडित वासुदेव शास्त्री द्विवेदी जी ने लिखा है।

Exam Tip: संस्कृत में लेखक का नाम 'वासुदेव-शास्त्रि-द्विवेदिः' अथवा 'वासुदेवशास्त्री द्विवेदी' प्रथम पुरुष एकवचन में सही विभक्ति के साथ लिखें।

 

Question 2. संस्कृतं कस्य सम्पद् अस्ति? (संस्कृत किसकी संपत्ति है?)
Answer: संस्कृतं केवलं कस्यचिद् एकस्य वर्गस्य न, अपितु सम्पूर्णस्य भारतदेशस्य अमूल्या सम्पद् अस्ति। (संस्कृत किसी एक वर्ग की नहीं, बल्कि पूरे भारत देश की अमूल्य संपत्ति है।)
In simple words: संस्कृत भाषा हमारे पूरे भारत देश का अमूल्य खजाना और प्राचीन धरोहर है।

Exam Tip: 'कस्य' के स्थान पर षष्ठी विभक्ति का रूप 'भारतदेशस्य' लिखकर पूर्ण वाक्य में उत्तर दें।

 

Question 3. संस्कृताध्ययनेन मानवः कीदृशः भवति? (संस्कृत के अध्ययन से मनुष्य कैसा बनता है?)
Answer: संस्कृतभाषायाः अध्ययनेन मानवः पूर्णतया सभ्यः सुसंस्कृतः च जायते। (संस्कृत भाषा के अध्ययन से मनुष्य पूरी तरह सभ्य और सुसंस्कृत बनता है।)
In simple words: संस्कृत पढ़ने से इंसान के विचार और संस्कार बहुत अच्छे और सभ्य बनते हैं।

Exam Tip: उत्तर में 'सुसंस्कृतः' विशेषण का प्रयोग अवश्य करें, क्योंकि यह चरित्र की शुद्धि को दर्शाता है।

 

Question 4. संस्कृतं कस्याः साधकम् अस्ति? (संस्कृत किसकी साधक है?)
Answer: संस्कृतम् अस्माकं राष्ट्रस्य अखण्डतायाः अर्थात् भारतीयैकतायाः मुख्यं साधकम् अस्ति। (संस्कृत हमारे देश की अखंडता यानी भारतीय एकता को मजबूत करने वाली मुख्य भाषा है।)
In simple words: संस्कृत भाषा पूरे भारत को एकता के सूत्र में पिरोने का सबसे बड़ा माध्यम है।

Exam Tip: 'कस्याः' स्त्रीलिंग शब्द है, इसलिए उत्तर 'भारतीयैकतायाः' भी षष्ठी स्त्रीलिंग में होगा।

 

Question 5. संस्कृतं सर्वेषां कस्य परिष्कारकम् अस्ति? (संस्कृत सबकी किसका परिष्कार करती है?)
Answer: संस्कृतं सर्वेषां मनुष्याणां वाण्याः परिष्कारकम् अर्थात् मधुरताप्रदायकमस्ति। (संस्कृत सभी मनुष्यों की वाणी को शुद्ध और मधुर बनाने वाली भाषा है।)
In simple words: संस्कृत बोलने और पढ़ने से हमारी बोली (वाणी) साफ, शुद्ध और मीठी हो जाती है।

Exam Tip: 'कस्य' के स्थान पर 'वाण्याः' (वाणी का) का प्रयोग षष्ठी विभक्ति में करें।

 

Question 6. संस्कृतं कस्य प्रेरणादायकम् अस्ति? (संस्कृत किसकी प्रेरणा देती है?)
Answer: संस्कृतं सदा सर्वान् मानवान् कल्याणकारिणः सत्यपथस्य प्रेरणादायकम् अस्ति। (संस्कृत हमेशा सभी मनुष्यों को भलाई और सच्चाई के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।)
In simple words: संस्कृत हमें हमेशा अच्छे और सच्चे रास्ते पर चलने की सीख देती है।

Exam Tip: 'सत्पथस्य' (सच्चे मार्ग का) शब्द को मुख्य उत्तर के रूप में लिखें।

 

Question 7. संस्कृतं कस्य विस्तारकम् अस्ति? (संस्कृत किसका विस्तार करती है?)
Answer: संस्कृतं समस्ते संसारे बन्धुतायाः अर्थात् विश्वबन्धुत्वस्य भावस्य विस्तारकम् अस्ति। (संस्कृत पूरे संसार में भाईचारे यानी विश्व बंधुत्व की भावना का विस्तार करती है।)
In simple words: संस्कृत हमें सिखाती है कि पूरी दुनिया हमारा परिवार है, इस प्रकार यह भाईचारे को बढ़ावा देती है।

Exam Tip: 'कस्य' के स्थान पर 'विश्वबन्धुत्वस्य' शब्द लिखकर वाक्य पूरा करें।

 

Question 8. सर्वतः संस्कृतं कस्याः संस्थापकम् अस्ति? (संस्कृत हर जगह किसकी स्थापना करती है?)
Answer: संस्कृतं सर्वस्मिन् संसारे सुखस्य शान्तेः च स्थायी संस्थापकम् अस्ति। (संस्कृत पूरी दुनिया में सुख और शांति की स्थायी स्थापना करती है।)
In simple words: संस्कृत भाषा संसार में शांति और भाईचारे की नींव रखने वाली है।

Exam Tip: 'कस्याः' के उत्तर में षष्ठी स्त्रीलिंग रूप 'शान्तेः' का प्रयोग करें।

 

Question 9. संस्कृतं कयोः सम्मेलनम् अस्ति? (संस्कृत किन दोनों का सम्मेलन है?)
Answer: संस्कृतभाषायां लौकिकज्ञानस्य तथा च वैज्ञानिकचिन्तनस्य अर्थात् ज्ञानविज्ञानयोः अपूर्वं सम्मेलनं वर्तते। (संस्कृत भाषा में लौकिक ज्ञान और वैज्ञानिक चिंतन यानी ज्ञान-विज्ञान का अनूठा संगम है।)
In simple words: संस्कृत में केवल पूजा-पाठ का ज्ञान नहीं है, बल्कि इसमें आधुनिक विज्ञान और तकनीकी जानकारियाँ भी भरी हैं।

Exam Tip: 'कयोः' द्विवचन है, इसलिए उत्तर 'ज्ञानविज्ञानयोः' भी षष्ठी द्विवचन में होगा।

 

Question 10. संस्कृतं कानि चत्वारि साधनानि प्रयच्छति? (संस्कृत कौन-से चार साधन प्रदान करती है?)
Answer: संस्कृतं मानवकल्याणाय धर्म-अर्थ-काम-मोक्षाख्यं चत्वारि साधनानि (पुरुषार्थान्) ददाति। (संस्कृत मानव कल्याण के लिए धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष रूपी चार साधनों या पुरुषार्थों को प्रदान करती है।)
In simple words: संस्कृत जीवन के चार मुख्य लक्ष्यों - धर्म, अर्थ (पैसा), काम (सुख) और मोक्ष (मुक्ति) को हासिल करने की राह दिखाती है।

Exam Tip: चारों पुरुषार्थों 'धर्मं, कामम्, अर्थं, मोक्षं च' को लिखकर उत्तर पूरा करें।

 

Question 11. संस्कृतं कानि त्रीणि ददाति? (संस्कृत कौन-से तीन तत्व देती है?)
Answer: संस्कृतं जीवनाय सत्कर्म, यथार्थज्ञानं, निश्छल भक्तिं च प्रदाति। (संस्कृत जीवन के लिए अच्छे कर्म, सच्चा ज्ञान और निश्छल भक्ति प्रदान करती है।)
In simple words: यह भाषा हमें सही काम करने की सीख (कर्म), समझदारी (ज्ञान) और भगवान के प्रति प्रेम (भक्ति) प्रदान करती है।

Exam Tip: 'कर्म, ज्ञानं, भक्तिं च' इन तीन तत्वों का नाम स्पष्ट रूप से उल्लेख करें।

 

Question 12. ‘लीलावनम्’ इत्यस्य कः अर्थः? ('लीलावनम्' का क्या अर्थ है?)
Answer: ‘लीलावनम्’ इति पदस्य यथार्थः अर्थः क्रीडायाः मनोहरं उद्यानम् वर्तते। ('लीलावनम्' शब्द का असली अर्थ खेल का सुंदर बगीचा होता है।)
In simple words: 'लीलावनम्' का सीधा मतलब है ऐसा बगीचा या उपवन जहाँ आनंद से खेला और क्रीड़ा की जा सके।

Exam Tip: 'कः' के स्थान पर 'क्रीडायाः उद्यानम्' लिखकर उत्तर पूरा करें।

 

Question 13. संस्कृतं केषाम् यशः स्मारकम् अस्ति? (संस्कृत किसकी यशगाथा का स्मारक है?)
Answer: संस्कृतभाषा अस्माकं गौरवशालिनां पूर्वपुरुषाणां (पूर्वजानां) यशसः दिव्यं स्मारकं वर्तते। (संस्कृत भाषा हमारे गौरवशाली पूर्वजों के यश और सम्मान का दिव्य स्मारक है।)
In simple words: हमारे पूर्वजों ने जो महान उपलब्धियाँ और कीर्ति हासिल की थी, संस्कृत उनकी याद दिलाने वाला एक सुंदर स्मारक है।

Exam Tip: 'केषाम्' बहुवचन पुल्लिंग शब्द है, इसलिए उत्तर 'पूर्वजानाम्' या 'पूर्वपुरुषाणाम्' होगा।

 

Question 14. पण्डितः वासुदेव-शास्त्रि-द्विवेदिः कां संस्कृतपत्रिकां सम्पादयति स्म? (पंडित वासुदेव शास्त्री द्विवेदी किस संस्कृत पत्रिका का संपादन करते थे?)
Answer: पण्डितः वासुदेवशास्त्री द्विवेदी ‘परमार्थसुधा’ इत्याख्यां प्रसिद्धां संस्कृतपत्रिकां सम्पादितवान्। (पंडित वासुदेव शास्त्री द्विवेदी 'परमार्थसुधा' नाम की प्रसिद्ध संस्कृत पत्रिका का संपादन करते थे।)
In simple words: द्विवेदी जी द्वारा सम्पादित की जाने वाली संस्कृत पत्रिका का नाम 'परमार्थसुधा' था।

Exam Tip: पत्रिका का नाम 'परमार्थसुधा' विशेष रूप से रेखांकित करें।

 

Question 15. बौद्धधर्मे नैतिकजीवनस्य पञ्च सिद्धान्ताः केन नाम्ना ज्ञायन्ते? (बौद्ध धर्म में नैतिक जीवन के पाँच सिद्धान्त किस नाम से जाने जाते हैं?)
Answer: बौद्धधर्मे सदाचारस्य नैतिकजीवनस्य च ते पञ्च नियमाः ‘पञ्चशीलम्’ इति नाम्ना प्रसिद्धाः सन्ति। (बौद्ध धर्म में सदाचार और नैतिक जीवन के वे पाँच नियम 'पंचशील' के नाम से प्रसिद्ध हैं।)
In simple words: बौद्ध धर्म में अच्छे आचरण और नैतिक जीवन के पाँच नियमों को 'पंचशील' कहा जाता है।

Exam Tip: 'केन नाम्ना' के स्थान पर 'पञ्चशीलम्' लिखना सर्वाधिक उपयुक्त और संक्षिप्त उत्तर है।

 

लघूत्तरीय प्रश्नाः (अतिरिक्त लघु प्रश्न)

 

Question 1. संस्कृतं भारतस्य सम्पद् कथम् अस्ति? (संस्कृत भारत की संपत्ति किस प्रकार है?)
Answer: संस्कृतभाषा भारतस्य अमूल्या निधिः सम्पत्तिश्च अस्ति। अस्मिन् भारतदेशस्य प्राचीनं ज्ञानवैभवं, विज्ञानं, दर्शनं च सुरक्षितं वर्तते। अस्याः भाषायाः पठनेन मनुष्ये संस्काराणां शुद्धिः भवति। अन्यासां भारतीयभाषाणां समृद्धये तासां मूलाधारस्य संस्कृतस्य अध्ययनम् अनिवार्यं मन्यते। (संस्कृत भारत की संपत्ति है क्योंकि इसमें हमारा सारा प्राचीन ज्ञान-विज्ञान और दर्शन समाया हुआ है। इसके पढ़ने से मनुष्य में उत्तम विचार आते हैं और अन्य भारतीय भाषाओं के सही अध्ययन के लिए भी संस्कृत का ज्ञान ज़रूरी है।)
In simple words: संस्कृत में भारत का सारा प्राचीन ज्ञान-विज्ञान सुरक्षित है, और यह दूसरी भारतीय भाषाओं को भी समृद्ध बनाती है, इसलिए यह देश की अनमोल संपत्ति है।

Exam Tip: उत्तर में संस्कृत के 'ज्ञानवैभव' तथा अन्य भारतीय भाषाओं के लिए उसकी उपयोगिता को संक्षेप में स्पष्ट करें।

 

Question 2. संस्कृतं मस्तिष्कम्य वाण्याः च किं करोति? (संस्कृत मस्तिष्क और वाणी का क्या करती है?)
Answer: संस्कृतभाषा मनुष्याणां बुद्धेः परिष्कारं करोति, चित्तं च सुसंस्कृतं विदधाति। अस्याः पठनेन अस्माकं वाण्यां माधुर्यं शुचिता च समागच्छति। इयं भाषा जनेभ्यः धर्मस्य सत्पथस्य च प्रेरणां दत्त्वा तेषु सुगुणानां सञ्चारं करोति, येन मानवस्य व्यक्तित्वस्य सर्वाङ्गीणः विकासः भवति। (संस्कृत सभी लोगों के मन और मस्तिष्क को शुद्ध करती है, वाणी को परिष्कृत करती है। यह सत्पथ की प्रेरणा देती है और सद्गुणों के समूह को जोड़ती है। इसलिए संस्कृत मनुष्य के व्यक्तित्व के समग्र विकास के लिए उपयोगी है।)
In simple words: संस्कृत हमारे दिमाग को सुसंस्कृत बनाती है, हमारी वाणी को मीठा और शुद्ध करती है, तथा हमें हमेशा अच्छे रास्ते पर चलने की सीख देती है।

Exam Tip: 'मस्तिष्कसंस्कारकम्' और 'वाणीपरिष्कारकम्' इन दो महत्वपूर्ण गुणों को उत्तर में विशेष स्थान दें।

 

Question 3. संस्कृतं विश्वशान्त्यर्थं कथं साधकम् अस्ति? (संस्कृत विश्व शांति के लिए किस प्रकार साधक है?)
Answer: संस्कृतसाहित्यं संसारे भ्रातृभावस्य अर्थात् विश्वबन्धुत्वस्य प्रसारं करोति। इयं भाषा सर्वप्राणिषु अभेदभावं एकतां च शिक्षयति। सर्वत्र शान्तिं सुस्थिरां कर्तुं तथा च पञ्चशीलसिद्धान्तानां प्रतिष्ठापनेन समाजे सदाचारस्य नीतिभावस्य च पोषणं करोति, येन विश्वशान्तिः सुलभा भवति। (संस्कृत विश्व में भाईचारे को बढ़ावा देती है और सभी जीवों में एकता का बोध कराती है। इसके नीतिपूर्ण उपदेश और पंचशील के सिद्धांत समाज में शांति और सदाचार स्थापित करने में मुख्य भूमिका निभाते हैं।)
In simple words: संस्कृत पूरी दुनिया को एक परिवार मानकर भाईचारे की सीख देती है और पंचशील के सिद्धांतों द्वारा संसार में शांति स्थापित करने में सहायक है।

Exam Tip: उत्तर में 'विश्वबन्धुत्व' और 'पञ्चशील' की स्थापना जैसे मुख्य बिन्दुओं को रेखांकित करें।

 

Question 4. ‘त्यागसन्तोषसेवाव्रतं संस्कृतम्’ — अस्य भावः कः? ('त्यागसन्तोषसेवाव्रतं संस्कृतम्' का क्या भाव है?)
Answer: अस्य कथनस्य यथार्थः भावः अस्ति यद् अस्माकं संस्कृतसाहित्यं मानवेभ्यः स्वार्थरहितं त्यागं, जीवनस्य सन्तोषं, प्राणिसेवाप्रवृत्तिं च पाठयति। संस्कृतग्रन्थाः सदा लोककल्याणाय निष्ठां शिक्षयन्ति तथा च ज्ञानविज्ञानयोः सम्यक् मेलनेन जगतः मङ्गलकार्याणि कर्तुं सर्वान् प्रेरयन्ति। (संस्कृत साहित्य हमें स्वार्थहीन त्याग, संतोष और सेवा भाव का पाठ पढ़ाता है। यह संसार की भलाई के लिए ज्ञान और विज्ञान दोनों को मिलाकर काम करने का संदेश देता है।)
In simple words: संस्कृत में त्याग, संतोष और सेवा की बातें समाई हैं, जो हमें दूसरों की मदद करने और अपनी पढ़ाई-लिखाई का उपयोग दुनिया की भलाई के लिए करने की सीख देती हैं।

Exam Tip: 'त्याग, सन्तोष, सेवा' के साथ 'ज्ञान-विज्ञान' के आपसी तालमेल और परोपकार की भावना को उत्तर में शामिल करें।

 

Question 5. संस्कृतं ‘तं सत्यं शिवं सुन्दरम्’ इति कथम् उच्यते? (संस्कृत को 'सत्यं शिवं सुन्दरम्' क्यों कहा जाता है?)
Answer: संस्कृतसाहित्ये केवलं सत्यस्य एव उपदेशः अस्ति, अतः इयं भाषा 'सत्यम्' मन्यते। इयं मानवेभ्यः धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष रूपी पुरुषार्थान् दत्त्वा कल्याणं करोति, अतः इयं 'शिवम्' (कल्याणकारी) वर्तते। शब्दलालित्येन, लालित्यपद्यैः च रमणीया अस्ति, अतः इयं 'सुन्दरम्' अस्ति। एतैः एव कारणैः संस्कृतभाषा 'सत्यं शिवं सुन्दरम्' इति कत्थ्यते। (संस्कृत सच का मार्ग दिखाती है इसलिए 'सत्य' है, चारों पुरुषार्थों को देकर मानव कल्याण करती है इसलिए 'शिव' है, और शब्दों व कविताओं की सुंदरता के कारण 'सुन्दर' है। इसलिए इसे सत्यं शिवं सुन्दरम् कहा जाता है।)
In simple words: संस्कृत सच की राह दिखाती है (सत्य), सबका कल्याण करती है (शिव), और अपनी मीठी कविताओं से मन को खुश करती है (सुन्दर), इसलिए इसे 'सत्यं शिवं सुन्दरम्' कहते हैं।

Exam Tip: सत्य (सत्यनिष्ठा), शिव (कल्याणकारी रूप - चारों पुरुषार्थ) और सुन्दर (काव्य सौंदर्य) का अलग-अलग विश्लेषण करके उत्तर दें।

 

Question 6. पण्डितस्य वासुदेव-शास्त्रि-द्विवेदिनः संस्कृतसेवां वर्णयत। (पंडित वासुदेव शास्त्री द्विवेदी की संस्कृत सेवा का वर्णन कीजिए।)
Answer: पण्डितः वासुदेवशास्त्री द्विवेदी वाराणस्यां सार्वभौमसंस्कृतप्रचारकार्यालयस्य स्थापनां कृत्वा संस्कृतस्य महान् प्रचारं अकरोत्। तेन अतीव सरलसंस्कृतभाषया अनेके ग्रन्थाः रचिताः। संस्कृतभाषायाः विकासाय सः सुप्रसिद्धायाः 'परमार्थसुधा' नामिकायाः पत्रिकायाः अपि दीर्घकालं यावत् सम्पादनं कृतवान्। (द्विवेदी जी ने बनारस में सार्वभौम संस्कृत प्रचार कार्यालय खोला था और संस्कृत को आसान भाषा में लोगों तक पहुँचाने के लिए कई पुस्तकें लिखीं। उन्होंने प्रसिद्ध संस्कृत पत्रिका 'परमार्थसुधा' का संपादन भी किया था।)
In simple words: पंडित वासुदेव शास्त्री जी ने वाराणसी में संस्कृत का दफ़्तर बनाकर इस भाषा का खूब प्रचार किया, आसान पुस्तकें लिखीं और 'परमार्थसुधा' पत्रिका का संपादन किया।

Exam Tip: उत्तर में 'सार्वभौमसंस्कृतप्रचारकार्यालयः' और पत्रिका 'परमार्थसुधा' के नामों का शुद्ध रूप से उल्लेख करें।

 

Question 7. ‘शब्दलालित्यलीलावनं संस्कृतम्’ इत्यस्य भावः कः? ('शब्दलालित्यलीलावनं संस्कृतम्' का क्या भाव है?)
Answer: अस्याः सूक्तेः मुख्यः भावः अस्ति यद् संस्कृतभाषायाः काव्यानि, पद्यानि च अतीव मधुराणि, लालित्यपूर्णानि च सन्ति। इयं भाषा श्रोतुः मनसि आनन्दस्य, शीतलतायाः च सञ्चारं करोति। अस्याः श्रवणेन पठन-पाठनसमये च जनाः अपूर्वं मानसिकं चमत्कारम् आह्लादं च अनुभवन्ति। (इसका भाव है कि संस्कृत के सुंदर और कोमल शब्द कान को बहुत प्यारे लगते हैं। इसकी कविताएँ बहुत मधुर हैं जो सुनने वाले को असीम आनंद और सुख देती हैं।)
In simple words: संस्कृत भाषा के शब्द बहुत मधुर और लयबद्ध हैं, जिन्हें सुनना और पढ़ना किसी सुंदर बगीचे की सैर करने जैसा सुखद और चमत्कारी अनुभव देता है।

Exam Tip: 'लीलावन' (खेलने का बगीचा) की तुलना संस्कृत के मधुर शब्दों और सुंदर कविताओं से करते हुए उत्तर को संक्षेप में लिखें।

 

Question 8. ‘ऐहिकामुष्मिकोत्कर्षदम्’ इत्यस्य भावः कः? ('ऐहिकामुष्मिकोत्कर्षदम्' का क्या भाव है?)
Answer: अस्य पदस्य यथार्थः भावः अस्ति यद् संस्कृतभाषा न केवलं संसारे लौकिकसुखानि, सदाचारपूर्णं जीवनं च ददाति, अपितु परलोके मोक्षप्राप्तये अपि अध्यात्मज्ञानं प्रदाति। अतः एषा भाषा इहलोक-परलोकयोः उभयोः उन्नतये सर्वश्रेष्ठा अस्ति। (इसका भाव है कि संस्कृत इस लोक (धरती) पर सुंदर और संस्कारी जीवन जीने की सीख देती है और परलोक (स्वर्ग/मोक्ष) की प्राप्ति के लिए हमें अध्यात्म का मार्ग दिखाती है।)
In simple words: संस्कृत हमें इस संसार में अच्छे ढंग से जीना भी सिखाती है और मौत के बाद आत्मा की मुक्ति (मोक्ष) पाने का सच्चा ज्ञान भी देती है।

Exam Tip: ऐहिक (इस लोक का विकास) और आमुष्मिक (परलोक या मोक्ष की प्राप्ति) के अलग-अलग अर्थों को स्पष्ट करें।

 

Question 9. बौद्धधर्मस्य पञ्चशीलानि कानि सन्ति? (बौद्ध धर्म के पंचशील कौन-से हैं?)
Answer: बौद्धदर्शने नैतिकजीवनस्य सदाचारस्य च पञ्च नियमाः 'पञ्चशीलम्' इति नाम्ना प्रसिद्धाः सन्ति। ते च इमे सन्ति - १. अस्तेयम् (चोरी न करना), २. अहिंसा (प्राणिहिंसा न करना), ३. ब्रह्मचर्यम्, ४. सत्यम् (सदा सत्य भाषणम्), तथा ५. मादकद्रव्याणां सर्वथा त्यागः। एतेषां पालनेन समाजः स्वस्थः सुखी च भवति। (बौद्ध धर्म के पंचशील हैं: चोरी न करना, किसी जीव को न मारना, मन-इन्द्रियों पर नियंत्रण रखना, सच बोलना और नशीली चीजों से दूर रहना। इनके पालन से इंसान का बहुत भला होता है।)
In simple words: बौद्ध धर्म के पाँच नियम (पंचशील) हैं - चोरी न करना, किसी जीव को दुख न पहुँचाना, सदाचार का पालन करना, सच बोलना और नशे से दूर रहना।

Exam Tip: पंचशील के पाँचों नियमों को बिंदुवार (Point-wise) संस्कृत नाम और हिन्दी अर्थ के साथ सुस्पष्ट तरीके से लिखें।

 

Question 10. ‘भारतीयत्वसम्पादकम्’ इत्यस्य भावः कः? ('भारतीयत्वसम्पादकम्' का क्या भाव है?)
Answer: अस्याः श्लोकपंक्तेः भावः अस्ति यद् संस्कृतं पठित्वा एव वयं स्वदेशस्य गौरवशाली इतिहासम्, आचार-विचारं, आदर्शान् च ज्ञातुं शक्नुमः। अस्याः पठनेन अस्माकं हृदये देशप्रेम, यथार्थं भारतीयत्वं च सम्यक् रूपेण जाग्रतम् उत्पद्यते च। (इसका भाव है कि संस्कृत के अध्ययन से हम भारत की पुरानी परंपराओं, आचार-विचारों और गौरवशाली अतीत को जानते हैं, जिससे हमारे भीतर सच्चे भारतीय होने का गर्व पैदा होता है।)
In simple words: संस्कृत भाषा हमें अपनी पुरानी परंपराओं और आचरणों से जोड़कर हमारे दिल में देशप्रेम और सच्ची भारतीयता की भावना जगाती है।

Exam Tip: 'भारतीयत्व' (भारतीय होने के गुण और गौरव) की उत्पत्ति संस्कृत के अध्ययन से कैसे होती है, इस बात को उत्तर में समझाएं।

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