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Detailed Ganga Chapter 06 रीढ़ की हड्डी NCERT Solutions for Class 9 Hindi
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Class 9 Hindi Ganga Chapter 06 रीढ़ की हड्डी NCERT Solutions PDF
Question 1. एकांकी ‘रीढ़ की हड्डी’ का शीर्षक किसका प्रतीक है?
(क) शरीर के एक आवश्यक अंग का
(ख) व्यक्ति की ऊँचाई के आधार का
(ग) आत्म-सम्मान और नैतिक दृढ़ता का
(घ) शारीरिक शक्ति और परिश्रम का
Answer: (ग) आत्म-सम्मान और नैतिक दृढ़ता का
प्रस्तुत नाटक में 'रीढ़ की हड्डी' मात्र मानव शरीर का एक जैविक अंग नहीं है, बल्कि यह मनुष्य के साहस, स्वाभिमान और सामाजिक अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाने की क्षमता का प्रतीक है। एकांकी की मुख्य पात्र उमा दकियानूसी परंपराओं के समक्ष झुकने से मना कर देती है और लड़के वालों के सामने निडरतापूर्वक अपना पक्ष रखती है। जब विवाह के नाम पर उसे एक निर्जीव वस्तु की भाँति परखा जाता है, तो वह मौन रहने के बजाय उसका मुखर विरोध करती है। अंत में, उसका शंकर के चरित्र की रीढ़ (बैकबोन) पर सवाल उठाना यह प्रमाणित करता है कि यहाँ रीढ़ की हड्डी का आशय मनुष्य के आत्मबल, नैतिक साहस व व्यक्तित्व की दृढ़ता से है।
In simple words: यहाँ 'रीढ़ की हड्डी' का अर्थ मनुष्य के आत्म-सम्मान, हिम्मत और सही बात के लिए खड़े होने के साहस से है, जो केवल शरीर का कोई ढांचा नहीं है।
Exam Tip: शीर्षक के प्रतीकात्मक अर्थ (स्वाभिमान और नैतिक साहस) को उमा के चरित्र के माध्यम से स्पष्ट रूप से समझाएं।
Question 2. ‘रीढ़ की हड्डी’ एकांकी में किस पर व्यंग्य किया गया है?
(क) पात्रों की निर्धनता और लाचारी पर
(ख) पात्रों की भाषा और हास्य पर
(ग) विवाह और अशिक्षा पर
(घ) समाज की अनुचित मान्यताओं पर
Answer: (घ) समाज की अनुचित मान्यताओं पर
इस एकांकी के माध्यम से नाटककार ने समाज की उन प्रतिगामी रूढ़ियों और खोखली सोच पर तीखा प्रहार किया है जो लड़कियों को मात्र उपभोग की वस्तु समझती हैं। विवाह के बाजार में लड़की की उच्च शिक्षा, उसकी रुचि और स्वाभिमान को दरकिनार कर केवल उसके बाह्य रूप और घरेलू काम की दक्षता को ही महत्व दिया जाता है। वर पक्ष अपनी तमाम कमियों को छिपाकर वधू पक्ष पर हावी होने का कुत्सित प्रयास करता है। उमा का बेबाक चरित्र समाज की इस संकीर्ण मानसिकता को आइना दिखाता है और यह स्थापित करता है कि स्त्रियों का भी अपना आत्म-सम्मान होता है।
In simple words: यह नाटक समाज की उस रूढ़िवादी सोच पर करारा व्यंग्य करता है जो लड़कियों को बिना किसी सम्मान के केवल एक वस्तु की तरह देखती और परखती है।
Exam Tip: उत्तर में विवाह से जुड़ी सामाजिक विसंगतियों और लड़के-लड़की के बीच किए जाने वाले दोहरे मापदंड के सामाजिक यथार्थ को स्पष्ट करें।
Question 3. “घर जाकर ज़रा यह पता लगाइएगा कि आपके लाडले बेटे के रीढ़ की हड्डी भी है या नहीं” यह वाक्य शंकर की किस छवि को उजागर करता है?
(क) नैतिक साहस की कमी और चारित्रिक दुर्बलता
(ख) अनुभव और विवेक की कमी
(ग) चारित्रिक दृढ़ता और शारीरिक दुर्बलता
(घ) उदासीनता और एकाकीपन
Answer: (क) नैतिक साहस की कमी और चारित्रिक दुर्बलता
उमा का यह तीखा प्रहार सीधे तौर पर शंकर के खोखले चरित्र और उसके कायर स्वभाव की कलई खोलता है। यहाँ 'रीढ़ की हड्डी' नैतिक बल और स्वाभिमान का प्रतीक है, जिसका शंकर में पूर्णतः अभाव है। वह पूरे प्रसंग में अपने पिता की संकीर्ण और अनुचित बातों का मूक समर्थन करता रहता है और अपने भीतर कोई स्वतंत्र वैचारिक दृढ़ता नहीं दिखाता। इसके अतिरिक्त, उमा यह रहस्योद्घाटन भी करती है कि शंकर लड़कियों के हॉस्टल के पास अनैतिक हरकतें करते हुए पकड़ा गया था और वहाँ से अपमानित होकर भागा था, जो उसकी चारित्रिक कमजोरी और कायरता को पूरी तरह उजागर करता है।
In simple words: यह वाक्य दिखाता है कि शंकर के पास न तो कोई चरित्र था और न ही अपने पिता की गलत बातों का विरोध करने का नैतिक साहस। वह एक डरपोक और कमजोर युवक था।
Exam Tip: शंकर की शारीरिक बनावट (झुकी कमर) और उसकी चारित्रिक कमियों (हॉस्टल वाली घटना) को उत्तर के तार्किक आधार के रूप में प्रस्तुत करें।
Question 4. “जी हाँ, मैं कॉलेज में पढ़ी हूँ मैंने बी.ए. पास किया है” उमा की दृष्टि में शिक्षा प्राप्त करने का सही अर्थ है?
(क) बड़ी-बड़ी डिग्री प्राप्त करना
(ख) कॉलेज में पढ़ना और नौकरी पाना
(ग) माता-पिता और पति को प्रसन्न रखना
(घ) आत्मबल और स्वतंत्र विचार रखना
Answer: (घ) आत्मबल और स्वतंत्र विचार रखना
उमा के इस स्वाभिमानी कथन से यह स्पष्ट होता है कि वह शिक्षा को केवल किसी नौकरी को पाने या दिखावा करने का साधन नहीं मानती। उसके दृष्टिकोण में वास्तविक शिक्षा वही है जो मनुष्य के भीतर आत्मबल जगाए, उसे जागरूक बनाए और समाज के गलत मानदंडों के विरुद्ध खड़े होने का साहस दे। जब वह विवाह के रूढ़िवादी बंधनों के सामने बिना किसी भय के अपनी उच्च शिक्षा को गर्व से स्वीकार करती है, तो यह उसके बौद्धिक विकास, स्वतंत्र चिंतन और अडिग आत्मविश्वास को सिद्ध करता है। शिक्षा का असली ध्येय मनुष्य को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाना है।
In simple words: उमा के अनुसार, शिक्षा का असली मतलब केवल डिग्री लेना नहीं, बल्कि अपने अंदर आत्मविश्वास जगाना और सही-गलत को समझने की स्वतंत्र सोच हासिल करना है।
Exam Tip: शिक्षा के वास्तविक सामाजिक उद्देश्य (सशक्तिकरण और बौद्धिक स्वतंत्रता) को उमा के विद्रोही स्वर से जोड़कर स्पष्ट करें।
Question 5. गोपालप्रसाद और रामस्वरूप में क्या-क्या समानताएँ हैं?
(क) दोनों प्रगतिशील हैं और रूढ़ियों को नकारते हैं।
(ख) दोनों दिखावे और परंपरा के शिकार हैं।
(ग) दोनों शिक्षा और रूढ़ियों के समर्थक हैं।
(घ) दोनों संगीत और स्वादिष्ट भोजन के प्रेमी हैं।
Answer: (ख) दोनों दिखावे और परंपरा के शिकार हैं।
यद्यपि रामस्वरूप अपनी पुत्री को उच्च शिक्षा दिलाते हैं, किंतु समाज के दबाव में वे विवाह के समय इस सच को छिपाने के लिए मजबूर हो जाते हैं। वहीं गोपालप्रसाद स्वयं सुशिक्षित वकील होने के बावजूद अपने पुत्र के लिए कम पढ़ी - लिखी और सुंदर लड़की की माँग करते हैं, जो उनके खोखले आचरण को दर्शाता है। दोनों ही पात्र विवाह को एक सामाजिक लेन - देन या व्यावसायिक सौदा बना देते हैं, जहाँ लड़की की भावनाओं और उसके मान - सम्मान की पूरी उपेक्षा की जाती है। वे दोनों रूढ़िवादी सोच के गुलाम हैं और केवल बाहरी दिखावे को ही जीवन का सत्य मानते हैं।
In simple words: रामस्वरूप और गोपालप्रसाद दोनों ही समाज के दिखावे और पुरानी दकियानूसी सोच के शिकार हैं, जो शादी को एक व्यापार मानकर लड़की की भावनाओं की अनदेखी करते हैं।
Exam Tip: दोनों पिताओं के व्यवहार की विसंगतियों (रामस्वरूप द्वारा सच छिपाना और गोपालप्रसाद का वकील होकर भी दकियानूसी होना) को उत्तर का आधार बनाएं।
Question 6. इस एकांकी की संवाद शैली मुख्यतः कैसी है?
(क) औपचा रि क और शुष्शुक
(ख) स्वा भा वि क और व्यंग्यं यपूर्णपूर्ण
(ग) का व्या त्मक और प्रश्ना त्मक
(घ) भा वुकवु और संक्षिसंक्षिप्त उत्तर
Answer: (ख) स्वाभाविक और व्यंग्यपूर्ण
इस एकांकी के संवाद अत्यंत सजीव, स्वाभाविक और आम बोलचाल की भाषा के अत्यंत समीप हैं, जो पात्रों और उनकी परिस्थितियों को दर्शकों के लिए अत्यंत वास्तविक बना देते हैं। इसके साथ ही, नाटककार ने सामाजिक कुरुपताओं और खोखलेपन पर प्रहार करने के लिए संवादों में तीखे व्यंग्य का प्रयोग किया है। उमा के स्पष्टवादी और गोपालप्रसाद के व्यावसायिक वचनों में व्यंग्य की धार इतनी पैनी है कि वह समाज की रूढ़िवादी सोच पर सीधा प्रहार करती है। यही कारण है कि यह नाटक अत्यंत प्रभावशाली और संदेशपरक बन सका है।
In simple words: इस नाटक के संवाद बिल्कुल आम बातचीत की तरह आसान हैं, लेकिन उनमें समाज के ढोंग पर गहरा और तीखा व्यंग्य छुपा हुआ है।
Exam Tip: संवादों की सहजता (स्वाभाविकता) और व्यंग्य की मारक क्षमता (जैसे उमा के तीखे जवाब) इन दोनों पक्षों को उत्तर में स्पष्ट करें।
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मेरी समझ मेरे विचार
नीचे दिए गए प्रश्नों पर कक्षा में चर्चा कीजिए और उनके उत्तर लिखिए -
Question 1. बाबू रामस्वरूप समाज में आधुनिक व्यवहार का दिखावा करते हैं, जबकि उनके विचार रूढ़िवादी हैं। इस अंतर्द्वंद्व के उदाहरण एकांकी में से खोजकर लिखिए।
Answer: बाबू रामस्वरूप का चरित्र बाह्य रूप से प्रगतिशील और आधुनिक समाज के मानदंडों के अनुकूल दिखाई देता है, किंतु मानसिक रूप से वे अभी भी रूढ़िवादी सोच के गहरे प्रभाव में हैं। उनके व्यक्तित्व का यह द्वंद्व एकांकी में कई अवसरों पर साफ निखरकर सामने आता है। एक तरफ वे नारी शिक्षा के समर्थक हैं और समाज की परवाह न करते हुए अपनी पुत्री उमा को बी.ए. तक की उच्च शिक्षा दिलवाते हैं, जो कि उनकी आधुनिक सोच का द्योतक है। परंतु जैसे ही उमा के विवाह की बात आती है, वे सामाजिक संकीर्णता और वर पक्ष की दकियानूसी शर्तों के आगे घुटने टेक देते हैं तथा अपनी सुशिक्षित पुत्री को मात्र मैट्रिक पास बताने का घृणित प्रयास करते हैं।
वे लड़के वालों को प्रभावित करने के लिए दिखावटी रूप से अपने घर को आधुनिक फर्नीचर से सजाते हैं, तरह - तरह के नाश्ते का प्रबंध करते हैं, और उमा को पाउडर लगाकर व सुंदर वस्त्र पहनकर आने के लिए विवश करते हैं। वे चाहते हैं कि समाज की दृष्टि में वे एक अत्यंत सभ्य और आधुनिक पिता दिखें, किंतु आंतरिक रूप से वे उसी स्त्री - विरोधी सोच के भागीदार बन जाते हैं जहाँ कन्या को एक बेजान बिकाऊ वस्तु की तरह परखा जाता है। रामस्वरूप का दोहरा आचरण दिखावटी आधुनिकता और वास्तविक रूढ़िवादिता के बीच पिसते मध्यवर्गीय पिता के गंभीर वैचारिक संकट व लाचारी को उजागर करता है।
In simple words: रामस्वरूप ने अपनी बेटी उमा को कॉलेज तो पढ़ाया, लेकिन समाज के डर से शादी के समय उसकी पढ़ाई छिपाई और उसे सज - धजकर लड़कों के सामने आने को कहा। यह दिखाता है कि वे बाहर से आधुनिक और अंदर से दकियानूसी सोच के थे।
Exam Tip: इस वैचारिक अंतर्द्वंद्व के दोहरे पक्ष - सकारात्मक (उमा को बी.ए. पढ़ाना) और नकारात्मक (शादी के समय सच छिपाना व सजाकर पेश करना) - को उत्तर में स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करें।
Question 2. ‘रीढ़ की हड्डी’ के संदर्भ में दो अलग-अलग पात्रों के लिए भिन्न-भिन्न अर्थों में आया है, उनकी पहचान कीजिए और लिखिए।
Answer: इस एकांकी में 'रीढ़ की हड्डी' शीर्षक का रूपक दो अत्यंत महत्वपूर्ण पात्रों - उमा और शंकर के चरित्र को दर्शाने के लिए बिल्कुल विपरीत और भिन्न - भिन्न अर्थों में प्रयुक्त हुआ है:
• उमा के चरित्र के संदर्भ में: उमा के लिए 'रीढ़ की हड्डी' उसके सुदृढ़ आत्म - सम्मान, नैतिक साहस, बौद्धिक परिपक्वता और सामाजिक रूढ़ियों के विरुद्ध खड़े होने की अटूट शक्ति का प्रतीक है। वह समाज की दकियानूसी परंपराओं के आगे घुटने टेकने के बजाय निडरतापूर्वक सत्य का पक्ष लेती है और अपनी स्त्री मर्यादा की रक्षा करती है। उसका व्यक्तित्व यह सिद्ध करता है कि वे वैचारिक रूप से एक मजबूत रीढ़ (रीढ़ की हड्डी) वाली स्वाभिमानी नारी है।
• शंकर के चरित्र के संदर्भ में: शंकर के लिए यह शीर्षक उसकी शारीरिक, मानसिक और चारित्रिक दुर्बलता तथा कायरता को दर्शाता है। वह वैचारिक रूप से खोखला है; उसमें अपने पिता के संकीर्ण विचारों का विरोध करने की तनिक भी हिम्मत नहीं है। इसके साथ ही, शारीरिक रूप से भी उसकी कमर झुकी हुई है, और उमा द्वारा उसकी चारित्रिक हीनता का पर्दाफाश करना यह सिद्ध करता है कि वह नैतिक रूप से रीढ़विहीन (बिना रीढ़ की हड्डी वाला) व्यक्ति है।
संक्षेप में, यह प्रतीक उमा के अदम्य साहस (रीढ़ की उपस्थिति) और शंकर की नैतिक कायरता (रीढ़ की अनुपस्थिति) के अंतर को रेखांकित करता है।
In simple words: इस नाटक में उमा के लिए 'रीढ़ की हड्डी' का मतलब स्वाभिमान और साहस है, जबकि शंकर के लिए इसका अर्थ उसकी कमजोरी और कायरता है, क्योंकि वह शारीरिक और नैतिक दोनों रूप से कमजोर है।
Exam Tip: दोनों पात्रों (उमा और शंकर) के चारित्रिक गुणों का विश्लेषण करते हुए 'रीढ़ की हड्डी' के सकारात्मक व नकारात्मक प्रतीकात्मक अर्थ को अलग-अलग शीर्षकों में प्रस्तुत करें।
Question 3. “मेरी समझ में तो ये पढ़ाई-लिखाई के जंजाल आते नहीं।” प्रेमा की इस सोच से उस समय की स्त्री-शिक्षा की स्थिति के विषय में क्या पता चलता है?
Answer: उमा की माता प्रेमा के इस कथन से तत्कालीन भारतीय समाज में नारी शिक्षा के प्रति व्याप्त संकीर्ण, उपेक्षित और दमनकारी दृष्टिकोण की सजीव झलक मिलती है। जब वह शिक्षा अर्जन को एक निरर्थक 'जंजाल' (झंझट) मानती है, तो यह स्पष्ट होता है कि उस युग में न केवल पुरुष बल्कि स्वयं महिलाएँ भी अज्ञानतावश शिक्षा के वास्तविक महत्व व अधिकारों से पूरी तरह अनभिज्ञ थीं। समाज में यह दकियानूसी धारणा अत्यंत गहरी पैठ बना चुकी थी कि लड़कियों को पढ़ाने - लिखाने से कोई लाभ नहीं है, क्योंकि उनका एकमात्र कार्य चूल्हा - चौका सँभालना और घर - गृहस्थी का प्रबंधन करना ही है।
प्रेमा स्वयं एक कम पढ़ी - लिखी महिला है, इसलिए वह उसी पारंपरिक और संकुचित सोच को आदर्श मानती है तथा अपनी पुत्री उमा द्वारा अर्जित की गई बी.ए. की डिग्री को विवाह के मार्ग की बाधा व अनावश्यक बवाल समझती है। यह प्रसंग यह प्रमाणित करता है कि उस दौर की अधिकांश महिलाएँ शिक्षा के अवसरों से सर्वथा वंचित रखी जाती थीं, जिसके परिणामस्वरूप उनकी वैचारिक क्षमता और सोच का दायरा भी पुरुषों के अधीन तथा संकीर्ण रूढ़ियों तक ही सिमट कर रह गया था।
In simple words: प्रेमा के इस कथन से पता चलता है कि उस समय लड़कियों को पढ़ाना अच्छा नहीं माना जाता था और लोग सोचते थे कि लड़कियों का काम केवल घर-गृहस्थी सँभालना है, इसलिए पढ़ाई उनके लिए एक झंझट थी।
Exam Tip: उत्तर में प्रेमा की स्वयं की अशिक्षा और तत्कालीन समाज की पितृसत्तात्मक सोच (जहाँ लड़की का कर्तव्य केवल घर तक सीमित था) के आपसी संबंध को स्पष्ट करें।
Question 4. लेखक ने ‘रीढ़ की हड्डी’ शब्द को एकांकी के शीर्षक के रूप में क्यों चुना होगा? यदि आप इस एकांकी का दूसरा शीर्षक रखना चाहें, जो इसकी मुख्य बात को दर्शाए, तो वह क्या होगा और क्यों?
Answer: नाटककार ने इस एकांकी का शीर्षक 'रीढ़ की हड्डी' अत्यंत विचारपूर्वक और प्रतीकात्मक रूप से चुना है, क्योंकि यह संपूर्ण नाटक के मूल संदेश और सामाजिक समस्या को सुदृढ़ता से व्यक्त करता है। यहाँ 'रीढ़ की हड्डी' केवल मानव देह का कोई जैविक अंग मात्र नहीं है, बल्कि यह मनुष्य के भीतर विद्यमान आत्म - सम्मान, अडिग साहस और विपरीत परिस्थितियों में मर्यादा के साथ खड़े होने के नैतिक बल का सुंदर प्रतीक है। एकांकी में जहाँ उमा अपनी उच्च शिक्षा और स्त्री स्वाभिमान की रक्षा के लिए रूढ़ियों के विरुद्ध तनकर खड़ी हो जाती है, वहीं शंकर अपने पिता के स्त्री - विरोधी दंभ का अंधानुकरण करता हुआ झुकी कमर के साथ एक रीढ़विहीन कायर की भांति खड़ा रहता है। यह शीर्षक दोनों विपरीत पात्रों के नैतिक बल के अंतर को पूरी स्पष्टता से उजागर करता है।
यदि मुझे इस नाट्य रचना को कोई अन्य नाम देना हो, तो मैं इसका शीर्षक "स्वाभिमान की पुकार" या "आत्म - सम्मान की आवाज़" रखना चाहूँगा। यह शीर्षक अत्यंत प्रासंगिक होगा क्योंकि संपूर्ण नाटक का कथानक और चरमोत्कर्ष उमा द्वारा अपने स्वाभिमान की रक्षा के लिए उठाई गई प्रखर आवाज पर ही टिका हुआ है। यह समाज की संकीर्ण और दकियानूसी सोच को सीधी चुनौती देता है, जो कि इस एकांकी का सबसे महत्वपूर्ण व कालजयी संदेश है।
In simple words: लेखक ने यह शीर्षक इसलिए चुना क्योंकि 'रीढ़ की हड्डी' इंसान के साहस और स्वाभिमान का प्रतीक है। अगर हमें दूसरा नाम देना हो, तो 'आत्म-सम्मान की आवाज़' बिल्कुल सही रहेगा, क्योंकि पूरी कहानी उमा के स्वाभिमान की लड़ाई के बारे में है।
Exam Tip: इस उत्तर को दो भागों में लिखें - पहले भाग में 'रीढ़ की हड्डी' के लाक्षणिक अर्थ का औचित्य समझाएं और दूसरे भाग में नए शीर्षक का चयन कर उसका तार्किक कारण दें।
लेखक परिचय – जगदीशचंद्र माथुर
- नाम: जगदीशचंद्र माथुर
- जन्म: सन् 1917 ई.
- स्थान: खुर्जा, बुलंदशहर जिला (शासकीय रिकॉर्ड अनुसार शाहजहाँपुर), उत्तर प्रदेश
- निधन: सन् 1978 ई.
- शिक्षा: इलाहाबाद विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त की।
- प्रशासकीय कार्य: वे भारतीय सिविल सर्विस (ICS) के प्रतिष्ठित अधिकारी के रूप में चयनित हुए। उन्होंने बिहार राज्य के शिक्षा सचिव तथा आकाशवाणी (ऑल इंडिया रेडियो) के महानिदेशक के रूप में अपनी सेवाएँ प्रदान कीं। प्रशासनिक दायित्वों के बीच भी वे आजीवन साहित्य सृजन में निरंतर सक्रिय बने रहे।
- साहित्यिक यात्रा: प्रयाग में अध्ययन के दौरान ही उन्होंने लेखन कार्य प्रारंभ कर दिया था। उस समय की चर्चित साहित्यिक पत्रिकाओं जैसे "चाँद" और "रूपाभ" में उनकी रचनाएँ प्रकाशित होती थीं। हिंदी नाटक और रंगमंच के आधुनिक विकास में उनकी ऐतिहासिक भूमिका मानी जाती है।
- प्रमुख रचनाएँ: 'भोर का तारा', 'कोणार्क', 'ओ मेरे सपने', 'शारदीया', 'पहला राजा', 'दस तस्वीरें' आदि उनकी अमर रचनाएँ हैं। उनकी संपूर्ण रचनाएँ "जगदीशचंद्र माथुर रचनावली" (चार खंडों में) संकलित हैं, जिनमें से 'कोणार्क' उनका सबसे लोकप्रिय और मंचित नाटक है।
- साहित्यिक विशेषता: माथुर जी ने ऐतिहासिक नाटकों के साथ - साथ सामाजिक समस्याओं और मानवीय विडंबनाओं पर आधारित कई उत्कृष्ट एकांकी नाटकों की रचना की। उनकी संवाद शैली अत्यंत सहज, बोधगम्य, व्यंग्यपूर्ण और आम बोलचाल के बहुत निकट है।
पात्र परिचय
- उमा: इस एकांकी की सबसे सशक्त, साहसी और मुख्य पात्र। बी.ए. उत्तीर्ण, सुशिक्षित, कला - प्रेमी और स्वाभिमानी युवती, जो स्त्री - शिक्षा और नारी सम्मान का प्रतिनिधित्व करती है।
- रामस्वरूप (बाबू): उमा के पिता। वे समाज में प्रगतिशील दिखने का दिखावा करते हैं, किंतु वैचारिक रूप से रूढ़ियों के शिकार हैं। वे सामाजिक संकीर्णता के आगे झुककर अपनी बेटी की उच्च शिक्षा को छिपाने का प्रयास करते हैं।
- प्रेमा: उमा की माता। पुरानी और पारंपरिक सोच वाली महिला जो स्त्री - शिक्षा को व्यर्थ का जंजाल मानती है और गृहकार्य को ही कन्या की मुख्य योग्यता समझती है।
- गोपालप्रसाद: लड़के (शंकर) के पिता। पेशे से वकील और अनुभवी होने के बावजूद नारी विरोधी व दकियानूसी सोच के कट्टर समर्थक हैं, जो विवाह को एक व्यावसायिक सौदा मानते हैं।
- शंकर: गोपालप्रसाद का बेटा। मेडिकल कॉलेज में पढ़ने वाला चरित्रहीन और अकर्मण्य युवक, जो शारीरिक और नैतिक रूप से झुकी हुई कमर (बिना रीढ़ की हड्डी) वाला है।
- रतन: बाबू रामस्वरूप का वफादार और भोला घरेलू नौकर। एकांकी के हास्य प्रसंगों को उत्पन्न करने वाला एक रोचक पात्र।
पाठ का सारांश (चरण-दर-चरण संक्षिप्त सारांश)
- पहला भाग - तैयारी का प्रसंग: बाबू रामस्वरूप अपने नौकर रतन के साथ मिलकर बैठक को सजाने और तख्त बिछाने में व्यस्त हैं। आज उनकी बेटी उमा को देखने गोपालप्रसाद और उनका बेटा शंकर आने वाले हैं। इसी बीच रामस्वरूप और उनकी पत्नी प्रेमा में नोक - झोंक होती है। प्रेमा बताती है कि उमा पाउडर लगाने और सजने - सवरने से मना कर रही है और मुँह फुलाकर बैठी है। रामस्वरूप उसे समझाते हैं कि गोपालप्रसाद दकियानूसी विचारों के हैं और उन्हें कम पढ़ी - लिखी बहू चाहिए, इसलिए उमा की बी.ए. की डिग्री को छिपाकर केवल मैट्रिक पास बताने की योजना के अनुसार ही काम करना होगा।
- दूसरा भाग - गोपालप्रसाद और रामस्वरूप की बातचीत: गोपालप्रसाद और उनका बेटा शंकर रामस्वरूप के घर पधारते हैं। गोपालप्रसाद की आँखों और व्यवहार से चालाकी साफ झलकती है, जबकि उनका बेटा शंकर केवल खीसें निपोरने वाला झुकी कमर का एक कमजोर युवक है। नाश्ता करते हुए दोनों बुजुर्ग पुराने जमाने की बातें करते हैं और गोपालप्रसाद विवाह को एक 'बिजनेस' की तरह डील करते हुए साफ कहते हैं कि उन्हें अधिक पढ़ी - लिखी लड़की नहीं चाहिए, क्योंकि मर्दों का काम पढ़ना है, औरतों का नहीं। रामस्वरूप उनकी इस बात पर हाँ - में - हाँ मिलाते हैं।
- तीसरा भाग - उमा का आगमन: उमा साधारण कपड़ों में, बिना किसी बनावटी श्रृंगार के, सिर झुकाए हाथ में पान की तश्तरी लेकर बैठक में प्रवेश करती है। जैसे ही वह पान देती है, उसका चेहरा ऊपर उठता है और आँखों पर लगा सोने की रिम का चश्मा दिखाई देता है। चश्मा देखकर गोपालप्रसाद और शंकर चौंक जाते हैं। रामस्वरूप बात को सँभालने के लिए झूठ बोलते हैं कि आँखों में कुछ दर्द होने के कारण यह चश्मा कुछ दिनों के लिए लगाया गया है।
- चौथा भाग - लड़की की परीक्षा: गोपालप्रसाद उमा से उसके गाने - बजाने और सिलाई - पेंटिंग के बारे में पूछते हैं। रामस्वरूप के कहने पर उमा सितार के साथ मीरा का प्रसिद्ध भजन "मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई" अत्यंत तल्लीनता से गाती है। गाते समय जब उसकी आँखें अचानक शंकर की झेंपती हुई आँखों से मिलती हैं, तो वह एकाएक रुक जाती है। इसके बाद गोपालप्रसाद उमा के पेंटिंग, सिलाई और उसके द्वारा जीते गए पुरस्कारों के बारे में सवाल करते हैं, किंतु उमा पूरी तरह शांत रहती है।
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उमा का विद्रोह
जब गोपालप्रसाद बार-बार उमा से सवाल करते हैं, तो वह धीमे किंतु दृढ़ स्वर में जवाब देती है। वह कहती है कि जब कोई मेज-कुर्सी बेची जाती है, तो दुकानदार उससे उसकी राय नहीं पूछता, बल्कि केवल ग्राहक को दिखा देता है। वह आगे पूछती है कि क्या लड़कियों के पास भावनाएं और दिल नहीं होता? क्या वे बेजान वस्तुएं या लाचार भेड़-बकरियां हैं जिन्हें कसाई की तरह जांच-परखकर खरीदा जाए? उमा की ये बातें सुनकर गोपालप्रसाद काफी नाराज हो जाते हैं। इसके बाद उमा अत्यंत कड़े शब्दों में खुलासा करती है कि गोपालप्रसाद का बेटा शंकर पिछले फरवरी में लड़कियों के छात्रावास के आसपास चक्कर काटते हुए पकड़ा गया था और वहाँ से अपमानित होकर भागा था। यह सच्चाई उजागर होते ही घबराया हुआ शंकर अपने पिता से वहाँ से चलने का आग्रह करता है। गुस्से में लाल होकर गोपालप्रसाद जाने लगते हैं, तभी उमा उन पर आखिरी प्रहार करते हुए कहती है कि वे अपने प्रिय बेटे की रीढ़ की हड्डी की जांच अवश्य करवाएं कि वह सीधी भी है या नहीं। इसके बाद दोनों पिता-पुत्र वहाँ से चले जाते हैं और उमा रोने लगती है। नाटक के अंत में नौकर रतन मक्खन लेकर लौटता है और इसी दृश्य के साथ पर्दा गिर जाता है।
एकांकी विधा की विशेषताएँ
कक्षा 9 हिंदी के इस अध्याय में एकांकी विधा के निम्नलिखित महत्वपूर्ण तत्व दिखाई देते हैं -
- एकांकी का नाम: रीढ़ की हड्डी
- लेखक का नाम: जगदीशचंद्र माथुर
- पात्र: एकांकी में कुल छह पात्र हैं - उमा, रामस्वरूप, प्रेमा, शंकर, गोपालप्रसाद और रतन।
- परिवेश और देश-काल: यह एकांकी वर्ष 1939 के भारतीय मध्यम वर्ग के समाज को दर्शाती है, जहाँ विवाह की पुरानी परंपराओं और नारी-शिक्षा के प्रति रूढ़िवादी नजरिया हावी था।
- रंग-निर्देश और मंच-निर्देश: एकांकी के प्रारंभ में कमरे की सामान्य सजावट का वर्णन है, जो वातावरण को स्पष्ट करता है। इसके अलावा, पात्रों के हाव-भाव जैसे 'सकपकाना', 'खीसें निपोरना' और 'क्रोधित होना' आदि मंच-निर्देशन को दर्शाते हैं।
- संवाद-निर्देश: पात्रों के मानसिक भावों को प्रकट करने के लिए विभिन्न निर्देश दिए गए हैं, जैसे 'धीमी किंतु दृढ़ आवाज में' या 'तीखे स्वर में' बोलना।
- मुख्य समस्याएँ: इस नाटक में महिलाओं की शिक्षा का विरोध करना, शादी-ब्याह में दहेज का लेन-देन और नारी के सम्मान को ठेस पहुँचाना जैसी सामाजिक बुराइयों को उठाया गया है।
- केंद्रीय विचार: पढ़ी-लिखी महिला भी समाज में बराबरी के मान-सम्मान की अधिकारी है। विवाह के समय किसी लड़की को महज एक बेजान वस्तु की तरह नहीं आंका जाना चाहिए।
- व्यंग्यात्मक संवाद: नाटक के संवादों में गहरा कटाक्ष है। जैसे गोपालप्रसाद का यह कहना कि 'पंख केवल मोर के होते हैं, मोरनी के नहीं', समाज के दोहरे चरित्र पर तीखा प्रहार करता है।
- समाधान और परिणाम: नाटक का अंत उमा के साहसी विद्रोह से होता है। वह परिस्थितियों के आगे झुकने वाली निर्बल लड़की नहीं, बल्कि अपने हकों के लिए सीना तानकर खड़ी होने वाली एक आत्मविश्वासी नारी है।
कठिन शब्द और उनके अर्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| अधेड़ | ढलती उम्र का या आधी उम्र का व्यक्ति |
| तख्त | लकड़ी की बड़ी चौकी अथवा बैठने का आसन |
| गंदुमी | गेहूँ जैसे रंग का (गेहुँआ) |
| जंजाल | बखेड़ा, झंझट या परेशानी का काम |
| दकियानूसी | संकीर्ण या रूढ़िवादी विचारों वाला |
| खीस निपोरना | बिना बात के दाँत दिखाकर हँसना |
| खासियत | विशेष गुण, स्वभाव या खूबी |
| तकल्लुफ़ | दिखावा, बनावट या औपचारिक शिष्टाचार |
| मुखातिब | किसी को संबोधित करना या बात करना |
| निहायत | बहुत अधिक या अत्यंत |
| बालाई | मलाई या दूध के ऊपर जमी परत |
व्याकरण - मुहावरे और कहावत
भीगी बिल्ली की तरह
अर्थ: डर के मारे सहम जाना या अत्यंत शांत बैठना।
पाठ में प्रयोग: "उनके पीछे-पीछे भीगी बिल्ली की तरह रतन आ रहा है - खाली हाथ।"
वाक्य प्रयोग: शिक्षक को देखते ही शरारती छात्र भीगी बिल्ली की तरह कोने में बैठ गया।
मुँह फुलाना
अर्थ: नाराज होना या रूठ जाना।
पाठ में प्रयोग: "लेकिन वह तुम्हारी लाडली बेटी तो मुँह फुलाए पड़ी है।"
वाक्य प्रयोग: खिलौना न मिलने पर छोटे बच्चे अक्सर मुँह फुला लेते हैं।
किस मर्ज की दवा होना
अर्थ: किसी काम का न रहना या निरर्थक साबित होना।
पाठ में प्रयोग: "और तुम उसकी माँ, किस मर्ज की दवा हो?"
वाक्य प्रयोग: संकट के समय जो मित्र मदद न करे, वह किस मर्ज की दवा है?
सिर चढ़ाना
अर्थ: बहुत अधिक लाड़-प्यार देकर बिगाड़ देना।
पाठ में प्रयोग: "तुम्हीं ने उसे पढ़ा-लिखाकर इतना सिर चढ़ा रखा है।"
वाक्य प्रयोग: बच्चों की हर अनुचित जिद पूरी करके उन्हें सिर चढ़ाना ठीक नहीं है।
सब-कुछ उगलना
अर्थ: छिपी हुई सारी बातें या गुप्त रहस्य बता देना।
पाठ में प्रयोग: "मगर तुम तो अभी से सब-कुछ उगले देती हो।"
वाक्य प्रयोग: पुलिस की सख्ती देखते ही चोर ने सब-कुछ उगल दिया।
काँटों में घसीटना
अर्थ: किसी को अकारण ही परेशानी या मुसीबत में डालना।
पाठ में प्रयोग: "यह लीजिए, आप तो मुझे काँटों में घसीटने लगे।"
वाक्य प्रयोग: मुझे इस पारिवारिक विवाद में घसीटने का कोई मतलब नहीं है।
इज्जत उतारना
अर्थ: सार्वजनिक रूप से अपमानित करना।
पाठ में प्रयोग: "बाबू रामस्वरूप, आपने मेरी इज्जत उतारने के लिए मुझे यहाँ बुलाया था?"
वाक्य प्रयोग: किसी सभ्य व्यक्ति की भरी सभा में इज्जत उतारना बहुत निंदनीय है।
मुँह छिपाकर भागना
अर्थ: शर्मिंदगी के कारण छिप जाना या बचकर निकलना।
पाठ में प्रयोग: "इनसे पूछिए कि ये किस तरह अपना मुँह छिपाकर भागे थे।"
वाक्य प्रयोग: जब चोरी पकड़ी गई, तो वह वहाँ से मुँह छिपाकर भाग गया।
खीस निपोरना
अर्थ: चापलूसी करते हुए दाँत दिखाकर हँसना।
पाठ में प्रयोग: "(शंकर और रामस्वरूप खीस निपोरते हैं।)"
वाक्य प्रयोग: बिना किसी कारण के हर बात पर खीस निपोरना अच्छी आदत नहीं है।
बाप सेर है तो लड़का सवा सेर
अर्थ: जब पुत्र अपने पिता से भी अधिक चालाक या बुराई में आगे निकल जाए।
पाठ में प्रयोग: रामस्वरूप ने गोपालप्रसाद और शंकर के कपटपूर्ण स्वभाव को उजागर करने के लिए इसका प्रयोग किया।
सकारात्मक प्रयोग: रमेश के पिता एक बहुत अच्छे धावक थे और रमेश ने भी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता - सच ही कहा गया है कि बाप सेर है तो लड़का सवा सेर।
अति लघु उत्तरीय प्रश्न उत्तर
Question 1. “रीढ़ की हड्डी” एकांकी के लेखक कौन हैं और इसकी रचना कब हुई?
Answer: इस एकांकी के रचनाकार प्रसिद्ध नाटककार जगदीशचंद्र माथुर हैं। उन्होंने इस नाटक की रचना वर्ष 1939 में की थी।
In simple words: इसके लेखक जगदीशचंद्र माथुर हैं और यह नाटक साल 1939 में लिखा गया था।
Exam Tip: लेखक का नाम 'जगदीशचंद्र माथुर' और रचना वर्ष '1939' उत्तर में स्पष्ट रूप से लिखें।
Question 2. एकांकी में रामस्वरूप ने उमा की शिक्षा के बारे में क्या झूठ बोला?
Answer: रामस्वरूप ने गोपालप्रसाद से यह बात छिपाई कि उमा ने स्नातक (बी.ए.) किया है। उन्होंने झूठ कहा कि उनकी पुत्री केवल दसवीं (मैट्रिक) कक्षा तक ही पढ़ी-लिखी है।
In simple words: रामस्वरूप ने अपनी बी.ए. पास बेटी उमा को केवल मैट्रिक पास बताया ताकि उसकी शादी हो सके।
Exam Tip: उत्तर में 'मैट्रिक' और 'बी.ए.' दोनों ही डिग्रियों का उल्लेख करना आवश्यक है।
Question 3. गोपालप्रसाद किस व्यवसाय से जुड़े थे?
Answer: गोपालप्रसाद वकालत के पेशे से संबंध रखते थे। वे अत्यंत शिक्षित होने के साथ-साथ कई सभा-संस्थाओं से भी जुड़े थे, परंतु महिलाओं की उच्च शिक्षा के वे पूरी तरह खिलाफ थे।
In simple words: गोपालप्रसाद पेशे से एक वकील थे, लेकिन इसके बावजूद वे लड़कियों की पढ़ाई-लिखाई के खिलाफ थे।
Exam Tip: 'वकील' शब्द के साथ उनकी सामाजिक भागीदारी और संकीर्ण सोच का संक्षिप्त उल्लेख करें।
Question 4. शंकर की शारीरिक विशेषताएँ क्या थीं?
Answer: शंकर का स्वर काफी धीमा और झेंप से भरा हुआ था। उसकी पीठ आगे की ओर झुकी रहती थी, जो न केवल उसके कमजोर स्वास्थ्य को बल्कि उसके दुर्बल चरित्र को भी प्रदर्शित करती थी।
In simple words: शंकर की पीठ झुकी हुई थी और उसकी आवाज पतली व झेंपने वाली थी, जो उसके कमजोर स्वभाव को दिखाती है।
Exam Tip: 'झुकी कमर' और 'पतली व खिसियाहट-भरी आवाज' जैसे मुख्य बिन्दुओं को उत्तर में अवश्य दर्शाएं।
Question 5. उमा का चश्मा देखकर बाप-बेटे ने क्या प्रतिक्रिया दी?
Answer: जैसे ही गोपालप्रसाद और शंकर ने उमा की आँखों पर सोने के फ्रेम का चश्मा देखा, वे दोनों असहज होकर एक स्वर में 'चश्मा!' चिल्ला उठे। वे मानते थे कि चश्मा पहनने का अर्थ है कि लड़की बहुत अधिक पढ़ती-लिखती है।
In simple words: उमा को चश्मा पहने देखकर वे दोनों डर गए कि लड़की शायद ज्यादा पढ़ी-लिखी है, इसलिए वे हैरान रह गए।
Exam Tip: 'चश्मा' शब्द पर उनकी सामूहिक चौंकने की प्रतिक्रिया और उसके पीछे की रूढ़िवादी सोच को लिखें।
Question 6. उमा ने कौन-सा गीत गाया?
Answer: सितार बजाते हुए उमा ने मीराबाई की सुप्रसिद्ध रचना 'मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई' को अत्यंत मधुर स्वर में गाया।
In simple words: उमा ने सितार बजाते हुए मीराबाई का प्रसिद्ध भजन 'मेरे तो गिरधर गोपाल' गाया।
Exam Tip: भजन की पंक्ति 'मेरे तो गिरधर गोपाल' और वाद्य यंत्र 'सितार' का उल्लेख करना महत्वपूर्ण है।
Question 7. “रीढ़ की हड्डी” शीर्षक का प्रतीकात्मक अर्थ क्या है?
Answer: इस एकांकी में 'रीढ़ की हड्डी' मनुष्य के स्वाभिमान और उसके नैतिक चरित्र की मजबूती को दर्शाती है। नाटक में उमा जहाँ इस आत्मबल से संपन्न है, वहीं शंकर इससे बिल्कुल विहीन है।
In simple words: इसका मतलब इंसान के मान-सम्मान और मजबूत चरित्र से है, जो उमा के पास तो है पर शंकर के पास नहीं।
Exam Tip: 'आत्मसम्मान' और 'चरित्र की मजबूती' को शीर्षक के प्रतीकात्मक अर्थ के रूप में स्पष्ट करें।
Question 8. गोपालप्रसाद ने स्त्री-शिक्षा के विरोध में कौन-सा तर्क दिया?
Answer: गोपालप्रसाद का तर्क था कि प्रकृति में कुछ चीजें केवल नर के लिए ही निश्चित हैं। उनका कहना था कि पंख मोर के पास होते हैं, मोरनी के पास नहीं; और अयाल शेर के सिर पर होती है, शेरनी के नहीं। उनके अनुसार, उच्च शिक्षा पाना केवल पुरुषों का ही विशेषाधिकार है।
In simple words: गोपालप्रसाद ने कहा कि जैसे प्रकृति ने नर और मादा में अंतर रखा है, वैसे ही पढ़ाई भी सिर्फ पुरुषों के लिए बनी है, महिलाओं के लिए नहीं।
Exam Tip: गोपालप्रसाद के इस रूढ़िवादी उदाहरण को जस का तस उद्धृत करते हुए इसका मूल भाव स्पष्ट करें।
Question 9. प्रेमा स्त्री-शिक्षा के बारे में क्या सोचती थीं?
Answer: प्रेमा का विचार था कि नारी के लिए अधिक पढ़ाई-लिखाई करना एक मुसीबत मोल लेने जैसा है। उनके अनुसार, लड़कियों को केवल साधारण अक्षर ज्ञान, थोड़ा-बहुत गणित और अधिक से अधिक 'स्त्री-सुबोधिनी' जैसी धार्मिक-पारिवारिक पुस्तक पढ़ लेनी चाहिए, जो उनके लिए पर्याप्त है।
In simple words: प्रेमा का मानना था कि लड़कियों को ज्यादा नहीं पढ़ना चाहिए, बस थोड़ा-बहुत लिखना-पढ़ना और गृहस्थी चलाना आ जाए, उतना ही बहुत है।
Exam Tip: 'जंजाल' और 'स्त्री-सुबोधिनी' जैसे शब्दों का प्रयोग करते हुए प्रेमा के विचारों को संक्षेप में बताएं।
Question 10. शंकर के बारे में उमा ने क्या रहस्योद्घाटन किया?
Answer: उमा ने खुलासा किया कि गत फरवरी माह में शंकर लड़कियों के हॉस्टल के पास संदिग्ध रूप से मंडराते हुए पकड़े गए थे और वहाँ से अपमानित होकर भाग खड़े हुए थे।
In simple words: उमा ने सबको सच बता दिया कि शंकर लड़कियों के हॉस्टल के पास चक्कर काटते हुए पकड़े गए थे और वहाँ से भगाए गए थे।
Exam Tip: 'लड़कियों के हॉस्टल' और 'वहाँ से भगाए जाने' की घटना को साफ तौर पर लिखें।
Question 11. एकांकी में रतन की क्या भूमिका है?
Answer: रतन रामस्वरूप के घर का नौकर है जो नाटक में मनोरंजन और हास्य का तत्व जोड़ता है। उसकी नादानियाँ और एकांकी के अंत में 'मक्खन' की मांग करना, नाटक के गंभीर माहौल में एक गहरा व्यंग्य उत्पन्न करता है।
In simple words: रतन एक घरेलू नौकर है जो हँसी-मज़ाक पैदा करता है। अंत में उसका मक्खन लेकर आना नाटक के गंभीर माहौल पर गहरा कटाक्ष करता है।
Exam Tip: रतन को 'घरेलू सहायक' और 'हास्य पात्र' बताते हुए अंत में उसके द्वारा पैदा किए गए व्यंग्य को स्पष्ट करें।
Question 12. उमा ने कुर्सी-मेज वाला उदाहरण किस संदर्भ में दिया?
Answer: जब उमा को देखने आए लोग उससे लगातार प्रश्न कर रहे थे, तो उसने तंग आकर कहा कि सामान बेचते समय दुकानदार कभी लकड़ी या मेज से उसकी राय नहीं लेता, वह बस खरीदार के सामने उसे सजाकर रख देता है। उमा ने यह उदाहरण समाज में लड़कियों को शादी के समय एक निर्जीव वस्तु की तरह आंके जाने के विरोध में दिया था।
In simple words: उमा ने यह उदाहरण इसलिए दिया क्योंकि शादी के बाजार में लड़कियों को इंसानों की तरह नहीं, बल्कि बेचने वाले फर्नीचर की तरह परखा जाता है।
Exam Tip: विवाह के समय लड़कियों को 'वस्तु' समझने की सामाजिक बुराई को इस उदाहरण के केंद्र में रखकर उत्तर लिखें।
Question 13. एकांकी में “बैकबोन” शब्द का क्या महत्व है?
Answer: नाटक में 'बैकबोन' या रीढ़ की हड्डी व्यक्ति के स्वाभिमान, साहस और अच्छे चरित्र का सूचक है। उमा ने शंकर के चारित्रिक खोखलेपन को उजागर करने के लिए इस शब्द के जरिए उस पर कटाक्ष किया था कि उसमें स्वयं का कोई आत्मबल या व्यक्तित्व नहीं है।
In simple words: 'बैकबोन' का मतलब आत्मसम्मान और साहस से है। उमा शंकर को ताना मारती है कि उसका अपना कोई चरित्र या हिम्मत नहीं है।
Exam Tip: 'नैतिक साहस', 'चरित्र' और 'उमा का शंकर पर कटाक्ष' जैसे बिन्दुओं को उत्तर में जरूर रेखांकित करें।
Question 14. रामस्वरूप का “हँ-हँ-हँ” क्या दर्शाता है?
Answer: रामस्वरूप का बार-बार बनावटी तरीके से हँसना उनकी लाचारी, चापलूसी की आदत और दोहरी मानसिकता को व्यक्त करता है। वे अंदर से गोपालप्रसाद की रूढ़िवादी बातों का समर्थन नहीं करते, परंतु अपनी पुत्री के विवाह के लोभ में केवल बाहरी तौर पर उनकी हाँ-में-हाँ मिलाते रहते हैं।
In simple words: रामस्वरूप की बनावटी हँसी उनकी मजबूरी और चापलूसी को दिखाती है, क्योंकि वे अंदर से तो गोपालप्रसाद की गलत बातों से असहमत हैं पर बाहर से उनका समर्थन करते हैं।
Exam Tip: 'चापलूसी', 'लाचारी' और 'दोहरा चरित्र' जैसे महत्वपूर्ण शब्दों का प्रयोग अपने उत्तर में करें।
Question 15. एकांकी का अंत किस प्रकार होता है?
Answer: अपनी पोल खुल जाने के कारण गोपालप्रसाद और उनका बेटा अत्यंत क्रोधित होकर वहाँ से प्रस्थान करते हैं। पीछे उमा सिसक-सिसक कर रोने लगती है और उसके लाचार पिता रामस्वरूप हताश होकर कुर्सी पर गिर पड़ते हैं। ठीक उसी क्षण रतन मक्खन लेकर कमरे में प्रवेश करता है, और इसी गहरे व्यंग्यात्मक दृश्य के साथ एकांकी का समापन होता है।
In simple words: अपनी पोल खुलने के बाद लड़के वाले गुस्से में चले जाते हैं, उमा रोने लगती है और पिता निराश हो जाते हैं। तभी नौकर मक्खन लेकर आता है और नाटक खत्म हो जाता है।
Exam Tip: एकांकी के अंतिम दृश्य के सभी प्रमुख पात्रों (गोपालप्रसाद, उमा, रामस्वरूप और रतन) की स्थिति को बताते हुए अंत को स्पष्ट करें।
लघु उत्तरीय प्रश्न उत्तर
Question 1. रामस्वरूप के चरित्र में कौन-सा अंतर्द्वंद्व दिखाई देता है?
Answer: रामस्वरूप के व्यक्तित्व में आधुनिकता और संकीर्णता का एक बड़ा विरोधाभास देखने को मिलता है। वे अपनी बेटी को उच्च शिक्षा दिलाकर उसे स्वावलंबी तो बनाना चाहते हैं, पर समाज के दबाव में आकर शादी के समय उसी शिक्षा को छिपाने पर मजबूर हो जाते हैं। वे गोपालप्रसाद की खोखली और रूढ़िवादी सोच को भली-भांति समझते हैं, पर अपनी बेटी का घर बसाने की लाचारी में चुपचाप उनके सामने गिड़गिड़ाते और झूठी हँसी हँसते रहते हैं।
In simple words: रामस्वरूप अपनी बेटी को पढ़ाते तो हैं, लेकिन शादी के लिए उसकी पढ़ाई छिपाते भी हैं। वे आधुनिक भी दिखना चाहते हैं और समाज के आगे बेबस भी हैं।
Exam Tip: 'आधुनिकता बनाम लाचारी' और 'शिक्षा को छिपाने की मजबूरी' को रामस्वरूप के अंतर्द्वंद्व के रूप में प्रस्तुत करें।
Question 2. गोपालप्रसाद के चरित्र की विशेषताएँ क्या हैं?
Answer: गोपालप्रसाद एक पढ़े-लिखे वकील और समाज में उठने-बैठने वाले चतुर व्यक्ति हैं, परंतु उनकी सोच अत्यंत पिछड़ी हुई है। वे महिलाओं को बराबरी का अधिकार देने के घोर विरोधी हैं। उनकी हर बात में स्वार्थ और चालाकी साफ झलकती है। वे विवाह को एक व्यापार की तरह देखते हैं और अपनी दकियानूसी विचारधारा को सही ठहराने के लिए बेतुके कुतर्कों का सहारा लेते हैं।
In simple words: गोपालप्रसाद पेशे से वकील होने पर भी पिछड़ी सोच वाले हैं। वे बहुत चतुर हैं और लड़कियों को कमतर आंकने के लिए अजीब-अजीब बहाने बनाते हैं।
Exam Tip: गोपालप्रसाद के चरित्र के दो पक्षों - 'शिक्षा व सामाजिक प्रतिष्ठा' और 'पिछड़ी व संकीर्ण मानसिकता' को स्पष्ट रूप से दर्शाएं।
Question 3. उमा की शिक्षा उसके व्यक्तित्व में किस प्रकार झलकती है?
Answer: उमा को मिली उच्च शिक्षा उसके आत्मविश्वास और निर्भीक स्वभाव में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। वह किसी भी गलत बात को चुपचाप स्वीकार नहीं करती। जब उसके स्वाभिमान और स्त्री की गरिमा पर चोट की जाती है, तो वह पूरे साहस के साथ अपनी आवाज उठाती है। शंकर के अनैतिक आचरण का पर्दाफाश करना यह दिखाता है कि शिक्षा ने उसे सही और गलत का अंतर समझने की शक्ति दी है।
In simple words: उमा की पढ़ाई ने उसे आत्मसम्मान और हिम्मत दी है। वह चुपचाप अपमान सहने के बजाय अपनी आवाज बुलंद करती है और सच सबके सामने लाती है।
Exam Tip: उमा के 'स्वाभिमान', 'निर्भीकता' और 'आत्मबल' को उसकी शिक्षा के प्रभाव के रूप में उजागर करें।
Question 4. प्रेमा का पात्र किस सामाजिक वास्तविकता को दर्शाता है?
Answer: प्रेमा का चरित्र उस समय की उन पारंपरिक महिलाओं को दिखाता है जो स्वयं ही पुरुषों की बनाई दकियानूसी व्यवस्था को स्वीकार कर चुकी थीं। वे मानती थीं कि लड़कियों के लिए बहुत अधिक पढ़ना केवल पारिवारिक कलह का कारण बनता है। यह चरित्र दर्शाता है कि जब महिलाएँ खुद ही समाज की गलत परंपराओं का समर्थन करने लगती हैं, तो वे अपनी ही प्रगति की राह में रोड़ा बन जाती हैं।
In simple words: प्रेमा उन महिलाओं का प्रतीक है जो खुद भी लड़कियों की पढ़ाई को आफत समझती हैं। यह दिखाता है कि कैसे कभी-कभी महिलाएँ ही पुरानी रूढ़ियों को बढ़ावा देती हैं।
Exam Tip: प्रेमा के माध्यम से समाज में फैली इस विडंबना को रेखांकित करें कि 'महिलाएँ स्वयं अपनी प्रगति की विरोधी बन जाती हैं'।
Question 5. “रीढ़ की हड्डी” एकांकी का शीर्षक दो अलग-अलग संदर्भों में कैसे प्रयुक्त हुआ?
Answer: इस एकांकी का शीर्षक दो अलग स्तरों पर सार्थक होता है। पहला संदर्भ पूरी तरह भौतिक या शारीरिक है, जहाँ शंकर की शारीरिक कमजोरी के कारण उसकी पीठ झुकी हुई है और उसके पिता उसे सीधे बैठने को कहते हैं। दूसरा संदर्भ गहरा और लाक्षणिक है, जहाँ उमा शंकर के चरित्रहीन और रीढ़विहीन होने पर तंज कसती है। यह दिखाता है कि शंकर के पास अपने निर्णय लेने का कोई नैतिक बल या स्वाभिमान नहीं है।
In simple words: शारीरिक रूप से शंकर की पीठ झुकी हुई है, और मानसिक रूप से उसका अपना कोई स्वाभिमान या मजबूत चरित्र नहीं है। इन दोनों ही अर्थों में शीर्षक सटीक बैठता है।
Exam Tip: उत्तर में शारीरिक (कमजोर कद-काठी) और नैतिक (चरित्र की कमजोरी) दोनों ही अर्थों को स्पष्ट रूप से समझाएं।
Question 6. एकांकी के अंत में रतन का “मक्खन” लेकर आना क्या व्यंग्य करता है?
Answer: नाटक की शुरुआत से ही मेहमानों के सत्कार के लिए मक्खन का न होना एक मुख्य चिंता बनी हुई थी। परंतु जब अंत में सारा तमाशा खत्म हो जाता है, लड़की वाले अपमानित होकर विदा हो चुके होते हैं और पूरा परिवार दुख में डूबा होता है, तब रतन मक्खन लेकर लौटता है। यह घटना इस बात पर तीखा कटाक्ष करती है कि जिस घर में बेटी का स्वाभिमान और जीवन दांव पर लगा था, वहाँ लोग केवल खाने-पीने और दिखावे की छोटी चीजों में उलझे रहे।
In simple words: पूरे समय घरवाले मक्खन के लिए परेशान थे। जब बेटी का रिश्ता टूट गया और सब दुखी थे, तब मक्खन आया। यह दिखाता है कि लोग बड़ी समस्या को छोड़कर छोटी चीजों में फँसे थे।
Exam Tip: 'महत्वपूर्ण रिश्तों की तुलना में मामूली चीजों को प्राथमिकता देना' - इस बिंदु को व्यंग्य के रूप में प्रस्तुत करें।
Question 7. कक्षा 9 हिंदी गंगा अध्याय 6 में “भीगी बिल्ली” उपमा का क्या प्रभाव है?
Answer: नाटक के शुरुआत में नौकर रतन का 'भीगी बिल्ली' की तरह बिना मक्खन लिए डरते-डरते प्रवेश करना दर्शकों के चेहरे पर मुस्कान ले आता है। यह मुहावरा उसकी घबराहट और लाचारी को बहुत ही सजीव और कलात्मक ढंग से पेश करता है। ऐसे ठेठ लोक-मुहावरों के प्रयोग से पूरी एकांकी की भाषा सजीव और आम जनजीवन के बेहद करीब जान पड़ती है।
In simple words: 'भीगी बिल्ली' उपमा नौकर रतन के डर और संकोच को बहुत अच्छे से दिखाती है, जिससे नाटक में थोड़ा हास्य पैदा होता है और भाषा मजेदार बन जाती है।
Exam Tip: 'रतन की भयभीत स्थिति' और 'भाषा का सजीवता' - इन दोनों पहलुओं पर इस उपमा का प्रभाव स्पष्ट करें।
Question 8. “मोर के पंख होते हैं, मोरनी के नहीं” - इस कथन की आलोचना कीजिए।
Answer: गोपालप्रसाद का यह कथन उनकी संकीर्ण और पुरुषवादी मानसिकता का परिचायक है। वे जीव विज्ञान के एक सामान्य नियम को गलत तरीके से मनुष्य के सामाजिक अधिकारों पर थोपने की कोशिश करते हैं। प्रकृति ने जीवों में शारीरिक अंतर जरूर किए हैं, परंतु ज्ञान और शिक्षा अर्जित करने की क्षमता स्त्री और पुरुष दोनों में समान रूप से विद्यमान है। अपनी रूढ़िवादी सोच को सही सिद्ध करने के लिए ऐसा उदाहरण देना पूरी तरह तर्कहीन और निंदनीय है।
In simple words: गोपालप्रसाद का यह तर्क बिल्कुल गलत है। जानवरों के शारीरिक बनावट की तुलना इंसानों की पढ़ाई-लिखाई से नहीं की जा सकती। शिक्षा पर सबका बराबर का अधिकार है।
Exam Tip: इस कथन के 'जैविक' और 'सामाजिक' पक्षों का विश्लेषण करते हुए गोपालप्रसाद के तर्क की खोखली बुनियाद को उजागर करें।
Question 9. उमा द्वारा शंकर की हरकत उजागर करना नैतिक दृष्टि से कैसे उचित था?
Answer: उमा का यह कदम नैतिक रूप से पूरी तरह जायज था। गोपालप्रसाद स्वयं अपनी तमाम कमियों और अपने बेटे के चरित्रहीन होने के बावजूद उमा के रूप, गुण और शिक्षा की इस तरह जांच कर रहे थे मानो वह कोई बेजान सामान हो। ऐसे में उमा को अपने आत्मसम्मान की रक्षा करने और उस पाखंडी परिवार का असली चेहरा सबके सामने लाने का पूरा अधिकार था। जब सामने वाला आपके चरित्र पर उंगली उठाए, तो उसके सच को उजागर करना कायरता नहीं, बल्कि स्वाभिमान की पहचान है।
In simple words: जब लड़के वाले खुद गलत होकर उमा के चरित्र और पढ़ाई पर सवाल उठा रहे थे, तो उमा का सच बोलना और शंकर की पोल खोलना अपने आत्मसम्मान को बचाने के लिए बिल्कुल सही था।
Exam Tip: 'स्वाभिमान की रक्षा' और 'पाखंड का विरोध' के संदर्भ में उमा के कृत्य को नैतिक रूप से सही साबित करें।
Question 10. गंगा पुस्तक कक्षा 9 हिंदी पाठ 6 में व्यंग्य की भाषा किस प्रकार प्रभावशाली है?
Answer: इस पाठ में व्यंग्य को बहुत ही बारीक और असरदार तरीके से पिरोया गया है। नाटक का हर मुख्य संवाद समाज की किसी न किसे कमजोरी पर चोट करता है। रामस्वरूप की चापलूसी भरी हँसी उनकी लाचारी पर कटाक्ष करती है, तो गोपालप्रसाद द्वारा 'खूबसूरती पर टैक्स' की बात करना औरतों को महज सजावटी सामान समझने की मानसिकता पर प्रहार है। अंत में विषम परिस्थितियों के बीच नौकर का मक्खन लेकर उपस्थित होना भी इस बात का व्यंग्य है कि समाज अक्सर असली मुद्दों को छोड़कर बेकार की चीजों में व्यस्त रहता है।
In simple words: नाटक की भाषा बहुत ही धारदार है। इसमें झूठी शान, लड़कियों को वस्तु समझने की सोच और लोगों की लाचारी पर अलग-अलग तरीकों से बहुत गहरा कटाक्ष किया गया है।
Exam Tip: व्यंग्य के विभिन्न स्तरों (पात्रों की हँसी, बेतुकी बातें, और अंत की परिस्थितियाँ) का उदाहरण देते हुए उत्तर लिखें।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न उत्तर
Question 1. “रीढ़ की हड्डी” एकांकी के आधार पर उमा के चरित्र की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
Answer: उमा इस नाटक की मुख्य और अत्यंत प्रभावशाली पात्र है। उसका चरित्र आधुनिक विचारों और आत्मसम्मान से परिपूर्ण है, जिसकी मुख्य खूबियाँ इस प्रकार हैं:
1. उच्च शिक्षित और स्वावलंबी: उमा स्नातक (बी.ए.) उत्तीर्ण है। वह अपनी पढ़ाई को कोई अपराध नहीं मानती, इसलिए शादी के बाजार में अपनी डिग्रियों को छिपाना उसे कतई पसंद नहीं है।
2. दृढ़ स्वाभिमान: वह बनावटी साज-सज्जा और चेहरे पर पाउडर थोपने के सख्त खिलाफ है। जब लड़के वाले उसे परखने की कोशिश करते हैं, तो वह एक वस्तु की तरह चुपचाप बैठने के बजाय अपने मान-सम्मान के लिए अड़ जाती है।
3. साहस और स्पष्टवादिता: गोपालप्रसाद जैसे समाज के दबंग व्यक्ति के सामने भी वह बिना डरे अपनी बात रखती है। वह उन्हें मेज-कुर्सी का सटीक उदाहरण देकर लाजवाब कर देती है।
4. गहरी संवेदनशीलता: उमा केवल कठोर ही नहीं बल्कि भीतर से कोमल और संवेदनशील भी है। जब उसे अपने चरित्र पर संदेह होने का आभास होता है, तो वह दुखी होकर रो पड़ती है।
5. सत्य और न्याय की पक्षधर: अपने साथ हो रहे अन्याय को वह मूकदर्शक बनकर नहीं सहती, बल्कि अनैतिक चरित्र वाले शंकर की पोल खोलकर न्याय संगत व्यवहार करती है।
उमा तत्कालीन समाज की उन साहसी युवतियों का प्रतीक है जो अपनी आवाज उठाना जानती थीं.
In simple words: उमा एक साहसी, स्वाभिमानी और पढ़ी-लिखी लड़की है। वह दिखावे के खिलाफ है और जब लड़के वाले उसका अपमान करते हैं, तो वह डरने के बजाय उनका डटकर मुकाबला करती है।
Exam Tip: उमा के चरित्र की विशेषताओं को अलग-अलग शीर्षकों (जैसे- स्वाभिमानी, साहसी, स्पष्टवादी) के अंतर्गत लिखकर समझाएं ताकि अधिक अंक मिल सकें।
Question 2. कक्षा 9 हिंदी गंगा के छठे अध्याय में व्यंग्य की विभिन्न परतों का विश्लेषण कीजिए।
Answer: इस एकांकी में समाज के खोखलेपन और पुरुषों की दोहरी मानसिकता पर व्यंग्य की कई परतें बिछी हुई हैं, जिन्हें इस तरह समझा जा सकता है:
1. पात्रों के व्यवहार पर व्यंग्य: रामस्वरूप का अपनी पढ़ी-लिखी बेटी की शिक्षा को छिपाना और लड़के वालों के सामने बेबसी में हँसना समाज की लाचारी को दिखाता है। वहीं गोपालप्रसाद खुद कानून के जानकार हैं, लेकिन बहू के रूप में अनपढ़ लड़की चाहते हैं, जो उनके पाखंड को उजागर करता है।
2. रूढ़िवादी संवादों पर व्यंग्य: गोपालप्रसाद के तर्क, जैसे 'मोर के पंख होते हैं, मोरनी के नहीं' और 'लड़कियों की खूबसूरती पर टैक्स लगना चाहिए', यह दिखाते हैं कि समाज स्त्रियों को केवल एक उपभोग की वस्तु और पुरुषों से कमतर समझता है।
3. परिस्थितियों का तीखा व्यंग्य: जब पूरा परिवार अपमान और दुःख की स्थिति में होता है, तब नौकर का मक्खन लेकर आना यह दर्शाता है कि दुनिया कितनी संवेदनहीन और सतही चीजों में उलझी रहती है।
4. शीर्षक में छिपा व्यंग्य: 'रीढ़ की हड्डी' का न होना वास्तव में शंकर के कमजोर चरित्र, व्यक्तित्वहीनता और रीढ़विहीन रवैये पर सबसे बड़ा करारा प्रहार है.
In simple words: इस नाटक में समाज की बुराइयों पर कई तरह से कटाक्ष किया गया है। जहाँ गोपालप्रसाद की बेतुकी बातें उनकी संकीर्ण सोच पर व्यंग्य करती हैं, वहीं शंकर का रीढ़विहीन होना चरित्र की कमजोरी पर बड़ा प्रहार है।
Exam Tip: व्यंग्य के चारों स्तरों (पात्र, संवाद, परिस्थिति और शीर्षक) को अलग-अलग बिंदुओं में वर्गीकृत करके ही अपना उत्तर लिखें।
Question 3. “रीढ़ की हड्डी” एकांकी में स्त्री-शिक्षा को लेकर किन-किन दृष्टिकोणों का चित्रण हुआ है? कक्षा 9 गंगा पाठ 6 के आधार पर लिखिए।
Answer: इस एकांकी में नारी की शिक्षा को लेकर समाज में मौजूद चार अलग-अलग विचारधाराओं को प्रस्तुत किया गया है:
1. गोपालप्रसाद का पुरातनपंथी दृष्टिकोण: वे महिलाओं के पढ़ने-लिखने के सख्त खिलाफ हैं। उनका मानना है कि अधिक शिक्षा पाने से स्त्रियाँ घर का काम ठीक से नहीं संभाल पातीं और उच्च शिक्षा पर केवल पुरुषों का ही अधिकार होना चाहिए।
2. प्रेमा का संकीर्ण घरेलू दृष्टिकोण: प्रेमा खुद एक महिला होकर भी शिक्षा को गृहस्थी के लिए आफत समझती हैं। उनके विचार में लड़कियों को बस थोड़ी-बहुत साक्षरता मिल जाए, उतना ही काफी है।
3. रामस्वरूप का मजबूरी भरा विरोधाभासी दृष्टिकोण: वे अपनी पुत्री को उच्च शिक्षा तो दिलाते हैं, परंतु जब शादी की बात आती है, तो वे समाज के डर से उस शिक्षा को छिपाने का प्रयास करते हैं, जो उनकी दोहरी मानसिकता को दिखाता है।
4. उमा का प्रगतिशील और सकारात्मक दृष्टिकोण: उमा अपनी उच्च शिक्षा को अपना सबसे बड़ा गहना और आत्मसम्मान का आधार मानती है। उसके अनुसार, ज्ञान प्राप्त करना किसी भी तरह का गुनाह नहीं है.
In simple words: नाटक में लड़कियों की पढ़ाई को लेकर चार विचार दिखाए गए हैं - गोपालप्रसाद का पूरी तरह विरोध करना, प्रेमा का इसे आफत समझना, रामस्वरूप का डर के मारे इसे छिपाना, और उमा का इसे अपना गौरव व अधिकार मानना।
Exam Tip: परीक्षा में इन चारों दृष्टिकोणों के नाम (गोपालप्रसाद, प्रेमा, रामस्वरूप और उमा) लिखकर उनके विचारों की संक्षेप में तुलना करें।
Question 4. एकांकी विधा की विशेषताएँ “रीढ़ की हड्डी” के उदाहरणों से स्पष्ट कीजिए।
Answer: 'रीढ़ की हड्डी' नाटक एकांकी विधा की सभी कसौटियों पर पूरी तरह खरा उतरता है। इसकी मुख्य विशेषताएँ इस प्रकार देखी जा सकती हैं:
- संकलन-त्रय का पालन: एकांकी में स्थान, समय और कार्य की एकता होनी चाहिए। इस नाटक की पूरी कहानी एक ही बैठक (कमरे) में, बहुत कम समय के भीतर घटित होती है।
- सीमित पात्र संख्या: इस विधा में बहुत अधिक पात्र नहीं होते। यहाँ भी केवल छह मुख्य पात्र हैं, जो कहानी को केंद्रित रखते हैं।
- चुस्त और प्रभावशाली संवाद: इसके संवाद अत्यंत छोटे और तीखे हैं। उदाहरण के लिए, जब उमा का चश्मा देखकर दोनों मेहमान चौंककर 'चश्मा!' कहते हैं, तो बिना अधिक बोले ही पूरी स्थिति स्पष्ट हो जाती है।
- स्पष्ट रंग-निर्देश: एकांकीकार ने मंच की सज्जा, पात्रों के आने-जाने और उनके हाव-भाव को दर्शाने के लिए सटीक कोष्ठक निर्देशों का उपयोग किया है।
- समस्या का क्रमिक विकास: स्त्री-शिक्षा के विरोध की सामाजिक बुराई को बहुत ही सुगठित ढंग से शुरू करके, चरम सीमा तक पहुँचाया गया है और उमा के विद्रोह के साथ इसका अंत एक अप्रत्याशित प्रभाव छोड़ता है.
In simple words: यह एकांकी बहुत कम समय में, एक ही जगह पर और केवल छह किरदारों के साथ पूरी सामाजिक समस्या को बहुत ही शानदार और छोटे संवादों के जरिए दर्शकों के सामने रख देती है।
Exam Tip: एकांकी विधा के मूल तत्वों जैसे 'संकलन-त्रय', 'सीमित पात्र' और 'संवाद' का उदाहरणों सहित विश्लेषण अवश्य करें।
Question 5. “रीढ़ की हड्डी” एकांकी के माध्यम से जगदीशचंद्र माथुर ने किन सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार किया है?
Answer: लेखक जगदीशचंद्र माथुर ने इस नाटक के जरिए तत्कालीन भारतीय समाज की कई सड़ी-गली रूढ़ियों और कुप्रथाओं पर कड़ा प्रहार किया है:
1. नारी-शिक्षा के प्रति संकीर्णता: समाज का एक बड़ा हिस्सा, जिसमें गोपालप्रसाद जैसे शिक्षित लोग भी शामिल थे, यह मानता था कि लड़कियों को अधिक पढ़ाना परिवार की शांति को भंग करना है।
2. लड़की को निर्जीव वस्तु समझना: विवाह के समय लड़कियों को बाजार के सामान की तरह सजाकर दिखाना, उनकी चाल-ढाल और सिलाई-कढ़ाई की इस तरह परीक्षा लेना मानो वे कोई मशीन हों, इस कुप्रथा की निंदा की गई है।
3. सभ्य समाज का ढोंग और पाखंड: पढ़े-लिखे लोगों का दोहरा चरित्र दिखाया गया है, जो बाहर तो बड़ी-बड़ी बातें करते हैं पर घर में रूढ़िवादी सोच के गुलाम बने रहते हैं।
4. नैतिकता से समझौता व झूठ का सहारा: सामाजिक दबाव के कारण रामस्वरूप को अपनी बेटी की योग्यता छिपानी पड़ती है, जो यह दर्शाता है कि विवाह के बाजार में सच बोलना कितना कठिन हो चुका था।
5. चरित्रहीन पुरुषों की श्रेष्ठता का दंभ: शंकर जैसे आवारा और चरित्रहीन लड़के के लिए भी एक गुणवान और सुशील लड़की की मांग करना समाज के इसी पक्षपातपूर्ण रवैये पर तीखी चोट है.
In simple words: लेखक ने लड़कियों की पढ़ाई का विरोध करने, शादी में उन्हें सामान की तरह जांचने-परखने, समाज के पाखंड, झूठ बोलने की मजबूरी और आवारा लड़कों के लिए भी अच्छी लड़की चाहने के भेदभाव पर करारा हमला किया है।
Exam Tip: प्रत्येक सामाजिक कुरीति (जैसे स्त्री-शिक्षा का विरोध, पाखंड, लड़की को वस्तु समझना) को अलग-अलग बिंदु बनाकर विस्तार से लिखें।
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